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Matto Ki Saikil: क्यों फिल्म गंगाजल के डायरेक्टर Prakash Jha ने कहा लाल सिंह चड्ढा को बॉयकॉट न भी करते तो भी कितनी चल जाती

Matto Ki Saikil: क्यों फिल्म गंगाजल के डायरेक्टर Prakash Jha ने कहा लाल सिंह चड्ढा को बॉयकॉट न भी करते तो भी कितनी चल जाती मट्टो की साईकिल फिल्म के प्रमोशन के दौरान प्रकाश झा ने फिल्मों को फ्लॉप होने के कुछ कारण बताए हैं यहां हम उसी को जानने का प्रयास करेंगे।

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नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा (Hindi Cinema) के एक बहुत बड़े डायरेक्टर (Bollywood Director) हैं जो ऐसी फिल्में लाते रहते हैं जो लोगों के दिलों को छू जाती हैं। ये डायरेक्टर भले ही देखने में सीधे साधे , गमछा डाले पुराने समाज के लगते हों पर ये अपनी फिल्मों के माध्यम से बातें अक्सर इतनी गहरी करते हैं जो धक से जाकर दिल में लगती है और सीख भी दे जाती है। कुछ लोग इन्हीं हिंदी सिनेमा का पितामह मानते हैं तो कुछ इन्हें वो स्टार मानते हैं जो आज भी हिंदी सिनेमा को जीवित रख सका है। जो आज मॉडर्न समाज में जी भी रहा है और अपनी शर्तों के मुताबिक जी रहा है। इसकी इन शर्तों से किसी को आपत्ति नहीं होती है क्योंकि इसका संवाद बड़े-बूढ़ों (Old Age Group) से भी हो जाता है और युवा जनमानस (Young Generation) से भी ये व्यक्ति जल्द संवाद (Dialogue) स्थापित कर लेता है। ये गंगाजल (Gangaajal) बनाता है तो इसे एक विचार और वर्ग के लोग पसंद करते हैं ये आरक्षण (Aarakshan) बनाता है तो इसे युवा अपना आदर्श (Ideal) मान लेते हैं। ये राजनीति (Rajneeti) बनाता है तो कॉलेज के लड़के लोग इसकी फिल्म के संवाद का इस्तेमाल करने लगते हैं और ये आश्रम (Ashram) बनाता है तो लोग इसे तत्कालीन समय का बेहतरीन निर्देशक समझ लेते हैं। इतनी परिचय होने के बाद आप समझ सकते हैं मैं फिल्मकार और कलाकार प्रकाश झा (Prakash Jha) जी के बारे में बात कर रहा हूं। जिनकी हाल ही में एक बेहद इमोशनल और गरीबों के दुःख को बयान करती फिल्म आ रही है जिसका नाम है मट्टो की साईकिल (Matto Ki Saikil)। मट्टो की साईकिल फिल्म के प्रमोशन के दौरान प्रकाश झा ने फिल्मों को फ्लॉप होने के कुछ कारण बताए हैं यहां हम उसी को जानने का प्रयास करेंगे।

आपको बता दें 16 सितंबर को प्रकाश झा की एक फिल्म आ रही है जिसका नाम है मट्टो की साइकिल। प्रकाश झा इस फिल्म में बतौर एक्टर काम कर रहे हैं। इस फिल्म के प्रमोशन के दौरान प्रकाश झा से फिल्मों के बॉयकॉट को लेकर सवाल पूछा गया जिसपर उन्होंने कहा,“जब भी आप सार्वजनिक कोई भी चीज़ करेंगे तो उसमें लोगों के राय (Opinion) होंगी। ऐसा नहीं है कि हर फिल्म हर इंसान देखना चाहता हो। लेकिन बॉयकॉट का असर तभी पता चलेगा जब बहुत बड़ी कोई फिल्म रिलीज़ हुई और लोगों ने उसका बॉयकॉट कर दिया हो।

आगे वो कहते हैं,“हाल ही में लाल सिंह चड्ढा (Laal Singh Chaddha) को बॉयकॉट करने की बात चली, तो लाल सिंह चड्ढा फिल्म तो बहुत सारे लोगों को अच्छी लगी नहीं। मुझे बहुत सारे लोग नहीं मिले जिन्होंने फिल्म को कमाल का बताया हो। तो ऐसी फिल्म का अगर बॉयकॉट न भी हुआ होता तो भी ये फिल्म कितना ही चल जाती।” उन्होंने आगे कहा की साउथ की रीमेक बनाना और किसी स्टार को खरीदकर फिल्म बना देना बंद करना होगा। उन्होंने कहा की अगर दर्शकों को आप ओरिजिनल चीज़ नहीं देंगे तो ऐसा ही हाल होगा।

तीखा हमला करते हुए कहा उन्होंने बहुत सारे लोगों और कंपनियों ने पैसे के बल पर सबकुछ खरीद लिया है तो ऐसे समय में अच्छी फिल्म बनाई नहीं जा सकती है। कंटेंट पर ध्यान देना होगा तभी दर्शक फिल्म की ओर आकर्षित होगा। उन्होंने कहा मैं उम्मीद करता हूं अगर छोटा सा किरदार, छोटी सी स्टारकास्ट और छोटे बजट की फिल्म बन जाए और चल जाए तो बहुत सारे लोगों का हौसला बढ़ता है। उन्होंने अपनी फिल्म के बारे में बताते हुए कहा, “मैं हमेशा दर्शकों, मजदूर वर्ग के साथ हूं, आप सब लोग हमारी नज़र में हैं। आपके सपनों को, कष्टों को, दर्द को, प्रेम को, अन्धकार को हम अपना समझते हैं और हर कोशिश करने को तैयार हैं जिससे आपकी बेहतरी हो सके।”

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