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प्रकृति में अनेक अंश और अंग हैं। मनुष्य भी प्रकृति का भाग हैं। मनुष्य और प्रकृति के बीच स्थाई आत्मीयता है। सृष्टि के आदिकाल से मनुष्य प्रकृति में उपलब्ध पदार्थो और शक्तियों का उपयोग करता रहा है।

भारतीय अनुभूति (Indian experience) में अनेक देवता (God) हैं। सभी देव शक्तियां दिव्य हैं और दिव्यता प्रकाश है। परम तत्व सर्वत्र ज्योतिर्मय प्रकाशरूपा है। वह एकमेव ‘एकं’ है। ऋग्वेद (Rigveda) के ऋषि (sage) ने उस एक को एकं सद् कहा है।

Congress: कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय स्तर की पार्टी की हालत ये हो गई है कि वह राज्यों में क्षेत्रीय दलों के भरोसे सत्ता चलाने पर मजबूर है। राजस्थान, पंजाब और छत्तीसगढ़ को छोड़ दें तो कांग्रेस का जनाधार हर राज्य में खिसकता नजर आ रहा है।

कला अश्लील नहीं हो सकती। सभी कलाएं समाज में उदात्त भाव विकसित करने का संधान हैं। यूनानी दार्शनिकों ने कला को प्रकृति की अनुकृति बताया है। कलाकार प्रकृति के रूपों को देखकर नया संसार रचता है। भारतीय चिंतन में शिल्प को परम चैतन्य का प्रतिरूप बताया है-यो वै रूपम् तत् शिल्पम्।

भारतीय राजनीति (Indian politics) लोकमंगल (Lokmangal) का उपकरण है। सभी दल अपनी विचारधारा को देशहित का साधन बताते हैं। विचार आधारित राजनीति मतदाता के लिए सुविधाजनक होती है।

RSS: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) बना कर देश के युवा शक्ति एवं समाज का देशिक मूल्य के आधार पर संगठन करना प्रारम्भ कर दिया। इसमें आनंद की बात है की संघ तो चलता ही रहा परंतु डॉ. हेडगेवार (Dr. Keshav Rao Baliram Hedgewar) ने अंग्रेजों के ख़िलाफ़ अपने स्वर को सदैव मुखर रखा।

पिछले महीने भारत की आर्थक गतिविधियों में काफी तेजी आई है। निर्यात में लगभग 98% की वापसी हो गई जबकि आयात में 74% तक की वापसी हो गई है। विकास के कई मूल सूचक जैसे PMI data, GST mop-up, टोल चार्ज, बिजली खपत में काफी ईजाफा हुआ है।

प्रकृति दिव्यता है, सदा से है। देवी है। मनुष्य की सारी क्षमताएं प्रकृति प्रदत् है। जीवन के सुख-दुख, लाभ-हानि व जय-पराजय प्रकृति में ही संपन्न होते हैं। दुनिया की अधिकांश संस्कृतियों में ईश्वर या ईश्वर जैसी परमसत्ता को प्रकृति का संचालक जाना गया है।

New Education Policy: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) को लागू करने की दिशा में तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तमाम प्रस्तावों और प्रावधानों को अमलीजामा पहनाने के लिए न सिर्फ केन्द्रीय स्तर पर बल्कि राज्यवार ‘कार्य-समूह’ गठित किये जा रहे हैं। और भी कई प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।