अब भारत-चीन सीमा पर निगाह रखने के लिए, लद्दाख में लगाए जाएंगे 134 सैटेलाइट फोन टर्मिनल

लद्दाख में गलवान घाटी, दौलत बेग ओल्डी, हॉट स्प्रिंग्स, चुशूल जैसे महत्वपूर्ण इलाकों को सैटेलाइट फोन कनेक्शन मिलेगा। ये सभी इलाके वास्तविक नियंत्रण रेखा से सटे हैं।

Avatar Written by: June 27, 2020 1:55 pm

नई दिल्ली। चीन की चालबाजियों से निपटने के लिए भारत अब हर कदम पर निगरानी रखने के लिए संचार के माध्यमों का सहारा ले रही है। भारत-चीन सीमा विवाद के बीच भारत अब बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। बता दें कि सीमा पर सिर्फ हथियारों से ही नहीं बल्कि तकनीकि के जरिए भी चीन को जवाब देने का भारत मूड बना चुका है।

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गौरतलब है कि लद्दाख के सीमावर्ती गांवों में संचार सुविधा को मजबूत करने के केंद्र सरकार की तरफ से नया प्लान तैयार किया गया है। सरकार ने लद्दाख में 134 डिजिटल सैटेलाइट फोन टर्मिनल स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इसको लेकर लद्दाख के एग्जिक्यूटिव काउंसलर कुनचोक स्टांजी ने बताया कि लद्दाख के 57 गांवों में तेजी से संचार तंत्र को मजबूत किया जाएगा। इसके लिए आठ साल से कोशिश की जा रही थी। कुनचोक स्टांजी के मुताबिक लेह के लिए 24 मोबाइल टावर की अनुमति मिल गई है, लेकिन अभी 25 और मोबाइल टावर की जरूरत है।

इस कनेक्टिविटी में 336.89 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस प्लान के तहत पूरे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को संचार तंत्र को मजबूत किया जाएगा।अगर सिर्फ लद्दाख की बात करें तो इस पर 57.4 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इससे जम्मू-कश्मीर के भी कई गांवों में लोग फोन सुविधा का फायदा उठा सकेंगे।

India-China LAC

लद्दाख में गलवान घाटी, दौलत बेग ओल्डी, हॉट स्प्रिंग्स, चुशूल जैसे महत्वपूर्ण इलाकों को सैटेलाइट फोन कनेक्शन मिलेगा। ये सभी इलाके वास्तविक नियंत्रण रेखा से सटे हैं। गलवान घाटी में ही हाल में चीन से संघर्ष हुआ है, जबकि दौलत बेग ओल्डी में भारत का सैन्य ठिकाना है। यहां पर संचार व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी।

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लद्दाख के एग्जिक्यूटिव काउंसलर कुनचोक स्टांजी ने कहा कि चीन ने अपनी सीमा में फोन नेटवर्क का विस्तार किया है। उनके यहां नेटवर्क की स्थिति अच्छी है। ऐसे में अब भारत ने भी इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि यहां की विषम भौगोलिक परिस्थिति की वजह से हर गांव में एक मोबाइल टावर की जरूरत पड़ती है। इस लिहाज से यहां अभी और टावर की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बॉर्डर से सटे कई गांवों में अभी भी नेटवर्क की समस्या रहती है।  उम्मीद की जा रही है नए मोबाइल नेटवर्क से यहां के लोगों की समस्या दूर होगी।