जानें ओर समझें वास्तु देव पूजन का क्या है महत्व एवम जानें वर्ष 2020 के शुभ गृह प्रवेश मुहूर्त

वास्तु का अर्थ है एक ऐसा स्थान जहां भगवान और मनुष्य एक साथ रहते हैं। हमारा शरीर पांच मुख्य पदार्थों से बना है और वास्तु का संबंध इन पांचों ही तत्वों से माना जाता है।

Written by: January 14, 2020 1:00 pm

वास्तु का अर्थ है एक ऐसा स्थान जहां भगवान और मनुष्य एक साथ रहते हैं। हमारा शरीर पांच मुख्य पदार्थों से बना है और वास्तु का संबंध इन पांचों ही तत्वों से माना जाता है। कई बार ऐसा होता है कि हमारा घर हमारे शरीर के अनुकूल नहीं होता है तब यह बात हमें प्रभावित करती है और इसी को वास्तु दोष बोला जाता है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि वास्तु मनुष्य के जीवन में बहुत महत्व रखता है। यह प्रत्येक व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डालता है। असल में वास्तु घर आदि के निर्माण करने का प्राचीन भारतीय विज्ञान है। अक्सर कुछ घरों में ये देखा जाता है कि उनके यहां अधिक क्लेश रहता है या फिर हर रोज़ कोई न कोई नुकसान होता रहता है। किसी भी कार्य को आगे बढ़ाने में कठिनाइयां आना, घर में नकारात्मकता महसूस होना आदि इन परिस्थितियों का कारण वास्तु भी हो सकता है। घर में मौजूद इन्हीं वास्तु दोषों को दूर करने के लिए जो पूजा की जाती है उसे वास्तु शांति पूजा कहते हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की गृह प्रवेश वैशाख माह में करने वाले को धन-धान्य की कोई कमी नहीं रहती है। जो व्यक्ति पशु एवं पुत्र सुख चाहता हो, ऐसे व्यक्ति को अपने नए मकान में ज्येष्ठ माह में प्रवेश करना चाहिए। बाकी के महीने वास्तु पूजन व गृह प्रवेश में साधारण फल देने वाले होते हैं। घर चाहे अपना हो या फिर किराए का किंतु गृह प्रवेश होना ही चाहिए। वरना आगे चलकर बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। बिना पूजा करांए या हवन करवांए घर में प्रवेश करने से वास्तु दोष होता है, इसी को दूर करने के लिए पूजा की जाती है। ऐसा करने से सब प्रकार की नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती है।

मान्यताओं के अनुसार माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ माह को गृह प्रवेश के लिए सबसे सही समय बताया गया है। जो फाल्गुन मास में वास्तु पूजन करता है, उसे पुत्र, प्रौत्र और धन प्राप्ति होती है।

इस दौरान न करें गृहप्रवेश

आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, पौष ये सब गृह प्रवेश के लिए शुभ नहीं माने गए हैं।पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार  धनु एवम मीन के सूर्य यानी के मलमास में भी नए मकान में प्रवेश नहीं करना चाहिए। मंगलवार के दिन भी गृह प्रवेश नहीं किया जाता विशेष परिस्थितियों में रविवार और शनिवार के दिन भी गृह प्रवेश वर्जित माना गाया है। सप्ताह के बाकी दिनों में से किसी भी दिन गृह प्रवेश किया जा सकता है। विधिपूर्वक मंत्रोच्चारण करके ही गृह प्रवेश करना चाहिए।

वास्तु पूजा

ब्रह्मा, विष्णु, महेश अन्य सभी देवी-देवताओं की पूजा के साथ-साथ वास्तु की पूजा भी जाती हैं। वास्तु पूजा से वातावरण में फैली हुई सभी बाधाओं को खत्म किया जा सकता है अन्यथा जीवन जीने में बाधा उतपन्न हो सकती हैं। वास्तु अनहोनी, नुकसान और दुर्भाग्य से भी बचाता है।

