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पीएम मोदी ने बताया, किसने भारतीय महिलाओं को उल्टे पल्लू की साड़ी पहनना सिखाया, आप भी जानिए…

West Bengal: गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पश्चिम बंगाल (West Bengal) के शांतिनिकेतन (Shantiniketan) में विश्व-भारती विश्वविद्यालय (VisvaBharati University) के शताब्दी समारोह को संबोधित किया हैं।

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नई दिल्ली। गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पश्चिम बंगाल (West Bengal) के शांतिनिकेतन (Shantiniketan) में विश्व-भारती विश्वविद्यालय (VisvaBharati University) के शताब्दी समारोह को संबोधित किया हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि विश्वविभारती के 100 वर्ष होना प्रत्येक भारतीय के गौरव की बात है। मेरी लिए भी ये सौभाग्य की बात है कि आज के दिन इस तपोभूमि का पुण्य स्मरण करने का अवसर मिल रहा है। वहीं इस समारोह में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी मौजूद रहे। बता दें कि साल 1921 में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित, विश्वभारती देश का सबसे पुराना केंद्रीय विश्वविद्यालय भी है।

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इस दौरान पीएम मोदी ने रोचक जानकारी देते हुए बताया कि आखिर महिलाओं को किसने उल्टे पल्लू की साड़ी पहनना सिखाया या कब से महिलएं उल्टे पल्लू का प्रयोग करने लगीं। पीएम मोदी ने कहा कि, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore) के बड़े भाई और देश के पहले आईसीएस अफसर सत्येंद्रनाथ टैगोर की पत्नी ज्ञानंदिनी देवी ने बताया था। उन्होंने ही बाएं कंधे पर महिलाओं को साड़ी का पल्लू बांधना सिखाया।

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पीएम मोदी ने कहा, गुरुदेव रवींद्रनाथ के बड़े भाई सत्येंद्रनाथ की आईसीएस अफसर के रूप में नियुक्ति गुजरात के अहमदाबाद में हुई थी। सत्येंद्रनाथ की पत्नी ज्ञानंदिनी जी अहमदाबाद में रहतीं थीं। स्थानीय महिलाएं दाहिने कंधे पर पल्लू रखतीं थी, जिससे महिलाओं को काम करने में परेशानी होती थी। ज्ञानंदिनी देवी ने आइडिया निकाला- क्यों न पल्लू बाएं कंधे पर लिया जाए।

पीएम मोदी ने कहा, अब मुझे ठीक-ठीक तो नहीं पता लेकिन कहते हैं- बाएं कंधे पर साड़ी का पल्लू उन्हीं (ज्ञानंदिनी देवी) की देन है। वीमेन इंपावरमेंट से जुड़े संगठनों को इस बात का अध्ययन करना चाहिए।

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