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आदिमकाल में राजा या राज्य व्यवस्था नहीं थी। राज्य संस्था का क्रमिक विकास हुआ है। अथर्ववेद में राज्य के जन्म और विकास का सुन्दर वर्णन है। बताते हैं “पहले विराट (राजा-राज्य रहित) दशा थी, इस में विकास हुआ। गार्हृपत्य संस्था (परिवार-कुटुम्ब) आई।

प्रशांत किशोर ने आज युवा राजनीति की बात करते हुए लाखों युवाओं को अपने ‘बात बिहार की’ अभियान से जोड़ने की बात की। बिहार की प्रतिभा और गौरव की दुहाई देते हुए उन्होंने एक नए सपने की बात की।

राष्ट्र प्राचीन वैदिक धारणा है और नेशन आधुनिक काल का विचार है। राष्ट्र के लिए अंग्रेजी भाषा में कोई समानार्थी शब्द नहीं है। ई0एच0 कार ने नेशन की परिभाषा की है, “सही अर्थो में राष्ट्र्रो या नेशंस का उदय माध्यकाल की समाप्ति पर हुआ।”

मुफ्त और सब्सिडी की सूची विशुद्ध रूप से तार्किक और मानवीय आधार पर बनाई जानी चाहिए, वह भी केवल उतने समय के लिए, जितने समय के लिए वास्तव में उसकी ज़रूरत है।

काम कामनाओं का बीज है। यह प्रकृति में सर्वव्यापी है। प्राकृतिक है। प्रकृति की सृजनशक्ति है। प्रत्येक शक्ति का नियमन भी होता है। नियमविहीन शक्ति अराजकता में प्रकट होती है। फिर काम को विराट शक्ति जाना गया है।

देश की राजनीति बदलने की बात कर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने वाले अरविंद केजरीवाल के लिए इस बार सत्ता हासिल करना चुनाव प्रचार के कुछ दिनों तक आसान लग रहा था।

याद रखिए, कोई भी सभ्य समाज अपने भीतर नाथूराम गोडसे के पैदा होने से कलंकित ही महसूस करेगा, लेकिन साथ ही वह केवल महात्मा गांधी पैदा करने की गारंटी भी नहीं दे सकता।

गणित का ये हाल देखकर हैरानी होती है कि IITian CM के राज में गणित शिक्षा को लेकर भी सरकार का रुख नेगेटिव ही है। जोर रिजल्ट बेहतर करने पर ही है, गणित शिक्षा को बढ़ावा देने पर नही।

जो इस्लामिक 1947 में भारत में रह गए, उनके लिए हमारे मन में रत्ती भर भी निषेध नहीं है, लेकिन जो इस्लामिक थोक में दूसरे इस्लामिक मुल्कों से घुसपैठ करके भारत आ रहे हैं, उन्हें मानवता के नाते व्यक्तिगत केसों के आधार पर सीमित मात्रा में तो स्वीकार कर सकते हैं, लेकिन थोक में नहीं।