क्या है वास्तु पूजा

इसकी शांति के लिए वास्तु देव पूजन किया जाता है। इसके अतिरिक्त भी यदि आपको लगता है कि किसी वास्तु दोष के कारण आपके घर में कलह, धन हानि व रोग आदि हो रहे हैं तो आपको वास्तु पूजन करवा लेना चाहिए। किसी शुभ दिन या रवि पुष्य योग को वास्तु पूजन कराना चाहिए।

वास्तु प्राप्ति के लिए अनुष्ठान, भूमि पूजन, नींव खनन, कुआं खनन, शिलान्यास, द्वार स्थापन व गृह प्रवेश आदि अवसरों पर वास्तु देव पूजा का विधान है। घर के किसी भी भाग को तोड़ कर दोबारा बनाने से वास्तु भंग दोष लग जाता है। इसकी शांति के लिए वास्तु देव पूजन किया जाता है। इसके अतिरिक्त भी यदि आपको लगता है कि किसी वास्तु दोष के कारण आपके घर में कलह, धन हानि व रोग आदि हो रहे हैं तो आपको नवग्रह शांति व वास्तु देव पूजन करवा लेना चाहिए। किसी शुभ दिन या रवि पुण्य योग को वास्तु पूजन कराना चाहिए।

उज्जैन के पंडित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि जो व्यक्ति पशुओ एवँम पुत्र का सुख चाहता हो, ऐसे व्यक्ति को अपने नये मकान मे ज्येष्ठ माह में करना चाहिए। बाकी के महीने वास्तु पुजन व गृह प्रवेश में साधारण फल देने वाले होते हैं। शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से लेकर कृष्णपक्ष की दशमी तिथी तक वास्तुनुसार गृह प्रवेश वंश वृध्दि दायक माना गया है।

धनु मीन के सुर्य यानी के मळमास में भी नये मकान में प्रवेश नहीं करना चाहिए। पुराने मकान को जो व्यक्ति नया बनाता है , और वापस अपने पुराने मकान में जाना चाहे , तब उस समय उपरोक्त बातों पर विचार नहीं करना चाहीए । जिस मकान का द्वार दक्षिण दिशा में हो तो गृह प्रवेश एकम् छठ , ग्यारस आदि तिथियों में करना चाहिए । दूज , सातम् और बारस तिथि को पश्चिम दिशा के द्वार का गृह प्रवेश श्रेष्ठ बतलाया गया है।

पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि नवीन घर का प्रवेश उत्तरायण सूर्य में वास्तु पुजन करके ही करना चाहीये । उसके पहले वास्तु का जप यथाशक्ती करा लेना चाहिये। शास्त्रानुसार गृह प्रवेश में माघ ,फाल्गुन ,वैशाख, ज्येष्ठ , आदि मास शुभ बताये गये है । माघ महीने में प्रवेश करने वाले को धन का लाभ होता है। जो व्यक्ति अपने नये घर में फाल्गुन मास में वास्तु पुजन करता है , उसे पुत्र,प्रौत्र और धन प्राप्ति दोनो होता है । चैत्र मास में नवीन घर में रहने के लिये जाने वाले को धन का अपव्यय सहना पडता है।

गृह प्रवेश बैशाख माह में करने वाले को धन धान्य की कोई कमी नहीं रहती है। जो व्यक्ति पशुओ एवँम पुत्र का सुख चाहता हो, ऐसे व्यक्ति को अपने नये मकान मे ज्येष्ठ माह में करना चाहिए । बाकी के महीने वास्तु पुजन व गृह प्रवेश में साधारण फल देने वाले होते हैं। शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से लेकर कृष्णपक्ष की दशमी तिथी तक वास्तुनुसार गृह प्रवेश वंश वृध्दि दायक माना गया है । धनु मीन के सुर्य यानी के मळमास में भी नये मकान में प्रवेश नहीं करना चाहिए । पुराने मकान को जो व्यक्ति नया बनाता है , और वापस अपने पुराने मकान में जाना चाहे , तब उस समय उपरोक्त बातों पर विचार नहीं करना चाहिए । जिस मकान का द्वार दक्षिण दिशा में हो तो गृह प्रवेश एकम् , छठ , ग्यारस आदि तिथियों में करना चाहिए । दूज , सातम् और बारस तिथि को पश्चिम दिशा के द्वार का गृह प्रवेश श्रेष्ठ बतलाया गया है।

