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कोरोना काल में घर लौटने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए “योगी मॉडल” को मिली सुप्रीम कोर्ट की सराहना

Yogi Model for Corona Pandemic: कोर्ट ने अपने फैसले में यूपी में कोविड के दौरान घर वापसी करने वाले श्रमिकों की व्यवस्था के लिए योगी सरकार द्वारा किए गए प्रयोसों को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से सराहना मिली है।

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Yogi Supreme court

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते लगे लॉकडाउन के बीच कई प्रवासी मजदूर अपने गांव लौटने को मजबूर हुए थे। इस हालत में उनके पास रोजगार से लेकर तमाम तरह की बेसिक सुविधाओं का अभाव हो गया था। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रवासी मजदूरों के लिए जो इंतजाम किए, उसकी चर्चा आज भी हो रही है। बता दें कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना और लॉकडाउन के चलते आर्थिक संकट झेल रहे प्रवासी मजदूरों को राहत के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए योगी मॉडल को सराहा। इसको लेकर दायर की गई एक याचिका पर जज अशोक भूषण और जज एमआर शाह की पीठ ने 11 जून को एक्टविस्ट अंजलि भारद्वाज, हर्ष मंदर और जगदीप छोकर की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार द्वारा प्रवासी मजदूरों के लिए जो कदम उठाए गए, उसकी सराहना की।

Supreme court

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि, यूपी ने राज्य में ऐसे प्रवासी कामगारों के पंजीकरण की एक मजबूत प्रणाली बनाई जोकि उनके राज्य में आने को लेकर है। इस बारे में दिनांक 22 मई 2021 को दिए गए हलफनामे में विस्तृत किया गया है। रिलीफ कमिश्नर की वेबसाइट http://www.rahat.up.nic.in पर एक पोर्टल बनाया गया है, जिस पर सभी प्रवासी श्रमिकों के जुड़ी सभी जानकारी उनसे जुड़े वास्तविक समय में अपलोड की गई।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि, उत्तर प्रदेश के प्रशिक्षण और रोजगार निदेशक के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पूरे कोविड -19 महामारी की अवधि के दौरान 37,84,255 प्रवासी श्रमिक अपने मूल स्थानों पर लौट आए हैं। उनकी स्किल मैपिंग का काम पूरा हो चुका है और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों की विभिन्न योजनाओं में 10,44,710 मजदूरों को पहले ही रोजगार दिया जा चुका है।

कोर्ट ने पेश किए आंकड़ों पर कहा कि 8 जून 2021 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 3,79,220 प्रवासी श्रमिकों का विवरण/डेटा पंजीकृत किया गया है और उनके कौशल को  1अप्रैल 2021 से पोर्टल rahat.up.nic.in पर मैप किया गया है। आगे यह भी प्रस्तुत किया जाता है कि सभी पात्र व्यक्तियों को निर्वाह भत्ता प्रदान करने के लिए राज्य मंत्रिमंडल द्वारा 15 मई 2021 को लिए गए फैसले का लाभ उठाने के लिए पंजीकृत श्रमिकों के अलावा अन्य श्रमिकों की पहचान करने के लिए भी rahat.up.nic.in पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। और उन्हें हर महीने 1000 रुपये हर महीने सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर किया जा रहा है। ऐसे लाभार्थियों के पंजीकरण के लिए rahat.up.nic.in पोर्टल का उपयोग किया गया। 8 जून 2021 तक ऐसे 12,92,247 व्यक्तियों का डाटा/विवरण राहत पोर्टल पर 18 मई 2021 से अपलोड किया गया है।

बता दें कोर्ट ने अपने फैसले में यूपी में कोविड के दौरान घर वापसी करने वाले श्रमिकों की व्यवस्था के लिए योगी सरकार द्वारा किए गए प्रयासों को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से सराहना मिली है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार द्वारा श्रमिकों के पंजीकरण से लेकर स्किल मैपिंग तक के कार्यों को सुप्रीम कोर्ट ने काफी अहम माना है।

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