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अयोध्या राम जन्मभूमि(राम मंदिर) विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई समाप्त होने के बाद अब इस मामले में फैसले का इंतजार है। इसपर फैसले को ध्यान में रखते हुए दोनों ही पक्षों की तरफ से सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की जा रही है।

राजनीति स्वयं से दूर की यात्रा है। यहां स्वयं के प्रगति आस्तिक भाव नहीं है। हम स्वयं अपनी प्रशंसा करते हैं, प्रशंसा सुनने के लिए तमाम उपाय करते हैं। बेशक अपना चित्र देखकर सब प्रसन्न होते हैं। लेकिन हम अपना बड़ा चित्र चाहते हैं।

अमावस्या हर माह आती है। यही बताने कि तमस् भी संसार सत्य का अंग है। रात्रि को प्रकाशहीन कहा जाता है पर ऐसा है नहीं। रात्रि में चन्द्रप्रकाश होता है। क्रमशः घटता बढ़ता हुआ। अमावस्या अंधकार से परिपूर्ण रात्रि है।

पाश्चत्य जगत की भोगवादी चमक-धमक को छोड़कर स्वामी विवेकानंद का शिष्यत्व ग्रहण करने को आतुर आयरिश युवती मार्गरेट भारत की ही हो गयी I वेदांत को सीखा,अपनाया और जीया भी I जिन तेजस्वी गुरु स्वामी विवेकानंद के आकर्षक व्यक्तित्व और सदाचार से प्रभावित होकर मातृभूमि छोड़ी थी।

विगत कुछ दिनों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर आम चर्चा है उस पर एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में देश के पूर्व मुख्यन्यायधीश जो की समाज के दलित वर्ग से आते हैं उनके द्वारा कार्यक्रम में सामाजिक न्याय के विषय को उठाना।

हमारी संस्कृति में बेटियों को लक्ष्मी माना गया है क्योंकि बेटी सौभाग्य और समृद्धि लाती हैं। उन्होंने कहा था कि हमारे बीच में कई ऐसी बेटियां होंगी जो अपनी मेहनत और लगन से, परिवार के साथ-साथ समाज और देश का नाम रौशन कर रही होंगी।

सविता सूर्य ही हैं। सूर्य किरणें स्वर्णिम होती है। सविता देव का मण्डल 1 सूक्त 35 में स्वर्ण जोड़कर सुंदर मानवीकरण हुआ है। कहते हैं, “सविता देव ‘हिरण्याक्ष’ स्वर्ण आखों - दृष्टि वाले हैं।

श्राद्ध सामान्य अंधविश्वासी कर्मकाण्ड नहीं है। हमारे पूर्वजों ने ही ऐसे सुंदर कर्मकाण्ड को बड़े जतन के साथ गढ़ा है। इस कर्मकाण्ड में स्वयं के भीतर पूर्वजों के प्रवाह का पुनर्सृजन संभव है।

ऋग्वेद के अधिकांश देवता प्रकृति की शक्ति हैं। सूर्य, पृथ्वी, जल, वायु, मरूत, नदी आदि देव प्रकृति में प्रत्यक्ष हैं। लेकिन इन्द्र प्रकृति की प्रत्यक्ष शक्ति नहीं हैं। ऋग्वेद में सभी देवों की तुलना में इन्द्र की सबसे ज्यादा स्तुतियां हैं।