भारत में 40 में से केवल एक व्यक्ति का मानना, देश के विकास से उसे व्यक्तिगत लाभ नहीं

सीवोटर द्वारा यह सर्वेक्षण दिल्ली स्थित एनजीओ जेंडर मेनस्ट्रीमिंग रिसर्च एसोसिएशन (जीएमआरए) के साथ मिलकर किया गया। इसे भारत में एक व्यापक खुशी सूचकांक (हैप्पीनेस इंडेक्स) विकसित करने के प्रयास के तहत किया गया।

Written by: July 6, 2020 9:41 pm

नई दिल्ली। अधिकांश भारतीयों का मानना है कि जैसे-जैसे देश की प्रगति होती है, वैसे ही उनका जीवन भी सुधरता है। भारतीयों में उनकी खुशी का आकलन करने के लिए किए गए एक सर्वेक्षण में शामिल लगभग सभी लोगों ने सहमति व्यक्त की कि देश के विकास ने उनेक व्यक्तिगत जीवन को भी बेहतर किया है। आईएएनएस-सीवोटर एवं जीएमआरए हैप्पीनेस इंडेक्स ट्रैकर में लोगों से सवाल पूछा गया कि देश का समग्र विकास लोगों की खुशी को कैसे प्रभावित करता है। इस पर अधिकांश भारतीय इस कथन से बहुत ²ढ़ता से सहमत दिखे कि देश का समग्र विकास उनकी व्यक्तिगत सुख-सुविधा या उनकी भलाई को भी बढ़ाता है। कुल 82.5 प्रतिशत लोगों ने इस पर ²ढ़ता से अपनी सहमति जताई, वहीं 8.1 प्रतिशत लोग इस बात से कुछ हद तक सहमत दिखे।

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सर्वे में शामिल लोगों से सवाल पूछा गया, क्या आपको लगता है कि देश का समग्र विकास आपकी सुख-सुविधा और भलाई को बढ़ाता है। इस सर्वे में शामिल सभी उत्तरदाताओं में से केवल 2.3 प्रतिशत ने ²ढ़ता के साथ इस बात से अपनी असहमति जताई। वहीं 0.3 प्रतिशत कुछ हद तक असहमत दिखे। यह प्रवृत्ति धार्मिक, लिंग, ग्रामीण एवं शहरी पृष्ठभूमि से आने वाले विभिन्न वर्गों के लोगों में समान रूप से देखने को मिली। उच्च शिक्षा प्राप्त 91.6 प्रतिशत से अधिक लोग इस कथन से ²ढ़ता से सहमत थे, जबकि निम्न शैक्षिक स्तर वाले केवल 77.7 प्रतिशत लोगों ने मजबूती से इस बात से सहमति जताई।

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इसी तरह की प्रवृत्ति विभिन्न आय वर्ग के लोगों में भी देखने को मिली। निम्न आय वर्ग में केवल 75 प्रतिशत जबकि उच्च आय वर्ग के 86.3 प्रतिशत लोगों ने इस पर ²ढ़ता से सहमति व्यक्त की।

आयु वर्ग के हिसाब से देखा जाए तो सर्वे में शामिल 71.4 प्रतिशत वृद्ध लोग (60 वर्ष और उससे अधिक) ²ढ़ता से सहमत थे, जबकि फ्रेशर्स (25 वर्ष से कम) के बीच 82.7 प्रतिशत ने ²ढ़ता से अपनी सहमति जताई। क्षेत्रों के हिसाब से देखा जाए तो सर्वे में शामिल दक्षिण के 61.1 प्रतिशत और उत्तरी क्षेत्र के 88 प्रतिशत लोगों ने ²ढ़ता से इस कथन का समर्थन किया।

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धार्मिक समूहों के बीच 96.9 प्रतिशत सिख इस कथन के साथ मजबूती से खड़े दिखाई दिए, जबकि ईसाइयों के बीच 59.0 प्रतिशत लोगों ने ही इस बात पर अपनी सहमति जताई। सर्वेक्षण के माध्यम से पता चला कि केवल मुट्ठी भर लोग ही हैं, जो सोचते हैं कि देश के समग्र विकास से उन्हें व्यक्तिगत रूप से लाभ नहीं होगा।

सीवोटर द्वारा यह सर्वेक्षण दिल्ली स्थित एनजीओ जेंडर मेनस्ट्रीमिंग रिसर्च एसोसिएशन (जीएमआरए) के साथ मिलकर किया गया। इसे भारत में एक व्यापक खुशी सूचकांक (हैप्पीनेस इंडेक्स) विकसित करने के प्रयास के तहत किया गया।