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Bihar Political Turmoil: बिहार में महाराष्ट्र की तरह ‘खेला’ के संकेत!, आरसीपी सिंह ने नीतीश की सत्ता पर ऐसे लटकाई तलवार

आरसीपी सिंह एक वक्त नीतीश कुमार के खास हुआ करते थे। नीतीश ने उन्हें राज्यसभा भी भेजा था। बीते दिनों आरसीपी को मोदी सरकार में मंत्री बनाया गया था। इसके बाद से ही नीतीश के साथ उनकी खटपट की खबरें आने लगी थीं। दो दिन पहले जेडीयू अध्यक्ष ललन सिंह ने आरसीपी को पत्र भेजकर उनके परिजनों के नाम अकूत संपत्ति पर जवाब मांगा था।

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rcp singh and nitish kumar

पटना। बिहार में भी क्या महाराष्ट्र जैसा ‘खेला’ होगा? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि राज्य में सत्तारूढ़ नीतीश कुमार के खिलाफ पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने अपने पासे चलने शुरू कर दिए हैं। खबर है कि आरसीपी के संपर्क में जेडीयू के तमाम विधायक हैं। अगर इन विधायकों में से दो-तिहाई को आरसीपी महाराष्ट्र की तरह तोड़ने में सफल हो गए, तो नीतीश कुमार को सत्ता गंवानी पड़ सकती है। बता दें कि आरसीपी पर जेडीयू ने भ्रष्टाचार से अकूत संपत्ति हासिल करने का आरोप लगाया था। जिसके बाद आरसीपी ने पार्टी छोड़ दी थी। उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार सात जन्म तक पीएम नहीं बन सकते।

rcp singh

बता दें कि आरसीपी सिंह एक वक्त नीतीश कुमार के खास हुआ करते थे। नीतीश ने उन्हें राज्यसभा भी भेजा था। बीते दिनों आरसीपी को मोदी सरकार में मंत्री बनाया गया था। इसके बाद से ही नीतीश के साथ उनकी खटपट की खबरें आने लगी थीं। दो दिन पहले जेडीयू अध्यक्ष ललन सिंह ने आरसीपी को पत्र भेजकर उनके परिजनों के नाम अकूत संपत्ति पर जवाब मांगा था। इसके बाद आरसीपी सिंह ने जेडीयू की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। आरसीपी सिंह ने कहा था कि सारी संपत्ति या तो पुश्तैनी है, या उन्होंने और बेटी ने अपने पैसे से खरीदी है। उन्होंने इसके साथ ही नीतीश के खिलाफ जमकर भड़ास भी निकाली थी।

nitish kumar

अब बिहार विधानसभा में आंकड़ों का गणित भी देख लेते हैं। विधानसभा में 243 सीटे हैं। बहुमत के लिए 122 सदस्य चाहिए। बीजेपी के 74 विधायक और सत्तारूढ़ जेडीयू के 43 विधायक हैं। विपक्षी महागठबंधन के पास 110 विधायक हैं। अगर बीजेपी यहां जेडीयू का साथ छोड़कर सरकार बनाना चाहे, तो उसे 48 और विधायकों की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए कांग्रेस के 19 सदस्यों या आरजेडी के विधायकों को भी तोड़ना पड़ेगा। जो फिलहाल इतना आसान नहीं दिख रहा, लेकिन सियासत तो संभावनाओं का ही खेल है। इस वजह से सबकी नजरें फिलहाल बिहार पर टिकी हैं।

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