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Farm laws repealed: PM मोदी के एक फैसले से देश विरोधी ताकतों की खिसकी ज़मीन, विपक्ष हुआ निहत्था

Farm laws repealed: प्रधानमंत्री मोदी ने साफ किया है कि “कोई भी भारत के रणनीतिक हितों को कमजोर नहीं कर सकता है और उन्हें ऐसा करने की छूट नहीं दी जा सकती है। साथ ही यह भी कि भारत की एकता और अखंडता के सामने कुछ भी मायने नहीं रखता है।”

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Narendra Modi, Rahul And Sonia Gandhi

“आज मैं आपको, पूरे देश को, ये बताने आया हूं कि हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस घोषणा के साथ ही
किसानों पर राजनीति के सेन्सेक्स ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये। हर बात से हार-जीत तय करना मौजूदा राजनीति का लेटेस्ट ट्रेंड है।लेकिन राष्ट्रहित और राजनीति दो अलग-अलग धारायें हैं। देशहित किसी भी बहस और भाषणबाजी से ऊपर है। इस बात पर बहस करने से पहले कुछ गंभीर विषयों पर चिंतन और मंथन ज़रूरी है। जिसमें सबसे पहले है राष्ट्रहित। ये बात समझने में शायद ही किसी को दिक़्क़त हो की देश की एकता और अखण्डता से बढ़कर कुछ भी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकार की राय में, “भारत के सामने सीमा पर चीन की चुनौती, अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान और पाकिस्तान का जिहादी और खालिस्तानी ताक़तों को समर्थन…ये सभी देश की सुरक्षा की बड़ी चुनौतियां हैं।”

pm modi..

सरकार के पास ये भी जानकारी थी कि किसान आंदोलन को और भड़काया जा सकता है। इस माहौल में ये ज़रूरी था कि आंदोलन के नाम पर हिंसा के खेल को बंद करके, देश के खिलाफ हो रही साज़िश को रोका जाए। इसलिए पीएम मोदी के फैसले को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज़ से समझने की ज़रूरत है।

अखण्डता और आंतरिक सुरक्षा प्राथमिकता-

प्रधानमंत्री मोदी ने साफ किया है कि “कोई भी भारत के रणनीतिक हितों को कमजोर नहीं कर सकता है और उन्हें ऐसा करने की छूट नहीं दी जा सकती है। साथ ही यह भी कि भारत की एकता और अखंडता के सामने कुछ भी मायने नहीं रखता है।”

कृषि कानूनों की वापसी पर वाद-विवाद और तर्क-वितर्क चलता रहेगा, लेकिन पीएम मोदी की आज की घोषणा ने किसान के नाम पर देश को तोड़ने वाली ताक़तों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। पीएम मोदी ने आज कहा कि “जो कर रहा हूं देश के लिए कर रहा हूं।”

आंदोलन के नाम हिंसा Vs किसान हित-

पिछले कुछ महीने में कई बार, ये आंदोलन काफ़ी हिंसक भी हो गया। कुछ असामाजिक तत्व किसानों के नाम पर हिंसा को हवा देने में जुटे थे। जिसकी वजह से किसानों के साथ संवाद पर हिंसा का ग्रहण लग गया। आज पीएम मोदी ने कहा कि “हमारी तपस्या में ही कोई कमी रह गई होगी, जिस कारण मैं किसान भाइयों को समझा नहीं पाया। नए कृषि कानूनों के खिलाफ जो विरोध हो रहा है उसे देखते हुए आंदोलनकारी किसानों से घर लौटने का आग्रह करता हूं और तीनों कानून वापस लेता हूं। उन्होंने कहा कि इस महीने के अंत में संसद सत्र शुरू होने जा रहा है उसमें कानूनों को वापस लिया जाएगा।”

Farmers Protest

किसानों आंदोलन की आग में खालिस्तान का घी-

सरकार के पास इस बात के इनपुट थे कि राष्ट्रविरोधी ताकतें किसानों के आंदोलन का फायदा उठाने की कोशिश में हैं। इस तरह की ताक़तों को खालिस्तान और पाकिस्तान के आईएसआई नेटवर्क का सपोर्ट मिल रहा था। इस साल 26 जनवरी को लालक़िले में किसान आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया था। सिख फॉर जस्टिस संगठन के संचालक गुरपतवंत सिंह पन्नू ने किसान आंदोलन को भड़काने के लिए कोई कसर बाकी नहीं रखी। लालकिला की घटना, लखीमपुर खीरी कांड और किसान आंदोलन स्थलों पर हुई वारदातों में इस संगठन ने जलती आग में घी डालने का काम किया है।

Red Fort

पन्नू ने अपने वीडियो संदेशों में गैर कानूनी काम कराने के लिए युवाओं को नकद इनाम देने की बात कही है। करतारपुर साहिब में खालिस्तान के पक्ष में पोस्टर लगाए गए थे। यहां तक कि पाकिस्तान ने अलगाववादी सिख नेताओं को वहां पहुंचने के लिए बुलावा भेजा था।

दल से बड़ा देश, राजनीति से बड़ा राष्ट्रहित-

किसानों के इस आन्दोलन के नाम पर कुछ ऐसी ताक़तें इसमें घुसपैठ कर चुकी थीं, जिन्हें किसानों के हितों से कोई लेना-देना नहीं था। इसमें कोई शक नहीं की देश विरोधी ताक़तें इस आंदोलन का इस्तेमाल भारत को कमजोर करने के लिए कर रही थीं। इस तरह की भी आशंका जताई जा रही थी की आने वाले विधानसभा चुनाव में ये हिंसक तत्व लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और नुकसान पहुंचा सकते थे।

Farmers Protest

आज प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों के कंधे पर बंदूक़ रखकर, देश की एकता पर निशाना लगाने वाली साज़िश को फेल कर दिया और साथ ही ये भी बता दिया ही उनकी सरकार देशहित और किसानों का हित दोनों बेहतर तरीक़े से समझती है।

आज पीएम मोदी ने कहा कि “किसानों की परेशानियों को नजदीक से देखा है। किसानों की चुनौतियों को कम करने के लिए कृषि कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।आज देश सपनों को पूरा होते देख रहा है। देश में 100 में से 80 किसान छोटे हैं। 80 फीसदी किसानों के पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन है। छोटे किसानों की संख्या 10 करोड़ से ज्यादा। 22 करोड़ किसानों को स्वॉयल हेल्थ कार्ड दिए गए हैं। सरकार ने किसानों से रिकॉर्डतोड़ खरीदारी की है। किसान हित के लिए कई पुराने कानून खत्म किए गए हैं। छोटे किसानों को ताकत देने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है।”

‘राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम’ के सिद्धांत पर पिछले सात साल से मोदी सरकार हर फ़ैसला करती रही है। शांति, संवाद और सुरक्षा मोदी सरकार की प्राथमिकता रही है। कृषि क़ानून को वापस लेकर मोदी सरकार ने एक बार फिर ये दिखा दिया की उनके लिए दल से बड़ा देश है।

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