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Who Is Anand Mohan Singh : जानिए कौन हैं आनंद मोहन सिंह, डीएम की हत्या के आरोप में पहले मिली सजा-ए-मौत, फिर उम्र कैद, अब हुई रिहाई

Who Is Anand Mohan Singh : बिहार में एक नाम को लेकर खूब चर्चाएं हो रही हैं। वो नाम है बिहार के गोपालगंज के डीएम रहे दलित समाज के जी कृष्णैया की हत्या के मामले में 1994 में दोषी करार दिए गए पूर्व सांसद आनंद मोहन। इस मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। बता दें, कि 69 वर्षीय आनंद मोहन सिंह 27 साल के एक लंबे समय के बाद जेल से रिहा होने जा रहे हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें कि उन्हें गोपालगंज डीएम जी कृष्णैया की हत्या के मामले में दोषी पाया गया था। उस दौरान भीड़ ने अधिकारी पर हमला कर दिया। कहा गया कि राजनेताओं के भड़काने के चलते यह घटी।

पटना। बिहार सरकार ने बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई पर मुहर लगा दी है। इसके साथ ही नीतीश कुमार की अगुवाई वाली बिहार सरकार पर भी सियासी दुनिया के दिग्गज सवाल उठा रहे हैं। इनमें उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी एक हैं। हालांकि जेल से रिहा होते ही बाहुबली नेता अपने पुराने अंदाज में दिखे, उन्होंने कहा कि वो नहीं जानते मायावती कौन हैं। एक समय था जब बाहुबली नेता के तौर पर मशहूर आनंद मोहन सिंह की गोपालगंज समेत पूरे बिहार में तूती बोलती थी। अब एक बार फिर लोगों को ये उम्मीद है कि आनंद मोहन सिंह फिर सियासी दुनिया में वापसी करके अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिश करेंगे।

anand mohan

जानिए कौन हैं आनंद मोहन ?

इन दिनों बिहार में एक नाम को लेकर खूब चर्चाएं हो रही हैं। वो नाम है बिहार के गोपालगंज के डीएम रहे दलित समाज के जी कृष्णैया की हत्या के मामले में 1994 में दोषी करार दिए गए पूर्व सांसद आनंद मोहन। इस मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। बता दें, कि 69 वर्षीय आनंद मोहन सिंह 27 साल के एक लंबे समय के बाद जेल से रिहा होने जा रहे हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें कि उन्हें गोपालगंज डीएम जी कृष्णैया की हत्या के मामले में दोषी पाया गया था। उस दौरान भीड़ ने अधिकारी पर हमला कर दिया। कहा गया कि राजनेताओं के भड़काने के चलते यह घटी। गौर करने वाली बात ये है कि इस भीड़ में जनता जल यूनाइटेड के तमाम राजपूत नेता महागठबंधन सरकार पर सिंह की वक्त से पहले रिहाई को लेकर लगातार प्रेसर डाल रहे थे।

अगर बात करें आनंद मोहन सिंह की सजा की तो उनको साल 2007 में बिहार की एक निचली अदालत की तरफ से सजा-ए-मौत सुनाई गई थी। लेकिन इसके पश्चात आनंद मोहन के वकील की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर इस सजा के खिलाफ अपील की गई। इस मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सजा को उम्र कैद की सजा में तब्दील कर दिया था।