अंतराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव में शामिल हुए CM शिवराज, जिज्ञासा और जिद को बताया विज्ञान की जननी

प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और एमएसएमई मंत्री श्री ओमप्रकाश सखलेचा ने कहा कि प्रदेश की विज्ञान प्रौद्योगिकी और नवाचार नीति-2022 के क्रियान्वयन से वैज्ञानिक शोध और नवाचार को गति मिली है तथा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिल रहा है, हम आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं।

Avatar Written by: January 21, 2023 10:19 pm

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि जिज्ञासा और जिद, विज्ञान की जननी हैं। विज्ञान को प्रौद्योगिकी की जननी माना जाता है, पर जिज्ञासा तो विज्ञान की भी जननी है। जिज्ञासा ही हमें विज्ञान या गणित के किसी सूत्र को समझने में मदद करती है। अत: हमारा यह लक्ष्य होना चाहिए कि हम अपनी अधिक से अधिक ऊर्जा जनमानस में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा जागृत करने में लगाएं। लेकिन अगर किसी विषय के लिए जिज्ञासा हो और उसे पूरा करने की जिद न हो तो वह काम कभी पूरा नहीं हो सकता। किसी भी काम में कई गतिरोध आते हैं लेकिन यह जिद ही है, जो हमें उस काम को पूरा करने के संकल्प पर कायम रखती है। जिज्ञासा और जिद के इसी फार्मूले को ध्यान में रख कर प्रदेश में विज्ञान तकनीक और नवाचार नीति-2022 लागू की गई है। वैज्ञानिक सोच और समझ को दैनिक जीवन का अंग बनाना, सरकार और समाज में आधुनिक तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग तथा नया सोचने, नया सीखने और नई पहल करने वाली पीढ़ी के निर्माण के तीन बिन्दु हमारी नीति का आधार हैं। प्रदेश में स्टार्टअप के लिए श्रेष्ठतम ईको सिस्टम विद्वमान है। मुख्यमंत्री श्री चौहान आठवें भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री चौहान ने यह आयोजन भोपाल में करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार माना।


डिजीटल प्रस्तुतिकरण द्वारा हुआ कार्यक्रम के लक्ष्यों का प्रदर्शन

भोपाल के मैनिट में आयोजित कार्यक्रम में केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह, प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और एमएसएमई मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, केन्द्रीय जैव प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव डॉ. राजेश गोखले, पृथ्वी मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन, विज्ञान भारती के महासचिव प्रो. सुधीर भदौरिया, सी.एस.आई की महानिदेशक डॉ. एन. कलईसेल्वी, प्रदेश के विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रमुख सचिव निकुंज श्रीवास्तव विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री चौहान ने दीप प्रज्जलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम के आरंभ में प्रसिद्ध नृत्यांगना सुश्री कल्याणी वैदेही द्वारा द्वैत-अद्वैत पर केन्द्रीय ओड़िसी नृत्य प्रस्तुत किया गया। डिजीटल प्रस्तुतिकरण द्वारा कार्यक्रम के लक्ष्यों का प्रदर्शन भी किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शैक्षणिक फेकल्टी, शोधार्थी, विद्यार्थी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री चौहान ने कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा विज्ञान महोत्सव के 21 जनवरी के न्यूज बुलेटिन का विमोचन भी किया।

पूर्णत: वैज्ञानिक है प्रधानमंत्री मोदी की सोच

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि आरंभ से ही भारत की सोच वैज्ञानिक रही है। हजारों वर्षों से विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत आगे रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत की इन क्षमताओं का प्रकटिकरण हुआ है। कोविड काल में आठ माह की कम अवधि में दो वैक्सीन बनाना तथा दुनिया के 100 से अधिक देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराना और विश्व के कई देशों के उपग्रह भारत से लांच करना भारत की प्रतिभा और क्षमता को प्रदर्शित करता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत गौरवशाली, समृद्ध, संपन्न और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में अग्रसर हो रहा है। इसमें विज्ञान और तकनीकी की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने सही दिशा प्रदान की है। यह संपूर्ण विश्व स्वीकारता है कि प्रधानमंत्री मोदी की सोच पूर्णत: वैज्ञानिक है।

