एयरफोर्स चीफ भदौरिया ने तेजस में भरी उड़ान, वायुसेना में शामिल दूसरी स्क्वाड्रन इस वजह से है खास

खास बात ये है कि ये एलसीए तेजस, ‘एफओसी’ वर्जन है और पहले के तेजस फाइटर जेट से ज्यादा एडवांस और लीथल यानि खतरनाक हैं। बता दें कि तेजस देश में विकसित लड़ाकू विमान है और इसके वायुसेना में शामिल होने से सेना की ताकत में इजाफा होगा।

Written by: May 27, 2020 12:49 pm

नई दिल्ली। बुधवार को स्वदेशी विमान तेजस की दूसरी स्क्वाड्रन भारतीय वायुसेना में शामिल हो गई। इस स्क्वाड्रन का नाम फ्लाइंग बुलेट्स दिया गया है, जिसकी शुरुआत वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने सुलूर एयरबेस से इसकी शुरुआत की। वायुसेना प्रमुख ने खुद तेजस लड़ाकू विमान में उड़ान भरी।

Tejas fighter

वायुसेना में शामिल दूसरी स्क्वाड्रन की खूबियां

आज इस कार्यक्रम का आयोजन तमिलनाडु के कोयम्बटूर के पास सुलूर एयरफोर्स स्टेशन पर किया गया। यह स्क्वाड्रन LCA तेजस विमान से लैस है। तेजस को उड़ाने वाली वायुसेना की यह दूसरी स्क्वाड्रन है। खास बात ये है कि ये एलसीए तेजस, ‘एफओसी’ वर्जन है और पहले के तेजस फाइटर जेट से ज्यादा एडवांस और लीथल यानि खतरनाक हैं। लड़ाकू विमान तेजस एक चौथी पीढ़ी का हल्का विमान है। इसकी तुलना अपने जेनरेशन के सभी फाइटर जेट्स में सबसे हल्के विमान के तौर पर होती है। बता दें कि तेजस देश में विकसित लड़ाकू विमान है और इसके वायुसेना में शामिल होने से सेना की ताकत में इजाफा होगा।

Tejas fighter

एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने अब तक राफेल लड़ाकू विमान सहित 28 से ज्यादा प्रकार के लड़ाकू और परिवहन विमानों को उड़ाया है। एयर मार्शल भदौरिया प्रायोगिक टेस्ट पायलट होने के साथ कैट ‘ए’ कैटेगरी के क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और पायलट अटैक इंस्ट्रक्टर भी हैं।

नंबर 18 स्क्वाड्रन फ्लाइंग बुलेट्स LCA तेजस को उड़ाने वाला दूसरा IAF स्क्वाड्रन होगा। पहली बार इस स्क्वाड्रन का गठन 15 अप्रैल, 1965 को किया गया था और यह MIG-27 फाइटर जेट्स को संचालित करने के लिए इस्तेमाल हो चुकी है।