ज्योतिष

कल 21 जून 2020 को होने वाले सूर्य ग्रहण में ग्रहण काल का स्पर्श प्रातः 9:15 से आरंभ हो जाएगा जिसका भाग्य स्पर्श 10:17 से आरंभ होगा ग्रहण का मध्य 12:09 तक तथा ग्रहण का उन्मूलन दोपहर 2:02 तक रहेगा पूर्णता ग्रहण की समाप्ति दोपहर 3:03 पर होगी। जानिए कंकण सूर्य ग्रहण पर करने योग्य उन उपाय या मन्त्रों को जिनको करने से आपका कल्याण होगा

यह ग्रहण इस वर्ष के सबसे बड़े दिन अर्थात 21 जून को लगने जा रहा हैं जो लगभग 65 वर्ष इसी दिन घटित होगा। इससे पूर्व 1955 में भी 21 जून को ही सूर्य ग्रहण हुआ था। 21 जून को उत्तरी गौलार्द्ध में सबसे बड़ा दिन होता हैं। पृथ्वी के 66.5 अंश झुके हुए होने तथा इसी स्थिति में सूर्य की परिक्रमा करने के कारण ही पृथ्वी पर दिन रात की अवधि में असमानता पाई जाती हैं।

केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाला नैनीताल के आर्य भट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के मुताबिक इस सूर्यग्रहण को अफ्रीका, एशिया और यूरोप के कई देशों के साथ ही उत्तर भारत में भी देखा जा सकेगा।

भारतीय वैदिक ज्योतिष में कुंडली मिलान के लिए प्रयोग की जाने वाली गुण मिलान की विधि में मिलाए जाने वाले अष्टकूटों में नाड़ी और भकूट को सबसे अधिक गुण प्रदान किए जाते हैं। नाड़ी को 8 तथा भकूट को 7 गुण प्रदान किए जाते हैं। इस तरह अष्टकूटों के इस मिलान में प्रदान किए जाने वाले 36 गुणों में से 15 गुण केवल इन दो कूटों अर्थात नाड़ी और भकूट के हिस्से में ही आ जाते हैं। इसी से गुण मिलान की विधि में इन दोनों के महत्व का पता चल जाता है।

भारत में आज, 5 जून 2020 को होने वाला चंद्र ग्रहण दिखाई देगा लेकिन इस दौरान सूतक के नियम नहीं माने जाएंगे। ये चंद्र ग्रहण ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन लग रहा है। 5 जून को लगने वाला उपछाया चंद्र ग्रहण रात में 11 बजकर 15 मिनट से शुरू होगा और रात में 2 बजकर 34 मिनट पर खत्म होगा। ग्रहण काल के दौरान चंद्रमा वृश्चिक राशि में होगा।

5 जून यानी आज साल 2020 का दूसरा चंद्र ग्रहण लगेगा। कोरोना संकट के बीच इस चंद्र ग्रहण को खगोल विज्ञान के साथ-साथ ज्योतिष विज्ञान के लिए भी बहुत अहम माना जा रहा है।

इस साल जून और जुलाई के महीने में तीन ग्रहण लगने जा रहे हैं। 5 जून 2020 को चंद्र ग्रहण, 21 जून 2020 को सूर्य ग्रहण और फिर 5 जुलाई 2020 को चंद्र ग्रहण लगेगा। ग्रहण काल से पहले ही सूतक लग जाते हैं। ग्रहण के दौरान निकलने वाली नकारात्‍मक ऊर्जा से बचाव के सभी उपाय किये जाते हैं।

यह जान लें कि जिस प्रकार विवाह बिना जीवन अधूरा है उसी प्रकार विवाह के उपरान्त संतान न होना एक अभिशाप है। समाज में रहते हुए वंश वृद्धि न हो तो लोग टोकने लगते हैं। और हेय दृष्टि से देखते हैं। संतान वंश वृद्धि के लिए आवश्यक है। संतान की उत्पत्ति न हो या बहुत विलंब से हो तो वैवाहिक जीवन नीरस हो जाता है। ईश्वर की कृपा व ग्रहों के आशीर्वाद के बिना संतान का होना संभव नहीं है।

गंगा दशहरा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है. ज्येष्ठ शुक्ला दशमी को दशहरा कहते हैं. इसमें स्नान, दान, रूपात्मक व्रत होता है. इस वर्ष 1 जून 2020 को गंगा दशहरा का पावन पर्व मनाया जाएगा। इस वर्ष 2020 में जून महीने की शुरुआत ही ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि से होगी। जून महीने की शुरुआत मां गंगा के अवतरण के दिन से हुई है और फिर निर्जला एकादशी, मासिक शिवरात्रि, योगिनी एकादशी और गुप्त नवरात्र जैसे व्रत-त्योहार भी इस महीने आने वाले हैं।