भारत भूमि ज्ञान के साथ ही वैज्ञानिक परंपरा की भी जननी है

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि भारत की समृद्ध विरासत रही है। भारत भूमि ज्ञान के साथ ही वैज्ञानिक परंपरा की भी जननी है। आज से सात हजार साल पहले रामायण काल में विमान की कल्पना की गई थी। महार्षि कणाद के परमाणु वाद, भास्कराचार्य के खगोल शास्त्रीय सिद्धांत प्राचीन भारतीय मेधा के प्रमाण हैं। वाराणसी और तक्षशिला औषधि विज्ञान के बढ़े केन्द्र रहे। महर्षि सुश्रुत और चरक का चिकित्सा में योगदान अतुलनीय है। आर्यभट्ट और वाराहमिहिर से हमें नवग्रह की जानकारी प्राप्त होती है। भारत का दर्शन यह मानता है कि धर्म और विज्ञान एक दूसरे समर्थक हैं। प्रसिद्ध वैज्ञानिक सी.वी. रमन ने कहा था कि 20वीं सदी विज्ञान की हो सकती है लेकिन 21वीं सदी वैज्ञानिक अध्यात्म की सदी होगी।

मध्यप्रदेश में युवाओं को नवाचार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में युवाओं को नवाचार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं, प्रदेश में 2600 से अधिक स्टार्टअप एक साल में आरंभ हुए हैं। केवल बड़े शहरों से ही नहीं कस्बों से भी वैज्ञानिक सोच के साथ युवा आगे बढ़ रहे हैं। राज्य सरकार सभी तरह के स्टार्टअप और नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

विज्ञान को जन-जन से जोड़ना कार्यक्रम का उद्देश्य

केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि विज्ञान को जन-जन से जोड़ने के उद्देश्य से ही यह कार्यक्रम उत्सव के रूप में आयोजित किया गया है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार से ही 2047 के भारत की तस्वीर निर्धारित होगी। अत: हमें इस क्षेत्र में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विज्ञान के अध्ययन व शोध की व्यवस्था को सरल व तर्कसंगत बनाया है। इससे युवाओं के लिए नए अवसर सृजित हुए हैं और देश के विकास की गति तेज हुई है। मध्यप्रदेश में कृषि, बांस तथा वेस्ट टू वेल्थ के क्षेत्र में गतिविधियों की बहुत अधिक संभावनाएं हैं। केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ. सिंह ने विज्ञान महोत्सव के लिए राज्य सरकार से मिले सहयोग और सुविधा के लिए मुख्यमंत्री श्री चौहान का आभार माना।

हम आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं

प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और एमएसएमई मंत्री श्री ओमप्रकाश सखलेचा ने कहा कि प्रदेश की विज्ञान प्रौद्योगिकी और नवाचार नीति-2022 के क्रियान्वयन से वैज्ञानिक शोध और नवाचार को गति मिली है तथा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिल रहा है, हम आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय सूद ने कहा कि भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव वैज्ञानिक सोच, वैज्ञानिक व्यवहार और वैज्ञानिक जीवन जीने के तरीकों का उत्सव है। विज्ञान की अपनी निरंतरता है। प्रधानमंत्री मोदी के वर्ष 2070 तक कार्बन नेट जीरो के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हम सबको प्रयास करने होंगे। ग्रीन हाइड्रोजन, सेमी कंडक्टर, क्वांटम टेक्नालॉजी भविष्य के क्षेत्र हैं। प्रो. सूद ने आर्टिफिसियल इंटीलीजेंस के जिम्मेदारी पूर्ण उपयोग के लिए भी सतर्क किया।

विज्ञान देश के जन-जन में समाहित हो। विज्ञान भारती के महासचिव प्रो. सुधीर भदौरिया ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह है कि विज्ञान देश के जन-जन में समाहित हो, और देश को नई दृष्टि मिले। भारत की एक निश्चित विज्ञान परंपरा रही है। योग, आयुर्वेद से लेकर आर्किटेक्चर व एस्ट्रोनॉमी तक में हमें निरंतरता मिलती है। प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प के अनुरूप देश वैज्ञानिक उपलब्धियों के दिशा में अग्रसर हो रहा है। समृद्ध भारत के लिए विज्ञान प्रौद्योगिकी और नवाचार में रचनात्मकता को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव का आयोजन भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग और राज्य शासन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। भारत सरकार का जैव प्रौद्योगिकी विभाग नोडल एजेंसी तथा स्थानीय स्तर पर मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद और विज्ञान भारती संस्था इस महोत्सव के आयोजक हैं। चार दिवसीय आयोजन 24 जनवरी तक रहेगा। इसमें 15 क्षेत्रों में निम्न गतिविधियां होंगी। जिनमें विद्यार्थियों, युवा वैज्ञानिकों, स्टार्टअप से जुड़ी गतिविधियां प्रमुख हैं।

Latest