Himanta Biswa Sarma : बाल विवाह पर चला हिमंत बिस्व सरमा का हंटर, 1800 लोगों की गिरफ्तारी, 4,004 मामले दर्ज

Himanta Biswa Sarma : सरमा ने ट्विटर पर असम पुलिस की रिपोर्ट साझा करते हुए कहा, ‘असम सरकार राज्य में बाल विवाह के खतरे को समाप्त करने के लिए पूरी तरीके से दृढ़संकल्पित है। अब तक असम पुलिस ने राज्य भर में 4,004 मामले दर्ज किए हैं। सीएम के बयान के मुताबिक शुक्रवार सुबह से ही इन मुकदमों पर कार्रवाई जारी है।

Avatar Written by: February 3, 2023 1:37 pm

दिसपुर। बाल विवाह को रोकने के लिए असम सरकार पूरी तरीके से कमर कस चुकी है। असम के कई पिछड़े इलाकों में बाल विवाह एक बड़ी समस्या के रूप में उभर कर सामने आया है। असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा बाल विवाह पर रोक को लेकर पूरी तरह से एक्शन में हैं। बीते गुरुवार को सीएम ने हिमंत ने कहा कि राज्य भर में कुल चार हजार से ज्यादा बाल विवाह के केस दर्ज किए गए हैं। साथ ही कहा कि आने वाले दिनों में पुलिस की कार्रवाई और तेज हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने मीडिया से बात करते हुए शुक्रवार को जानकारी दी कि राज्य में कुल 1,800 लोगों की गिरफ्तारी की गई है। इन सभी लोगों की गिरफ्तारी बाल विवाह से संबंधित केसों के लिए की गई है।

himanta biswa sarmaआपको बता दें कि इस बारे में सरमा ने ट्विटर पर असम पुलिस की रिपोर्ट साझा करते हुए कहा, ‘असम सरकार राज्य में बाल विवाह के खतरे को समाप्त करने के लिए पूरी तरीके से दृढ़संकल्पित है। अब तक असम पुलिस ने राज्य भर में 4,004 मामले दर्ज किए हैं। सीएम के बयान के मुताबिक शुक्रवार सुबह से ही इन मुकदमों पर कार्रवाई जारी है। जिसके चलते अब तक हजारों गिरफ्तारियां की जा चुकी है। सीएम सरमा ने असम की जनता से अपील करते हुए कहा कि सभी से सहयोग करने का अपील करता हूं।

सर्वाधिक केस धुबरी में दर्ज

असम सरकार की ओर से बालविवाह को लेकर जारी रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे अधिक 370 मामले धुबरी जिले में दर्ज किए गए हैं। जिसके बाद होजई (255) और उदलगुरी में 235 केस दर्ज किए गए हैं। गुवाहाटी पुलिस आयुक्तालय में कम से कम 192 मामले दर्ज किए गए थे। राज्य के दीमा हसाओ जिले में बाल विवाह के सबसे कम मामले दर्ज हैं।

असम सरकार की ओर से बीते दिनों पहले ही बाल विवाह करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया गया था। जिसमें कहा गया था, ‘नाबालिग लड़की से शादी करना न केवल कानून के खिलाफ है। बल्कि यह लड़की के मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन करता है। यह उसके स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक है। जारी आदेश के मुताबिक यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और बाल विवाह निषेध अधिनियम के मुताबिक, ऐसी लड़कियों से शादी करने वालों को जेल की सजा का प्रावधान किया गया है।

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