नई दिल्ली। ‘होता है जिससे संपूर्ण सृष्टि का सृजन, बात करने में उसपर है क्यों इतनी शर्म!’ अक्षय कुमार और पंकज त्रिपाठी की नई फ़िल्म कुछ इसी तरह के सवालों पर बुनी गई है। ऐसे सवाल जो सही होकर भी ग़लत की श्रेणी में हैं। ऐसे जवाब जिन्हें देने में शिक्षकों को भी हिचकिचाहट होती है। ऐसा विषय जो समाज में आज भी वांछित है और इन विषयों पर बात करने वाला व्यक्ति बेशर्म! कुछ ऐसे ही मुद्दों पर समाज को सच का नग्न आईना दिखाती फ़िल्म ओएमजी 2 आज सिनेमाघरों में रिलीज़ कर दी गई है। तो चलिए बिना किसी देर के एक नज़र डालते हैं फ़िल्म की कहानी पर।
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क्या है कहानी !
फ़िल्म की कहानी है महाकाल की नगरी उज्जैन के रहने वाले कांतिप्रसाद मुद्गल (पंकज त्रिपाठी) की, जो महाकाल के मंदिर में एक कर्मचारी हैं और पूजा सामग्री की दुकान चलाते हैं। कांतिप्रसाद बहुत बड़े शिवभक्त हैं। उनके परिवार में एक बेटा, एक बेटी और पत्नी इंदुमति है। कांतिप्रसाद के बेटे विवेक को बुली करने वाले लड़कों की तरफ़ से सेक् स से रिलेटेड कुछ ऐसा बताया जाता है, जिसकी वजह से एक दिन कांतिप्रसाद का बेटा स्कूल में मास्टरबेट (हस्तमैथुन) करता हुआ पकड़ा जाता है।स्कूल से उसे रेस्टिगेट कर दिया जाता है। इतना ही नहीं उसके मास्टरबेशन का वीडियो स्कूल के बुली गैंग के लड़के इंटरनेट पर वायरल भी कर देते हैं। जिसकी वजह से कांतिप्रसाद के बेटे समेत पूरे परिवार को काफ़ी शर्मिंदगी उठानी पड़ती है। उसका बेटा विवेक अचानक सबकी नजरों में बेशर्म बन जाता है। जिससे अब उसे अपराधबोध होने लगा है, जैसे उसने कुछ पाप किया हो। कांतिप्रसाद अपने परिवार संग शहर छोड़ने का मन बना लेते हैं।
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तभी भगवान शिव के दूत बने अक्षय कांतिप्रसाद को सही रास्ता दिखाते हैं। इसके बाद कांतिप्रसाद इस बात को कोर्ट में लेकर जाते हैं और अपने बेटे के सम्मान को वापस दिलाने और स्कूल में उसे वापस लेने के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ते हैं। जिसमें उन्हें कई तरह कि मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। सेक् स एजुकेशन क्यों ज़रूरी है और स्कूल में इसके बारे में क्यों पढ़ाया जाना चाहिए उसे कांतिप्रसाद मुद्गल ने बखूबी बताया है, जो सुनने में रोचक भी लगता है और कितना ज़रूरी है ये भी समझ आता है।
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कैसा है काम!
ओएमजी 2 पूरी तरह से पंकज त्रिपाठी की फ़िल्म है, जिसमें अक्षय कुमार ने सारथी बनकर उनका बखूबी साथ निभाया है। पंकज त्रिपाठी ने शुरू से अंत तक अपनी आला दर्जे की अदाएगी का परिचय दिया है। उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि किरदार को रिएलिस्टिक बनाने में उनका हाथ कोई नहीं पकड़ सकता है। इस फ़िल्म में उनके अभिनय को उनके करियर की बेस्ट परफ़ॉर्मेंस में से एक कहना ग़लत नहीं होगा। अब आए सुपरस्टार अक्षय कुमार पर तो वो अपने किरदार में ज़बरदस्त लगे हैं। फ़िल्म में अक्षय जब-जब पर्दे पर आए हैं उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है। उनके डायलॉग्स से लेकर कॉमिक टाइमिंग तक सब ए वन है। जिसपर थिएटर में तालियां मारने को ज़रूर दिल करेगा। पंकज त्रिपाठी के साथ अक्षय की जोड़ी काफ़ी असरदार है। बात यामी गौतम की करें तो उन्होंने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है। विपक्ष के वकील की भूमिका में यामी ने पंकज त्रिपाठी को बराबरी की टक्कर दी है। वहीं फ़िल्म के अन्य कलाकारों ने भी अपने-अपने पात्रों के साथ पूरा न्याय किया है।
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फ़िल्म ओएमजी 2 की कहानी एक बेहद गंभीर मुद्दे पर है, जिसे करते तो सब हैं पर बात कोई नहीं करता। लेकिन फ़िल्म में जिस तरीक़े से बिना किसी वल्गर भाषा का इस्तेमाल किए सनातन धर्म और पौराणिक ग्रन्थों के आधार पर शोभनीय भाषा का प्रयोग कर इन मुद्दों को पेश किया गया है वो सराहनीय है। फ़िल्म का स्क्रीनप्ले भी काफ़ी कसा हुआ है, जो फ़िल्म के हर सीन को एकदूसरे से कनेक्ट करता है। असरदार डायलॉग्स ,कोर्टरूम ड्रामा, व्यंग और कॉमेडी से भरपूर ओएमजी 2 समाज को एक बहुत ज़रूरी मैसेज देती हुई नज़र आती है।
ओवरऑल कहा जाए तो ओएमजी 2 देखने लायक़ फ़िल्म है। ऐसी फ़िल्में बहुत कम बनती हैं, जिसमें इतनी संजीदगी से सच्चाई को पिरोया गया हो। समाज और सिस्टम को आईना दिखाती हुई ये फ़िल्म काफ़ी सच्चा और स्ट्रोंग मैसेज देती है। फ़िल्म ओएमजी 2 को एक बार तो ज़रूर देखना चाहिए।