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Lancet Study: कम उम विवाह बन रहा आत्महत्या का कारण, अवसाद से गुजर रहीं लड़कियां, रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Lancet Study: द लैंसेट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश और बिहार में कम उम्र में लड़कियों का विवाह आज  भी हो रहा है। समय से पहले विवाह होने की वजह से किशोरियां  मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां परेशानियों का शिकार हो रही हैं

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नई दिल्ली। भले ही देश विकास की राह पर है लेकिन कई जगहों पर आज भी बाल विवाह किया जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में आज भी लड़कियों का कम उम्र में विवाह कर दिया जाता है लेकिन अब इन चीजों के साइड इफेक्ट सामने आ रहे है। लड़कियां छोटी उम्र में मानसिक परेशानी से गुजर रही हैं। वो डिप्रेशन का शिकार हो रही हैं जिसकी वजह से आत्महत्या के केस बढ़ रहे हैं। इस बात का खुलासा द लैंसेट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में किया गया है। रिपोर्ट काफी चौंकाने वाली हैं।

अध्ययन देख उड़ जाएंगे होश

द लैंसेट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश और बिहार में कम उम्र में लड़कियों का विवाह आज भी हो रहा है। समय से पहले विवाह होने की वजह से किशोरियां मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां परेशानियों का शिकार हो रही हैं। ऐसे में आत्महत्या के केस बढ़ रहे हैं। इस अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ कि जिन किशोरियों के मन में आत्महत्या का विचार या आत्महत्या करने की कोशिश की, उनका विवाह पहले जो चुका था और वो कम उम्र में ही अवसाद से गुजर रही थीं। जबकि उन्हीं के सेम एज ग्रुप की लड़कियां जिनका विवाह नहीं हुआ था, वो किसी तरह के अवसाद से ग्रसित नहीं थी और बहुत कम लड़कियों के अंदर आत्महत्या जैसी चीज का विचार आया।

क्या है भारत की स्थिति

आज भी भारत में बाल विवाह का अंश मौजूद है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 8 फीसदी लड़कियों की शादी 15 साल की उम्र से पहले कर  दी जाती है। वही 16 फीसदी लड़कियों की शादी 15-19 साल तक कर दी जाती है।चिंता की बात ये है कि एक-तिहाई लड़कियों की शादी 18 साल तक की उम्र में की जाती है। ये चौंकाने वाला अध्ययन ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न स्थित किशोर स्वास्थ्य केंद्र ने पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर किया है।

 

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