
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ का भारत पर क्या असर पड़ेगा? क्या भारत पर दबाव बढ़ जाएगा अथवा इसका कुछ खास प्रभाव नहीं पड़ने वाला, साथ ही वो कौन-कौन से सेक्टर हैं जो रेसिप्रोकल टैरिफ के चलते प्रभावित हो सकते हैं, इन सब बातों को लेकर अलग-अलग चर्चा चल रही है। आइए आपको विस्तार से इसके विषय में बताते हैं। नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार एसबीआई रिसर्च द्वारा हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट में दावा किया गया है ट्रंप के टैरिफ का असर भारत में सीमित रहने की संभावना है।
एसबीआई ने भारतीय निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ के संभावित प्रभाव के मामूली असर का अनुमान लगाते हुए कहा है कि इससे निर्यात में 3 से 3.5 प्रतिशत की कमी आ सकती है। फेडरेशन ऑफ इंडिया एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस के महानिदेशक अजय सहाय का मानना है कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाया गया टैरिफ वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम है। इससे भारत के कपड़ा और फुटवियर सेक्टर को फायदा हो सकता है। वहीं फिच, गोल्डमैन सैश, नोमुरा और मॉर्गन स्टेनली जैसे कई बड़े वैश्विक अनुसंधान और रेटिंग फर्मों का भी मानना है कि अमेरिकी टैरिफ का भारत पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ने वाला। वहीं विश्व के बड़े अर्थशास्त्रियों का यह भी मानना है कि अमेरिका के रेसिप्रोकल टैरिफ के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
VIDEO | Union Minister of State for Finance Pankaj Chaudhary (@mppchaudhary) on reciprocal tariff announced by US President Donald Trump, says, “For Donald Trump it is ‘US First’ and for PM Modi it is ‘India First’. We will analyse it and see how to tackle it.”… pic.twitter.com/8W0a4UFfhE
— Press Trust of India (@PTI_News) April 3, 2025
वहीं इस मामले में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह ‘अमेरिका फर्स्ट’ है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘भारत फर्स्ट’ है। हम इसका विश्लेषण करेंगे और देखेंगे कि इससे कैसे निपटा जाए। बता दें कि साल 2021-22 से 2023-24 तक भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार अमेरिका ही था। भारत के निर्यात में अमेरिका की 18 प्रतिशत और आयात में 6.22 प्रतिशत हिस्सेदारी है।