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2019 में आम चुनाव से ठीक पहले देश के लगभग हर मंच पर विपक्षी एकता साफ नजर आ रही थी। इन विपक्षी दलों का सिर्फ और सिर्फ एक मकसद था किसी तरह नरेंद्र मोदी सरकार को सत्ता में दोबारा लौटने से रोकना।

नरेंद्र मोदी सरकार 1.0 में सियासी ताज सजने तक पार्टी की कमान भले राजनाथ सिंह के हाथ हो लेकिन सरकार गठन के बाद से पार्टी की कमान अमित शाह के मजबूत हाथों में आ गई।

सरकार के गठन के बाद जिस तरह से ताबड़तोड़ फैसले लिए गए उसने एक साल के मोदी सरकार 2.0 के कार्यकाल में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ और ऊंचा कर दिया।

जहां एक तरफ पूरी दुनिया कोरोनावायरस के कहर से त्राहिमाम कर रही है वहीं नरेंद्र मोदी सरकार की सफल नीतियों और इस दिशा में किए गए पूर्वनियोजित प्रयासों का नतीजा है कि देशभर में इसका कहर वैसा नहीं बरपा है जैसा पूरी दुनिया भारत के बारे में अनुमान लगा रही थी।

नरेंद्र मोदी 2.0 के गठन के बाद से गरीब, महिला, किसान, युवा, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर को सीधा फायदा पहुंचाया जा रहा हैं।

कोरोना के इस संकट काल के बीच भी कराए गए सर्वे की मानें तो पीएम नरेंद्र मोदी के ऊपर 71 प्रतिशत से ज्यादा देश की जनता का भरोसा कायम है।

भारत जिस वक्त 52वां गणतंत्र दिवस मना रहा था, सुबह पौने नौ बजे गुजरात का भुज भूकंप से हिल उठा। धरती की कंपकंपी सिर्फ दो मिनट की ही थी, लेकिन इसी दो मिनट में सब खत्म।

कोरोनावायरस के प्रकोप से पूरी दुनिया त्राहिमाम कर रही है। भारत भी इससे लड़ रहा है। देश में 1 लाख के करीब-करीब संक्रमित लोगों का आंकड़ा पहुंच गया है।

कोरोना महामारी है। महमारी की इस अवधि में हजारों विद्वान व विशेषज्ञ प्रकट हो गए हैं। हमारे जैसे विद्यार्थी हलकान हैं। ढेर सारे विद्वान, ढेर सारे विशेषज्ञ, ढेर सारे चैनल। पुराना फिल्मी गीत याद आता है- किस किस को प्यार करूं? टीवी पर बहसे ही बहसें।