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मनोरंजन

Vijayanand Movie Review: कांतारा की तरह कन्नड़ा इंडस्ट्री की एक और बेहतरीन और जरूर देखी जाने वाली फिल्म “विजयानंद”, पढ़िए विजयानंद मूवी रिव्यू

Vijayanand Movie Review: यहां हम Vijayanand फिल्म का रिव्यू करेंगे और आपको बताएंगे कि इस फिल्म में क्या ख़ास है और क्या नहीं ? जिससे आप ये तय कर सकें कि क्या आपके लिए इस फिल्म पर समय और रूपये निवेश करना समझदारी होगी या नहीं ?

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नई दिल्ली। यहां हम विजयानन्द मूवी का रिव्यू (Vijayanand Movie Review) करने वाले हैं। कन्नड़ा इंडस्ट्री, जिसने इस साल तमाम हिट फिल्में दी हैं। 777 चार्ली से लेकर कांतारा (Kantara) जैसी फिल्में बनाने वाली कन्नड़ा इंडस्ट्री की फिल्म विजयानंद, को दर्शकों को जरूर देखना चाहिए। ये फिल्म,  विजय संकेश्वर की जिंदगी पर आधारित कहानी है, जिसे रिषिका शर्मा ने बनाया है। इसके अलावा फिल्म में अनंत नाग, रविचंद्रन और प्रकाश बेलावड़ी जैसे महान कलाकारों ने काम किया है। इस फिल्म में लीड रोल की भूमिका में निहाल राजपूत हैं जिन्होंने फिल्म में विजय संकेश्वर का किरदार निभाया है। इसके अलावा विजय की पत्नी के रूप में सीरी प्रह्लाद ने ललिता का किरदार निभाया है। यहां हम Vijayanand फिल्म का रिव्यू करेंगे और आपको बताएंगे कि इस फिल्म में क्या ख़ास है और क्या नहीं ? जिससे आप ये तय कर सकें कि क्या आपके लिए इस फिल्म पर समय और रूपये निवेश करना समझदारी होगी या नहीं ?

क्या है फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी विजय संकेश्वर की जिंदगी पर आधारित कहानी है। जहां विजय संकेश्वर के बेटे आनंद संकेश्वर अपने पिता की साहसिक और प्रेरणादायक कहानी दर्शकों को सुनाते हैं। विजय संकेश्वर एक सामान्य जिंदगी जीने वाला लड़का कैसे अपनी लगन,आत्मविश्वाश,मेहनत,साहस,समर्पण,तटस्थ निर्णय के बलबूते ऐसा नाम कमाता है कि वो सामान्य सा लड़का पूरे विश्व में विख्यात हो जाता है। एक सामान्य सा लड़का अपनी जिंदगी में इतना कुछ हासिल कर लेता है जितना हासिल करने के लिए एक सामान्य व्यक्ति को शायद कई उम्र भी लग सकती है। क्योंकि हर कोई विजय संकेश्वर नहीं होता है।

तो कहानी बहुत साधारण है विजय नाम का एक लड़का कर्नाटक के एक छोटे से गांव में रहता है। छोटी सी एक प्रिंटिंग की दुकान है। लेकिन विजय के सपने बड़े हैं। विजय उस दुकान को भाइयों के भरोसे छोड़ ट्रांसपोर्ट के बिजनेस में जाता है। ट्रांसपोर्ट का बिजनेस उसके लिए ऐसा बिजनेस है जिसका उसे कुछ पता नहीं है। वहां उसे बहुत सी परेशानियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सबसे लड़कर और जीतकर वो उस ट्रांसपोर्ट के बिजनेस में कदम जमाता है। धीरे धीरे वो राजनीती में जाता है। जिसके द्वारा नाम और इज्जत दोनों कमाता है। उसके बाद अखबार छापता है और मीडिया में भी पूरे कर्नाटक में नंबर वन बन जाता है | पूरे कर्नाटक में नंबर वन बनने के बाद भी विजय की परेशानियां उसका पीछा नहीं छोड़ती हैं और फिर उनसे लड़कर  लगन,आत्मविश्वाश,मेहनत,साहस,समर्पण,तटस्थ निर्णय के बलबूते वो सब हासिल करता है जो वो हासिल करना चाहता है।