इसमें क्या हें वास्तु शांति की विधि

स्वस्तिवचन, गणपति स्मरण, संकल्प, श्री गणपति पूजन, कलश स्थापन और पूजन, पुनःवचन, अभिषेक, शोडेशमातेर का पूजन, वसोधेरा पूजन, औशेया मंत्रजाप, नांन्देशराद, आचार्य आदे का वरेन, योग्ने पूजन, क्षेत्रपाल पूजन, अग्ने सेथापन, नवग्रह स्थापन और पूजन, वास्तु मंडला पूजल और स्थापन, गृह हवन, वास्तु देवता होम, बलिदान, पूर्णाहुति, त्रिसुत्रेवस्तेन, जलदुग्धारा और ध्वजा पताका स्थापन, गतिविधि, वास्तुपुरुष-प्रार्थना, दक्षिणासंकल्प, ब्राम्ळण भोजन, उत्तर भोजन, अभिषेक, विसर्जन

उपयुक्त वास्तु शांति पूजा के हिस्सा है।

सांकेतिक वास्तुशांति

सांकेतिक वास्तु शांति पूजा पद्घति भी होती है, इस पद्घति में हम नोंध के अनुसार वास्तु शांति पूजा में से नज़रअंदार न कर सके वैसी वास्तु शांति पूजा का अनुसरण करते हैं।

‘विष्णुसहस्रनाम स्तोत्र’ विधिवत अनुष्ठान करने से सभी ग्रह, नक्षत्र, वास्तु दोषों की शांति होती है। विद्याप्राप्ति, स्वास्थ्य एवं नौकरी-व्यवसाय में खूब लाभ होता है।

कोर्ट-कचहरी तथा अन्य शत्रुपीड़ा की समस्याओं में भी खूब लाभ होता है। इस अनुष्ठान को करके गर्भाधान करने पर घर में पुण्यात्माएँ आती हैं। सगर्भावस्था के दौरान पति-पत्नी तथा कुटुम्बीजनों को इसका पाठ करना चाहिए।

अनुष्ठान-विधि

सर्वप्रथम एक चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाएँ। उस पर थोड़े चावल रख दें। उसके ऊपर ताँबे का छोटा कलश पानी भर के रखें। उसमें कमल का फूल रखें। कमल का फूल बिल्कुल ही अनुपलब्ध हो तो उसमें अडूसे का फूल रखें। कलश के समीप एक फल रखें। तत्पश्चात ताँबे के कलश पर मानसिक रूप से चारों वेदों की स्थापना कर ‘विष्णुसहस्रनाम’ स्तोत्र का सात बार पाठ सम्भव हो तो प्रातः काल एक ही बैठक में करें तथा एक बार उसकी फलप्राप्ति पढ़ें। इस प्रकार सात या इक्कीस दिन तक करें।

रोज फूल एवं फल बदलें और पिछले दिन वाला फूल चौबीस घंटे तक अपनी पुस्तकों, दफ्तर, तिजोरी अथवा अन्य महत्त्वपूर्ण जगहों पर रखें व बाद में जमीन में गाड़ दें। चावल के दाने रोज एक पात्र में एकत्र करें तथा अनुष्ठान के अंत में उन्हें पकाकर गाय को खिला दें या प्रसाद रूप में बाँट दें। अनुष्ठान के अंतिम दिन भगवान को हलवे का भोग लगायें।

यह अनुष्ठान हो सके तो शुक्ल पक्ष में शुरू करें। संकटकाल में कभी भी शुरू कर सकते हैं। स्त्रियों को यदि अनुष्ठान के बीच में मासिक धर्म के दिन आते हों तो उन दिनों में अनुष्ठान बंद करके बाद में फिर से शुरू करना चाहिए। जितने दिन अनुष्ठान हुआ था, उससे आगे के दिन गिनें।

कब करवानी चाहिए वास्तु शांति..???

