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Prashant Kishor: कांग्रेस को गच्चा देने के बाद चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का ये है फ्यूचर प्लान

Prashant Kishor: प्रशांत किशोर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो सकते हैं। इसके लिए उन्होंने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात भी की थी, लेकिन उनकी शर्तों को कांग्रेस ने अस्वीकार कर दिया। अब प्रशांत किशोर को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि वो अपनी नई पार्टी बना सकते हैं, लेकिन प्रशांत किशोर ने प्रेस कांफ्रेंस करके इन अटकलों पर विराम लगा दिया है।

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Prashant Kishor

नई दिल्ली। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस पिछले कुछ सालों से राजनीति के सबसे बुरे समय से गुजर रही है। इसके पीछे बहुत सारी वजह हैं, लेकिन पार्टी को किसी दमदार चेहरे का नेतृत्व ना मिल पाना इस पार्टी को दिन-प्रतिदिन कमजोर बना रहा है। विपक्ष भी कई बार कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाता है, जो कि कई मायनों में कांग्रेस की दुर्दशा को भी दर्शाता है। पिछले कई दिनों एक बार फिर कांग्रेस में शीर्ष नेतृत्व को लेकर उठापठक का दौर जारी है। वर्तमान में कांग्रेस और प्रशांत किशोर की चर्चाओं से राजनीतिक बाजार गर्म है। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि प्रशांत किशोर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो सकते हैं। इसके लिए उन्होंने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात भी की थी, लेकिन उनकी शर्तों को कांग्रेस ने अस्वीकार कर दिया। अब प्रशांत किशोर को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि वो अपनी नई पार्टी बना सकते हैं, लेकिन प्रशांत किशोर ने प्रेस कांफ्रेंस करके इन अटकलों पर विराम लगा दिया है।

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प्रशांत किशोर की मुख्य बातें

प्रशांत किशोर ने आज यानी गुरुवार को प्रेस-कांफ्रेंस करके कई अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने अपने मीडिया संबोधन में कहा कि वे अभी कोई भी नई पार्टी नहीं बनाने जा रहे हैं। अभी उनका फोकस बिहार के सामाजिक और राजनीतिक जीवन से जुड़े लोगों से मिलने का है। इसके साथ ही प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में उन्होंने 15 से 18 हजार ऐसे लोगों की पहचान की है, जो सामाजिक और राजनीतिक जीवन से जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में वो इन लोगों से घर-घर मिलने जाएंगे और इन सबकों एक साथ जोड़ने का प्रयास करेंगे।

प्रशांत किशोर अपनी योजनाओं पर चर्चा करने के साथ-साथ बिहार के दो पुरानी पार्टियों के दिग्गज नेता लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार को भी आड़े हाथों लिया। इन दोनों नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि, 30 साल के लालू और नीतीश के राज के बाद भी बिहार देश का सबसे गरीब और पिछड़ा राज्य है। विकास के कई मानकों पर भी आज बिहार अपने निचले स्तर पर चल रहा है। बिहार अगर आने वाले समय में अग्रणी राज्यों की सूची में आना चाहता है तो इसके लिए नई सोच और नए प्रयास की जरूरत है।

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