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एक देश, एक टैक्स... एक देश, एक चुनाव.....इसी तर्ज पर ‘एक देश, एक भाषा’ का नारा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दिया।

पूर्वज अनुभूति में पृथ्वी सजीव है। यह निर्जीव नहीं है। लाखों जीवों की धारक है। इसी में उगना उदय और अस्त होना प्रत्येक प्राणी की नियति है। यह जननी है। पृथ्वी को माता कहने वाले यह ऋषि अंधविश्वासी नहीं हैं।

7 सितंबर को मोदी सरकार-2 के सौ दिन पूरे हो रहे हैं, इस मौके पर जानना जरूरी है कि आखिर मोदी सरकार के लगातार दूसरे कार्यकाल में ये 100 दिन कैसे रहे। बता दें कि शुरुआती इन सौ दिनों में मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर से धारा 370 का हटाना और कई महत्वपूर्ण बिलों को पास करवा चुकी है।

भरत का उद्देश्य सांस्कृतिक है। तत्व बोध इतिहास बोध के रास्ते समाज के अंतर्मन का संस्कार है। ऋग्वेद के रचनाकार ऋषि प्रकृति के सत्य, शिव और सुंदर को ही काव्य मंत्री द्वारा पुनर्सृजित कर रहे थे।

मुमताज भल्ला ने अरुण जेटली के निधन के बाद उनको याद करते हुए लिखा कि शब्द किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व के साथ न्याय नहीं कर सकते हैं।

जी-7 सम्मेलन में मोदी और ट्रंप की गर्मजोशी से मुलाकात से पाकिस्तान में खलबली मच गई है। उसके पास बिलबिलाने और दुनिया के सामने अपना रोना रोने के अलावा कोई रास्ता नहीं बच गया है।

माता पिता के प्रति भावपरक ऋद्धा का अपना समाज विज्ञान है। माता पिता बचपन में पोषण देते हैं, पढ़ाते हैं सिखाते हैं। वे स्वयं की चिन्ता नहीं करते अपना भविष्य नहीं देखते। हम सबके सुखद भविष्य का तानाबाना बुनते हैं।  हम तरूण होते हैं, पिता वृद्ध होते हैं। हम तरूणाई से और परिपक्व होते हैं, पिता और वृद्ध होते हैं। जब हम तेज रफ्तार जीवन की गतिशीलता में होते हैं, तब माता पिता उठते हीं गिर पड़ते हैं। वे बचपन में हमको गिरने से बचाते थे।

ऋग्वेद में मनुष्य और देवों की प्रीति अनूठी है। वैदिक अभिजन सभी अवसरों पर देवों का स्मरण करते हैं। वे दुखी होते हैं तो देवों की स्तुतियां करते हैं और जब सुखी होते हैं तब भी लेकिन आनंद और उत्सव के समय वे देवों को ज्यादा याद करते हैं।

ऋग्वेद अतिप्राचीन असाधारण काव्य रचना है। इसके भीतर ऋग्वेद से भी पूर्व के वैदिक समाज के विवरण हैं। ऋग्वेद की भाषा व्यवस्थित है। इस स्तर की भाषा के विकास के लिए हजार दो हजार वर्ष का समय पर्याप्त नहीं है।