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UP: चुनाव से पहले अखिलेश यादव की डूबी लुटिया, सुप्रीम कोर्ट में उठी सपा की मान्यता रद्द करने की मांग

Samajwadi Party: इतना सब कुछ जानने के बावजूद भी सपा के कर्ता धर्ता ने नाहिद को टिकट देने से कोई गुरेज नहीं किया है। वजह साफ था कि कैराना मुस्लिम बहुल इलाका है, लिहाजा सपा आलाकमान को लगा कि नाहिद को टिकट देने से कैराना में सपा का विजयी पताका बुलंद होगा।

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akhilesh yadav

नई दिल्ली। अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश समेत सभी चुनावी सूबों के सियासी दलों के मार्फत आगामी चुनावी दंगल में उतरने जा रहे प्रत्याशियों की सूची जारी की गई। अभी तक उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड सरीखे चुनावी राज्यों में सियासी दलों की तरफ से उम्मीदवारों की फेहरिस्त जारी की जा चुकी है। चुनावी सूबों में जारी किए गए इन फेहरिस्तों को लेकर कहीं खुशी तो कहीं गम तो कहीं विरोध दिखा। जिनके हत्थे पहली मर्तबा चुनावी टिकट लगा उनकी तो लॉटरी लग गई और जिनका टिकट कटा वे बेचारे अवसादग्रस्त हो गए, लेकिन कुछ ऐसे लोगों के हत्थे टिकट लगा, जिसे लेकर सियासी गलियारों में बवाल भी मच गया। ऐसा ही एक नाम था नाहिद हसन। जी हां…आपको बता दें कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने यह जानने के बावजूद भी कि नाहिद के खिलाफ मुख्तलिफ धाराओं के तहत केस दर्ज है। वह कई आपराधिक मामलों में वांछित है। यहां तक कैराना मामलों में उसे हिंदुओं के पलायन का मास्टरमाइंड माना जाता है। कई मौके पर उसने पुलिस की चौखट पर हाजिरी भी लगवा चुका है।

इतना सब कुछ जानने के बावजूद भी सपा के कर्ताधर्ता ने नाहिद को टिकट देने से कोई गुरेज नहीं किया। वजह साफ थी कि कैराना मुस्लिम बहुल इलाका है, लिहाजा सपा आलाकमान को लगा कि नाहिद को टिकट देने से कैराना में सपा का विजयी पताका बुलंद किया जा सकेगा। खैर, नाहिद को टिकट मिलने के बाद सियासी गलियारों में बहस की बयार बहने लगी। कांग्रेस से लेकर बीजेपी के सियासी सूरमाओं ने सपा द्वारा नाहिद को टिकट दिए जाने का विरोध किया। नतीजतन सपा आलाकमान को अपने फैसले में तब्दीली करते हुए नाहिद का  टिकट काटना पड़ गया। अब ये और बात है कि चुनाव जीतने के लिए जहां नाहिद का टिकट काट दिया गया तो वहीं उसकी बहन को चुनाव में उतार दिया गया। शायद सपा को लगा होगा कि नाहिद का टिकट उसकी बहन के हत्थे टिकट थमा देने से उसकी सियासी दुश्वारियों की इंतहा हो गई है, लेकिन नहीं, अभी तो सपा की मुश्किलों का यह महज ट्रिजर ही था, अभी तो उसे ट्रेलर और फिल्म भी देखनी है।

खतरे में सपा की मान्यता

जी बिल्कुल…ठीक पढ़ा आपने…अगर सब कुछ तय कायदों के मानिन्द हुआ तो आप उक्त वाक्य को चरितार्थ होते भी देखेंगे। दरअसल, अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सपा की मान्यता रद्द कराने की मांग की है। उपाध्याय ने यह मांग नाहिद हसन को सपा द्वारा टिकट देने के मद्देनजर की है। याचिका में कहा गया है कि सपा ने नाहिद हसन को टिकट देकर चुनावी दिशानिर्देशों की अवहेलना की है। लिहाजा महज नाहिद का टिकट काटकर उसकी बहन को टिकट थमा देने से सपा के खिलाफ नरमी नहीं बरती जा सकती है। उपाध्याय ने कहा कि सपा की कौताहियों का अंदाजा महज इसी से लगाया जा सकता है कि नाहिद हसन के बारे में किसी भी संचार माध्यम के जरिए कोई जानकारी साझा नहीं की गई थी। सोशल मीडिया से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया…किसी भी संचार माध्यम के जरिए नाहिद हसन के बारे में जानकारी साझा करने के बारे में सपा ने जहमत नहीं उठाई। उपाध्याय ने कहा कि जिस तरह से सपा ने चुनावी निर्देशों का उल्लंघन किया है, उसे संज्ञान में लेते हुए उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी होगी।

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सीएम योगी ने भी साधा था निशाना

ध्यान रहे सपा द्वारा उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि सपा की पहली प्रत्याशियों की सूची से जाहिर होता है कि कैसे अखिलेश यादव प्रदेश में गुंडाराज झोंकने पर आमादा हो चुके हैं। बता दें कि इससे पहले भी कई मौकों पर प्रदेश की लचर कानून-व्यवस्था को लेकर सीएम योगी की तरफ से सपा प्रमुख को आड़े हाथों लिया जा चुका है। खैर, अब देखना होगा कि आगे चलकर नाहिद हसन को टिकट देकर जिस तरह मुश्किलों के जाल में सपा फंस चुकी है, उससे बाहर निकलने के लिए अखिलेश यादव क्या कुछ तरकीब निकालते हैं।

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