कैसी है कहानी

इस फिल्म को सभी को देखना चाहिए। इस फिल्म में बेहतरीन प्रेरणादायक संवाद हैं। जो आपकी जिंदगी को जीना सिखाते हैं। अगर आप जीवन से निराश हैं या आप अपने लक्ष्य से भटक रहे हैं और आपको लगता है कि ये लक्ष्य हासिल करना तो बेहद मुश्किल है, तो आपको ये फिल्म एक बार जरूर देखनी चाहिए।

कैसे एक सामान्य व्यक्ति अपनी इच्छाशक्ति,लगन और मेहनत के दम पर सब कुछ हासिल करता है इस कहानी में यही दिखाया गया है।

शुरुआत में ये कहानी थोड़ी सी धीरी और ठंडी लगती है। ऐसा लगता है कुछ दृश्यों को हटाया जा सकता था लेकिन जब आप इस फिल्म को देखने के बाद सिनेमाघर से बाहर निकलेंगे तो आपके चेहरे पर भी एक खुशी और सकारात्मक ऊर्जा रहने वाली है।

फिल्म के संवाद शानदार हैं और जितने भी कलाकारों ने किरदार निभाए, उन्होंने बखूबी काम किया है।

निहाल राजपूत ने विजय का किरदार बेहतरीन ढंग से निभाया हैं। वहीं अगर फिल्म में अनंत नाग और प्रकाश बेलावड़ी की भूमिका कुछ और होती तो दर्शकों का अच्छा मनोरंजन भी हो जाता।

फिल्म की कहानी नई है | आमतौर पर, हम जो साउथ के सिनेमा से फिल्म में एक्शन की उम्मीद रखते हैं ऐसा देखने को नहीं मिलता है। फिल्म का म्यूसिक और बैकग्राउंड म्यूसिक ठीक-ठाक है। इसके अलावा फिल्म का डायरेक्शन अच्छा है।

फिल्म में एंटरटेनमेंट और इमोशन की कमी जरूर है लेकिन यह एक प्रेरणादायक कहानी है जिसे देखने के बाद आपको एंटरटेनमेंट की अधिक आवश्यकता पड़ने वाली नहीं है।

फिल्म में मसाला नहीं है और यथार्थ की परिपाटी पर उतारते हुए फिल्म को प्रेरणादायक बनाया गया है। लेकिन फिल्म का पहला हिस्सा कमजोर नज़र आता है जिसमें सुधार की गुंजाईश जरूर थी।

ओवरआल अगर फिल्म की बात करें तो इस फिल्म को जरूर देखना चाहिए।

हममें में से हर कोई कामयाबी हासिल करना चाहता है। हर कोई बड़े बड़े ख्वाब देखकर उन्हें पूरा करना चाहता है, लेकिन बहुत विरले ही होते हैं जो सपने साकार कर पाते हैं। ये कहानी उन्हीं विरले लोगों की है,  जो मुश्किलों और परेशानियों का सामना करते हुए सूरज की तरह चमकना जानते हैं। मेरी तरफ से यह एक जरूर देखी जाने वाली फिल्म है जिसे मेरी तरफ से मिलते हैं 3.5 Star .

फिल्म के ज्यादातर संवाद कमाल के हैं जाते जाते आपके लिए कुछ संवाद –

“जिसका करम ही धरम है उसे बुरी आदत नहीं लगती है।”

“जीत उनकी होती है जो मैदान में खेलते हैं।”

“कोई भी इंसान कितना बलवान हो लेकिन उसमें थोड़ा डर जरूर होना चाहिए।”

“हर कदम की शुरुआत पहले कदम से होती है हमें बस धैर्य और हिम्मत बनाए रखना है।”

“अगर तुम बिना हासिल किए मर गए तो मौत को भी तुम पर शर्म आएगी”

“किस्मत और गॉडफादर के सहारे लोग सिर्फ ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं लेकिन आकाश तक पहुंचने के लिए आत्म विश्वास होना जरूरी है।”

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