यदि बांध काम वास्तु के नियमों के विरुद्घ करने में आया हो तो और उसके ढ़ांचे के लिए धन की कमी महसूस हो

महत्व के कमरे में अथवा बिल्ड़िग में इन्टिरियर में कोइ कमी हो।

आप जब भी कोइ पुराना घर खरीदे।

आप जब लगातार 10 वर्ष से किसी एक जगह पर रह रहे हो

आप जब बहुत लंबे विदेश प्रवास के बाद घर वापस आ रहे हैं तब।

—-नये घर के उदघाटन के समय

वास्तु देव पूजन के लिए आवश्यक सामग्री इस प्रकार हैः–

रोली, मोली, पान के पत्ते, लौंग, इलायची, साबुत सुपारी, जौ, कपूर, चावल, आटा, काले तिल, पीली सरसों, धूप, हवन सामग्री, पंचमेवा, शुद्ध धी, तांबे का लोटा, नारियल, सफेद वस्त्र, लाल वस्त्र-2, पटरे लकड़ी के, फूल, फूलमाला, रूई, दीपक, आम के पत्ते, आम की लकड़ी, पंचामृत (गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) स्वर्ण शलाखा, माचिस, नींव स्थापन के लिए अतिरिक्त सामग्री, तांबे का लोटा, चावल, हल्दी, सरसों, चांदी का नाग-नागिन का जोड़ा, अष्टधातु कश्यप, (5) कौडि़यां, (5) सुपारी, सिंदूर, नारियल, लाल वस्त्र घास, रेजगारी, बताशे, पंचरत्न, पांच नई ईंटे। पूजन वाले दिन प्रातःकाल उठकर प्लॉट/घर की सफाई करके शुद्ध कर लेना चाहिए।

जातक को पूर्व मुखी बैठकर अपने बाएं तरफ धर्मपत्नी को बैठाना चाहिए। पूजा के लिए किसी योग्य विद्वान ब्राह्मण की सहायता लेनी चाहिए। ब्राह्मण को उत्तर मुखी होकर बैठना चाहिए।

मंत्रोच्चारण द्वारा शरीर शुद्धि, स्थान शुद्धि व आसन शुद्धि की जाती है। सर्वप्रथम गणेश जी का आराधना करनी चाहिए। तत्पश्चात नवग्रह पूजा करना चाहिए।

वास्तु पूजन के लिए गृह वास्तु में (81) पव के वास्तु चक्र का निर्माण किया जाता है। 81 पदों में (45) देवताओं का निवास होता है। ब्रह्माजी को मध्य में (9) पद दिए गए है। चारों दिशाओं में (32) देवता और मध्य में (13) देवता स्थापित होते हैं। इनका मंत्रोच्चरण से आह्वान किया जाता है। इसके पश्चात आठों दिशाओं, पृथ्वी व आकाश की पूजा की जाती है। इस सामग्री में तिल, जौ, चावल, घी, बताशे मिलाकर वास्तु को निम्न मंत्र पढ़ते हुए 108 आहुतियां दी जाती हैं।

मंत्र- ऊँ नमो नारायणाय वास्तुरूपाय, भुर्भुवस्य पतये भूपतित्व में देहि ददापय स्वाहा।।

तत्पश्चात आरती करके श्रद्धानुसार ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। इस प्रकार वास्तु देव पूजन करने से उसमें रहने वाले लोगों को सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

नए घर में गृह प्रवेश के लिए कुछ जरूरी टिप्स:—

गृह प्रवेश हमेशा शुभ दिन ही करें। देवी-देवताओं की मूर्तियों को घर की पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए।

