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Prayer in India: प्रार्थना(Prayer) में बड़ी ऊर्जा है। दर्शन और विज्ञान में प्रार्थी भाव से उतरना आनंददायी है, विद्यार्थी भाव से उतरना संतोषजनक है लेकिन अर्थार्थी बुद्धि से उतरना व्यर्थ है। प्रार्थना में शब्दार्थ का मूल्य नहीं होता।

Delhi CM Kejriwal: दोहरे चरित्र को लेकर केजरीवाल(Arvind Kejriwal) पर आरोप यही नहीं रुकता है, दिल्ली पुलिस(Delhi Police) की कार्यशैली को लेकर भी केजरीवाल पर डबल स्टैंडर्ड रखने का आरोप लगाया जा रहा है।

संसद भारत का सर्वोच्च सदन है। भारतीय संसद द्विसदनीय है। लोकसभा को सामान्यतया निम्न सदन और राज्यसभा को उच्च सदन कहा जाता है दोनों के गठन के लिए अलग-अलग निर्वाचक मण्डल है।

एक संसार प्रत्यक्ष है। यह सबको दिखाई पड़ता है। दूरी की बात अलग है। दूरी के अनुपात में सभी वस्तुएं किसी-न-किसी रूप में दिखाई पड़ती हैं। भारतीय चिंतन में शब्द को ब्रह्म कहा गया है। ब्रह्म और अस्तित्व पर्यायवाची हैं। हम प्रत्यक्ष अस्तित्व का बड़ा भाग देख लेते हैं।

पॉक्सो एक्ट ( Pocso Act) की यह परिभाषा इस अर्थ में विशेष रूप से ख़तरनाक और परेशान करने वाली है कि बच्चों पर होने वाले यौन हमलों से सम्बंधित मामलों में निचली अदालतों के लिए भविष्य में एक उदाहरण बन सकती है। यह परिभाषा इसलिए भी बेचैन करती है क्योंकि यह उत्पीड़ित के संरक्षण की जगह उत्पीड़क को संरक्षण प्रदान करती है।

श्रद्धा भाव घट रहा है। श्रद्धा गहन आत्म विश्वास का पर्याय है। घने कोहरे या अंधकार में दूर तक नहीं दिखाई पड़ता। शीत घनत्व ज्यादा हो तो निकट देखना भी विकट हो जाता है। गहन अंधकार में भी ऐसा ही होता है। कोहरे में सामान्य प्रकाश काम नहीं करता। कोहरे के कारण दुर्घटनाएं होती हैं।

संवैधानिक ढंग से ट्रैक्टर परेड करने के लिए किसानों को क्यों नहीं ट्वीट किया, अखिर क्यों दिल्ली जलनी शुरु हो गई तो केजरी बाबू खामोश थे? क्या उनको केवल और केवल राजनीति करना ही पसंद है, वो भी ओधी राजनीति, जिसके न हाथ होते हैं और न पैर होते हैं।

कोरोना महामारी के बाद अब बर्डफ्लू का संकट है। पक्षियों के मांस से खाना बनाने वाले तमाम होटलों का व्यापार घटा है। नए भोजन विशेषज्ञ पैदा हो रहे हैं। वह समाचार पत्रों में पक्षियों का मांस खाने की तरकीब बता रहे हैं कि एक खास डिग्री तापमान पर उबालने या भोजन बनाने से बर्डफ्लू का खतरा नहीं रह जाता है।

किसान (Farmer) एक ही मांग पर अड़े हैं कि तीनों नए कृषि कानून (agricultural law)रद्द होने चाहिए। जबकि सरकार कह रही है कि कानून में जिस चीज से आपको दिक्कत है, उसमें हम संशोधन करने के लिए तैयार हैं। लेकिन तथाकथित किसान एक ही मांग पर अड़े हैं कि कानून रद्द होना चाहिए। समझ में नहीं आता अगर सरकार दिक्कत को दूर करने के लिए तैयार है तो कानून रद्द की मांग पर ये किसान अडिग क्यों हैं?