भीमा-कोरेगांव युद्ध की सालगिरह का जश्न शांतिपूर्ण

एक जनवरी, 1818 को हुए मशहूर कोरेगांव-भीमा युद्ध में बाजीराव पेशवा द्वितीय के 28,000 सैनिकों का सामना ईस्ट इंडिया कंपनी की द बम्बई नेटिव इन्फेंट्री सेना की एक टुकड़ी से हुआ था, जिसमें मात्र 800 महार सैनिक शामिल थे और करीब 12 घंटे तक चले इस युद्ध में महार ने पेशवा की मजबूत सेना को हरा दिया था।

Written by: January 1, 2020 6:08 pm

नई दिल्ली। उप मुख्यमंत्री अजित पवार और बहुजन वंचित अघाड़ी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर सहित पूरे महाराष्ट्र से हजारों की संख्या में दलित बुधवार को यहां ऐतिहासिक कोरेगांव-भीमा युद्ध की 202वीं वर्षगांठ मनाने के लिए एकत्रित हुए। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले, जो रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के प्रमुख हैं, महाराष्ट्र के मंत्री नितिन राउत (कांग्रेस), जितेंद्र अव्हाड (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) और अन्य कई लोगों के बुधवार को इस समारोह में शामिल होने की उम्मीद है।

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मंगलवार को भोर होने के बाद से ही कोरेगांव-भीमा में दलितों का आना शुरू हो गया। वे यहां स्मारक स्तंभ के पास जमा हुए और बाद में अजित पवार और आंबेडकर ने भी पुष्पांजलि अर्पित की।

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एक जनवरी, 1818 को हुए मशहूर कोरेगांव-भीमा युद्ध में बाजीराव पेशवा द्वितीय के 28,000 सैनिकों का सामना ईस्ट इंडिया कंपनी की द बम्बई नेटिव इन्फेंट्री सेना की एक टुकड़ी से हुआ था, जिसमें मात्र 800 महार सैनिक शामिल थे और करीब 12 घंटे तक चले इस युद्ध में महार ने पेशवा की मजबूत सेना को हरा दिया था।

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उस दिन से हर साल महाराष्ट्र और देश के तमाम हिस्सों से दलित यहां पेशवा की सेना पर ब्रिटिश सेना की जीत का स्मरण करने के लिए जमा होते हैं। देश भर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर पुणे की पुलिस और प्रशासन ने मंगलवार से कोरेगांव-भीमा में और इसके आसपास 10,000 पुलिस के साथ सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए और कुछ 500 अधिकारी भी तैनात किए गए, ताकि समारोह को शांतिपूर्ण ढंग से मनाया जा सके।