पूजा कराने से पहले घर को अच्छे से साफ करें। इसके लिए आप पानी में नमक घोलकर फर्श धो सकते हैं। यह नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है।

घर में प्रवेश के दौरान सीधा पैर पहले रखें।

घर के मेन गेट को अच्छे से सजाएं, क्योंकि इसे सिंह द्वार कहा जाता है यानी वास्तु पुरुष का चेहरा। इसे आम की पत्तियों और ताजे फूलों से सजाएं।

फर्श पर चावल के आटे और शानदार रंगों से रंगोली बनाएं। माना जाता है कि रंगोली बनाने से माता लक्ष्मी आती हैं।

आसपास की जगह को शुद्ध करने के लिए हवन (जड़ी-बूटियों और लकड़ी को आग में डालना) किया जाता है।

यह रहेंगें वर्ष 2020 में वास्तु पूजन के शुभ मुहूर्त —

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार, घर में गृह प्रवेश समारोह के लिए जनवरी में तीन शुभ दिन या नक्षत्र हैं। लोगों को मकर संक्रांति के दौरान दान करने की सलाह दी जाती है जो 14 जनवरी को घर पर नकारात्मक ऊर्जा से दूर करने के लिए आता है। 29 जनवरी को पड़ने वाली बसंत पंचमी घर-पूजा समारोह के लिए शुभ दिनों में से एक है। यहां गृहप्रवेश समारोह के लिए अन्य शुभ तिथियां और समय हैं-

1) 2 जनवरी: 4.23 बजे से 9 बजे तक

2) जनवरी 8-9: 4:14 AM से 3.44 AM तक

3) 29-30 जनवरी: 12:13 PM से 1:19 PM

यह रहेगी फरवरी 2020 में गृहप्रवेश की तारीखें —

फरवरी में गृहप्रवेश समारोह के लिए कई मुहूर्त नहीं हैं। गृहप्रवेश पूजा की मेजबानी के लिए ये शुभ नक्षत्र हैं-

1) 5 फरवरी: 12 बजे से रात 9.31 बजे तक

2) 26 फरवरी: 12 पूर्वाह्न से 10.08 बजे तक

मार्च 2020 (चैत्र ) में गृहप्रवेश  समारोह के लिए कोई शुभ तिथियां नहीं हैं। होलाष्टक के दौरान नए घर में जाने से बचना चाहिए, जो होली से आठ दिन पहले शुरू होता है जो 10 मार्च को पड़ता है।

गृह प्रवेश समारोह की पहली शुभ तिथि 2 मार्च को पड़ती है। निम्नलिखित अन्य संभावित तिथियां हैं, जिन पर आप विचार कर सकते हैं-

1) 2 मार्च: 8.55 बजे से 12.53 बजे तक

2) 30 मार्च: 12 बजे से 2.01 बजे तक उसके बाद गृह प्रवेश मुहूर्त अप्रैल 2020, बैसाख में मिलते हैं।।

इस साल, गृहनिर्माण समारोह के लिए तीन शुभ मुहूर्त हैं। अक्षय तृतीया, गृह प्रवेश पूजा करने के लिए सबसे अच्छे दिनों में से एक है। अन्य शुभ दिन हैं–

1) 6 अप्रैल: 12.16 PM से 3.52 बजे

2) 8 अप्रैल: 6.07 बजे से 8.04 बजे तक

3) 27 अप्रैल: दोपहर 2.30 बजे से 11.59 बजे तक

मई 2020 में गृहप्रवेश की तिथि, ज्येष्ठ घर शिफ्टिंग और गृह प्रवेश समारोह के लिए मई या बैसाख का महीना एक शुभ महीना माना जाता है। अपने परिवार के लिए धन और समृद्धि लाने के लिए सबसे अच्छा माहुर चुनें। बैसाख में आमतौर पर अप्रैल के अंतिम कुछ दिन होते हैं और मई के शुरुआती दिनों में। इन दिनों घर-वार्मिंग पर विचार करें-

