ब्लॉग

Makar Sankranti 2022: भोजप्रबंध के इस श्लोक के अनुसार सूर्य और उसकी गति व्यवस्था का जो वर्णन है उस हिसाब से तो उनके पास साधन के नाम पर कुछ भी नहीं है। क्या कोई व्यक्ति ऐसे रथ पर यात्रा कर सकता है जिसमें केवल एक पहिया हो, जिसके सारथि के पैर न हो, जिसके घोड़ों की संख्या भी बैलेंसिंग न हो, ऊपर से उन घोड़ों को नियंत्रित करने वाली रस्सियों की जगह बड़े बड़े सर्प हो और मार्ग के नाम पर कोई पक्का रोड नहीं है बल्कि अन्नत आकाश है?

लक्ष्यविहीन ज्ञान निरर्थक है। सर्वभूतहित संलग्नता में ही सच्चा सृजन है। भरत मुनि ने नाटक का उद्देश्य मनोरंजन के साथ सदाचार ही बताया है। यहां सदाचरण की स्थापना के लिए नाटक और कथा में नायक के चरित्र चित्रण की महत्ता रही है।

New Year:प्रकृति के अंश प्रतिपल बदलते रहते हैं। सो ग्रीष्म, शीत, वर्षा प्रतिपल नए हैं। देखने और अनुभव करने की भारतीय दृष्टि अखंड है। इसमें भूत और वर्तमान का भेद नहीं है। बीते और प्रत्यक्ष की समय विभाजक रेखा नहीं है। अस्तित्व प्रतिपल नया है।

ऋषि इन्द्र से कहते हैं- ”प्रार्थना सुनो, पुरोडास खाओ।“ (ऋ 4.32.16) जो इन्द्र को पुरोडास खिलाता है, उसे इन्द्र पापों से बचाते हैं (ऋ 8.31.2) वैदिक समाज का जौ, धाना, करम्भ, अपूप, पुराडास, दूध और घी प्रेम चारों वेदों में व्याप्त है। गोमांस का कहीं जिक्र ही नहीं। गाएँ श्रद्धा हैं। अन्न खाद्य है।

Common Entrance Test: स्तरीकृत और भेदभावपूर्ण स्कूली शिक्षा वाले घोर असमान समाज में सीमित अवसरों के न्यायपूर्ण वितरण के लिए एक निष्पक्ष और वस्तुपरक सामान्य मूल्यांकन ढांचा ही सर्वोत्तम विकल्प है। कम-से-कम एक इससे एक ऐसे सक्षम और व्यावहारिक समाधान की आशा की जा सकती है जो समाज, स्कूलों, शैक्षणिक संस्थानों और छात्रों की जरूरतों को पूरा करता है।

विविधता प्रकृति का नियम है। वैसे समूचा ब्रह्मण्ड एक इकाई है। कार्ल सागन जैसे विद्वान ने इसे ‘कासमोस’ कहा है। भारतीय चिंतन दर्शन में सम्पूर्ण प्रकृति को ब्रह्म कहा गया है। यह एक ब्रह्मण्ड ही भिन्न-भिन्न रूपों में हम सबकों दिखाई पड़ता है।

भारत की ऋषि परंपरा प्राचीन है। ऋषियों को मंत्र द्रष्टा कहा गया है। ऋषि अनेक हैं। सब संवादरत हैं लेकिन अनुभूति एक है। एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति। प0 दीनदयाल उपाध्याय आधुनिक काल के तत्वद्रष्टा ऋषि हैं। उन्होंने एकात्म मानव दर्शन का विचार दिया।

Dynastic Politics: गैर-कांग्रेसवाद और गैर-परिवारवाद का नारा देने वाले डॉ. राममनोहर लोहिया के उत्तराधिकारियों का ‘समाजवाद’ भी कांग्रेस से इतर नहीं है। समाजवादी आन्दोलन और सम्पूर्ण क्रांति से उद्भूत तमाम क्षेत्रीय दल या तो परिवार विशेष की निजी जागीर हैं या निजी कम्पनियां हैं।

Political Nepotism: आपको बताते हैं कांग्रेस पार्टी से, राजनीति में वंशवाद के बीजारोपण का श्रेय कांग्रेस पार्टी को ही जाता है, जब देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु के बाद, उनकी बेटी इंदिरा गांधी राजनीति में आईं, तब कांग्रेस में गांधी परिवार का कभी ना खत्म होने वाला युग शुरु हो गया।