चीन को करारा जवाब देने की तैयारी, पीएम मोदी को तीनों सेनाओं ने सौंपा ब्लू प्रिंट

चीन की परेशानी पूर्वी लद्दाख इलाके में भारत की सड़क और चल रही अन्य सामरिक तैयारियों को लेकर है। भारत पर दबाव बनाकर चीन चाहता है कि भारत इस इलाके में सभी तरह के निर्माण कार्य रोक दे।

Written by: May 27, 2020 8:20 am

नई दिल्ली। भारत और चीन की सेना के बीच तनाव की स्थिति को देखते हुए मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बैठक कर तीनों सेनाओं से विकल्प सुझाने को कहा। बता दें कि पीएम मोदी ने मंगलवार शाम प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में लद्दाख के हालात पर विस्तृत रिपोर्ट ली। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी मौजूद थे।

pm modi ajit doval

आपको बता दें कि तीनों सेनाओं की तरफ से लद्दाख में चीन के साथ बने हालात पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विस्तृत रिपोर्ट दी गई। तीनों सेनाओं ने मौजूदा हालातों के मद्देनजर आसपास मौजूद डिफेंस असेट्स और तनाव बढ़ने की हालात में रणनीतिक और सामरिक विकल्पों को लेकर सुझाव दिए। तीनों सेनाओं ने मौजूदा हालात को लेकर अपनी तैयारियों का ब्लूप्रिंट भी प्रधानमंत्री को सौंपा।

दरअसल पूर्वी लद्दाख से सटे चीन के इलाके में चीन और पाकिस्तान का शाहीन नाम का युद्ध अभ्यास चल रहा था। उसके बाद से चीन दौलत बेग ओल्डी, गलवान नाला और पेंग्योंग लेक पर अपने 5000 से ज्यादा सिपाही टेंटों के साथ तैनात कर दिए हैं। जिसके जवाब में भारत की तरफ से भी चीन के सैनिकों के सामने बराबर की तादाद में टेंट गाड़ के अपने सैनिक तैनात कर दिए।

indo china border

मंगलवार को हुई बैठक में पीएम ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और सीडीएस जनरल बिपिन रावत से हालात की जानकारी ली। जनरल बिपिन रावत ने तीनों सेनाओं की तरफ से मौजूदा स्थिति और उससे निपटने के इनपुट दिए। साथ ही सेनाओं की तैयारियों का खाका पेश किया।

इससे पहले 6 और 7 मई को चीन और भारत के सैनिकों की सीमा की निगरानी के दौरान पेंग्योंग लेक इलाके में झड़प भी हुई थी। इसके बाद से पूर्वी लद्दाख की सीमा पर लगातार तनाव बना हुआ है।

India-China-relations

बता दें कि चीन की परेशानी पूर्वी लद्दाख इलाके में भारत की सड़क और चल रही अन्य सामरिक तैयारियों को लेकर है। भारत पर दबाव बनाकर चीन चाहता है कि भारत इस इलाके में सभी तरह के निर्माण कार्य रोक दे, लेकिन भारत किसी भी निर्माण कार्य को रोकने के पक्ष में नहीं है। भारत इस बार चीन को उसी की भाषा में जवाब देने और आरपार के मूड में है।