1) 4 मई: 12 बजे से 6.13 बजे तक

2) 25 मई: 12 बजे से 6.10 बजे

पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार, जून का कुछ भाग ज्येष्ठ माह में पड़ता है जबकि दूसरा भाग आषाढ़ में पड़ता है। यह सुनिश्चित करें कि आप ज्येष्ठ में गृह प्रवेश का विचार करें और आषाढ़ में नहीं क्योंकि यह अशुभ माना जाता है। यहां कुछ तिथियां दी गई हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने घर को गर्म कर सकते हैं-

1) 1 जून: 12 बजे से 3 बजे तक

2) 5 जून: 3.16 AM से 4.43 AM 3) जून 15-16: 5.23 बजे से 3.18 बजे ।

गृह प्रवेश समारोह के लिए जुलाई, अगस्त, सितंबर के महीने में कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं हैं। इस अवधि के दौरान अपने नए घर में जाने से बचें क्योंकि इससे नुकसान, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और परेशानियां हो सकती हैं।

नवंबर 2020 में गृहप्रवेश की तिथि —

नवंबर गृह गृह उत्सव समारोह का सबसे पवित्र महीना है। नवंबर के महीने में बहुत सारे मुहूर्त होते हैं जिन्हें गृहिणी समारोह के लिए चुना जा सकता है।

कार्तिक में पहला मुहूर्त 16 नवंबर, 2019 को पड़ता है। यहां नवंबर के महीने में अन्य माहुरते हैं।

1) 16 नवंबर: सुबह 7.06 बजे से दोपहर 2.37 बजे तक

2) 19 नवंबर: 9.39 बजे से 9.59 बजे तक

3) 25-26 नवंबर: 6.52 बजे से सुबह 5.10 बजे तक

4) नवंबर 30-दिसंबर 1: 2.59 बजे से 6.57 बजे तक

दिसंबर 2020 में गृहप्रवेश की तारीखें–

दिसंबर के शुरुआती दिनों में गृह-पूजा समारोह पर विचार करें क्योंकि पौष (दिसंबर का हिंदू महीना) को अशुभ माना जाता है और यह परिवार के लिए दुर्भाग्य लाता है।

दिसंबर में गृह प्रवेश के शुभ मुहूर्त हैं- 

1) दिसंबर 10-11: 10.51 बजे से 7.04 बजे तक

2) दिसंबर 16-17: 8.04 PM से 3.17 PM

3) 23-24 दिसंबर: 8.39 बजे से 4.33 बजे तक

कैसे करना करना चाहिए गृह प्रवेश- 

गृह प्रवेश से पहले वास्तु शांति कराना शुभ होता है। इसके लिए शुभ नक्षत्र, वार एवं तिथि इस प्रकार हैं….

शुभ वार- सोमवार, बुधवार, गुरुवार, व शुक्रवार।

शुभ तिथि- शुक्लपक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी एवं त्रयोदशी।

शुभ नक्षत्र- अश्विनी, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, उत्तरफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, रोहिणी, रेवती, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, स्वाति, अनुराधा एवं मघा।

अन्य विचार- चंद्रबल, लग्न शुद्धि एवं भद्रादि का विचार कर लेना चाहिए।

गृहशांति पूजन न करवाने से इन हानि की होती है आशंका-

जिस घर में प्रवेश करने से पहले पूजा न कराई जाए उस घर में सदैव कलह-क्लेश रहते है और घर के सदस्यों में मन-मुटाव बढ़ता है।

ग्रह प्रवेश न होने पर घर के लोगों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है। जिसके कारण हमेशा कोई न कोई बीमारी से ग्रसित रहता है।

जिस घर में ये दोष पैदा होते हैं, उस घर में कभी बरकत नहीं रहती, इसके विपरीत अधिक खर्च रहने लगता है।

बिना पूजन करांए व ब्राह्मण भोजन करवाएं घर में प्रवेश करना वर्जित माना गया है, ऐसे गृह में कभी भी प्रवेश नहीं करना चाहिए।