
नई दिल्ली। दिल्ली में हुए सीएए विरोधी दंगों के तार भी कल जहांगीरपुरी में हुई हिंसा से जुड़ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक जहांगीरपुरी में जिस जगह हिंसा हुई, वहां से दिल्ली दंगों के वक्त 300 महिलाओं को सीएए विरोधी हिंसा के दौरान चांदबाग ले जाया गया था। इस बीच, सवाल ये उठ रहा है कि आखिर हिंसा करने वालों को पत्थर और शीशे की बोतलें कहां से मिलीं। इस पर पुलिस का कहना है कि शीशे की बोतलें हिंसा करने वालों ने पास के ही एक कबाड़ गोदाम से उठाई थीं। जबकि, पत्थर इकट्ठा करने के बारे में जांच की जा रही है।
इसके अलावा पुलिस इस इलाके में हिंसा करने वालों के हाथ तलवार और अन्य धारदार हथियार देखकर भी भौंचक है। इसे अभिसूचना इकाई के तंत्र की कमजोरी माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर राकेश अस्थाना से हिंसा के हर पहलू पर रिपोर्ट मांगी है। शाह ने सिलसिलेवार जानना चाहा है कि आखिर हिंसा करने वालों को पहले से ही पाबंद करने में दिल्ली पुलिस से चूक क्यों हुई। राकेश अस्थाना को तेज-तर्रार पुलिस अफसर माना जाता है। ऐसे में जहांगीरपुरी की घटना उनके करियर पर भी सवाल खड़े कर रही है।
जहांगीरपुरी में हिंसा के बाद 6 कंपनी फोर्स संवेदनशील इलाकों में लगाई गई है। यहां चप्पे-चप्पे पर पुलिस है। फिलहाल यहां शांति है। घटना में 6 पुलिसकर्मी और एक आम नागरिक के जख्मी होने की खबर है। पुलिस ने अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया है और सीसीटीवी के जरिए बाकी दंगाइयों को भी पहचानकर कार्रवाई की तैयारी है। स्पेशल ब्रांच की 10 टीमों को पुलिस कमिश्नर के आदेश पर हिंसा की जांच के लिए तैनात किया गया है।