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दिल्ली पुलिस ने जहांगीर पुरी मामले दाखिल की चार्जशीट, हुआ बड़ा खुलासा, सामने आया ये बड़ा सच

पुलिस के मुताबिक शोभा यात्रा को लेकर विश्व हिंदू परिषद के कुछ पदाधिकारी ने जो दिल्ली प्रान्त, मुख़र्जी नगर, और झंडेवालान के थे एसएचओ जहांगीरपूरी से बात की थी। उन्होंने उत्तर पश्चिमी दिल्ली के डीसीपी आफिस से संपर्क किया लेकिन शोभायात्रा की परमिशन नही मिली। लेकिन जब शोभायात्रा निकली तो एहतियात के तौर पर पुलिस ने सुरक्षा के पूरे इंतज़ाम किया था।

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नई दि्ल्ली। जहांगीर पुरी हिंसा मामले को लेकर दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट तैयार कर ली है, जिसमें मामले को लेकर कई बड़े खुलासे हुए हैं।  आरोपपत्र में कहा गया है कि साजिश के तहत लोगों की भीड़ मौजूद थी। यात्रा के लोगों के साथ वहां मौजूद लोगों आमना सामना हुआ। इसके बाद यात्रा में मौजूद लोगों पर वहां की भीड़ ने हमला कर दिया, खतरनाक हथियार से, शीशे की बोतल से और पत्थर भी फेंके। इसके बाद यात्रा में मौजूद लोगों ने भी विरोध किया और माहौल धीरे धीरे दंगे में बदल गया। पुलिस के मुताबिक जांच में पता लगा है कि हनुमान जयंती की शोभा यात्रा में मौजूद कुछ लोगों ने भी तमंचा, तलवार और लाठी डंडे ले रखे थे। पुलिस ने इस मामले में 31 मुस्लिम और 6 हिंदुओं को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक शोभा यात्रा को लेकर विश्व हिंदू परिषद के कुछ पदाधिकारी ने जो दिल्ली प्रान्त, मुख़र्जी नगर, और झंडेवालान के थे एसएचओ जहांगीरपूरी से बात की थी। उन्होंने उत्तर पश्चिमी दिल्ली के डीसीपी आफिस से संपर्क किया लेकिन शोभायात्रा की परमिशन नही मिली। लेकिन जब शोभायात्रा निकली तो एहतियात के तौर पर पुलिस ने सुरक्षा के पूरे इंतज़ाम किया था। 16 अप्रैल की शाम सवा चार बजे शोभायात्रा ee ब्लॉक जहाँगीर पूरी से निकली। सुरक्षा में जहाँगीर पूरी की लोकल पुलिस जिसे इंस्पेक्टर इन्वेस्टिगेशन लीड कर रहे थे के अलावा डीसीपी रिज़र्व के जवान भी वहां तैनात थे। शोभायात्रा शांति से चल रही थी, लेकिन जब शोभायात्रा शाम 6 बजे c ब्लॉक के मस्जिद के सामने पहुचीं तो वहां अंसार मौजूद था अपने साथियों के साथ। अंसार ने शोभायात्रा में मौजूद लोगों से बहस शुरू कर दी। बहस पत्थरबाजी में बदल गई और देखते ही देखते दंगे का माहौल बन गया।

मौके पर मौजूद इंस्पेक्टर राजीव ने चेतावनी देते हुए भीड़ से तुरंत हटने को कहा लोग हटे , फिर तुरन्त वो जुटे, नारे लगाने लगे और पत्थरबाजी शुरू हो गई। इसके बाद तुरंत कंट्रोल रूम को फ़ोन करके पुलिस मौके पर बुलाई गई, चार्जशीट के मुताबिक भीड़ के पास तमंचे, तलवार लाठी डंडे तो थे ही साथ मे पत्थरबाजी भी रही थी। इसमें 8 पुलिस वालों को चोट लगी। एक पुलिसकर्मी सबइंस्पेक्टर मेदा लाल के हाथ पर गोली लगी थी। दंगाई पत्थरबाजी कर रहे थे, गोली चला रहे थे, गाड़ियों में तोड़ फोड़ कर रहे थे, एक स्कूटी को भी आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने इस मामले में शोभायात्रा बिना इजाजत निकालने के लिए उनके ऑर्गनाइज़र के ख़िलाफभी केस किया।मौके से कुल 34 पीसीआर कॉल ही कि गई थी।

पुलिस के मुताबिक, एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था जब शोभायात्रा bc ब्लॉक से गुजर रही थी तो उस वक़्त भी दो लोग शोभायात्रा में मौजूद लोगों को भलाबुरा कह रहे थे। हालात उस वक़्त से ही खराब होने लगा था। लेकिन माहौल 6 बजे उस वक़्त खराब हुआ जब शोभायात्रा c ब्लॉक मस्जिद के सामने पहुंची। वहां पर अंसार, तबरेज, आलिम चिकना और इनके लोग मौजूद थे। भीड़ में कुछ ने पिस्टल, तलवार और डंडा ले रखा था। ये लोग शोभायात्रा में मौजूद लोगों से बहस करने लगे और हालात खराब होने लगे। पथराव के बाद सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक शोभायात्रा को लेकर लोग भागने लगे कुशल चौक की तरफ और उन पर लगातार पत्थरबाजी और बोतले फेंकी जा रही थी। इसके बाद कुशल चौक पर हिन्दू कम्युनिटी के लोग जुटने लगे और उन्होंने भी जवाब देना शुरू किया। एक सीसीटीवी फुटेज में नज़र आया है कि इस हिंसा से पहले आरोपी बाबुद्दीन की दुकान के पास 8 से 10 बोरे में बोतलें भरकर रखी गई थी। और बाद में यही बोतले दंगे में इस्तेमाल की गई। पुलिस के मुताबिक आरोपी बाबुद्दीन भीड़ को भड़काता नज़र आया और उसने अपना चेहरा रुमाल से बांध रखा था और दंगाइयों के साथ कुशल चौक कि तरफ जा रहा था। इस बीच एक और भीड़ कुशल चौक की तरफ आई और उसने भी तोड़ फोड़ शुरू किया तभी h ब्लॉक कि तरफ से भीड़ आई और उसने इन्हें दौड़ा कर भगा दिया।

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