Constitution Day: विपक्ष के रवैये से नाराज हुए लोकसभा स्पीकर बोले- ये PM या पार्टी नहीं, संसद का था कार्यक्रम,

Constitution Day: संसद में आयोजित इस कार्यक्रम में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, सीपीआई, सीपीएम, डीएमके, अकाली, शिवसेना, एनसीपी, टीएमसी, आरजेडी, आरएसपी, केरल एम. आईयूएमएल और एआईएमआईएम शामिल नहीं हुई।

Written by: November 26, 2021 3:48 pm
om birla

नई दिल्ली। संविधान दिवस पर संसद के केंद्रीय कक्ष में एक आयोजित कार्यक्रम किया गया था। इस कार्यक्रम को पीएम मोदी, लोकसभा स्पीकर ने भी देश को संबोधित किया। हालांकि इस दौरान विपक्ष की पार्टियों के रवैये से लोकसभा स्पीकर ओम बिडला खासे नाराज नजर आये। लोकसभा स्पीकर ने कहा कि  मैं व्यथित हूं क्योंकि विपक्षी दलों को आकर मुझसे बात करते तो मैं कुछ समाधान निकलता। उन्होंने कहा कि ये पीएम या पार्टी का नहीं, संसद का कार्यक्रम था। ये अच्छी परंपरा नहीं है।

दरअसल संसद के केन्द्रीय कक्ष में संविधान दिवस के मौके पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था। संसद में आयोजित इस कार्यक्रम में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, सीपीआई, सीपीएम, डीएमके, अकाली, शिवसेना, एनसीपी, टीएमसी, आरजेडी, आरएसपी, केरल एम. आईयूएमएल और एआईएमआईएम शामिल नहीं हुई। इन सभी पार्टियों ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया। दरअसल मंच पर अधीररंजन चौधरी और मल्लिकार्जुन खडगे के बैठने की वयवस्था की गई थी लेकिन वे शामिल नहीं हुए।

इससे ओम बिडला खासे नाराज नजर आये। उन्होंने कहा कि मेरी शिकायत ये है कि प्रेस में जाने से पहले मुझे बात करते तो अच्छा रहता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जो भी मुद्दा उठाना चाहती है, नियम के तहत उठा सकती है। जनप्रतिनिधि होने के नाते यह हमारा दायित्व है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में मर्यादित और गरिमापूर्ण आचरण करें। संसद की मर्यादाओं और उच्च गरिमापूर्ण परम्पराओं को कायम रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।’’ बिरला ने कहा कि हमें अच्छी परम्पराओं और परिपाटियों को और सशक्त करना चाहिए।

वहीं दूसरी तरफ पीएम मोदी ने भी अपने संबोधन के दौरान बिना नाम लिए हुए विपक्ष पर खूब बरसे। पीएम मोदी ने कहा कि जब मैं सदन में 2015 में बोल रहा था, तब भी… विरोध आज नहीं हो रहा है, उस दिन भी हुआ था। यह 26 नवंबर कहां से ले आए। क्यों कर रहे हो। क्या जरूरत थी। बाबा साहब आंबेडकर का नाम और आपने मन में यह भाव उठे, देश यह सुनने के लिए तैयार नहीं है। अब भी बड़ा दिल रखकर खुले मन से बाबा साहब का पुण्य स्मरण के लिए तैयार न होना, चिंता का विषय है।

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