
लखनऊ। यूपी में मदरसों के सर्वे कराने के बाद अब सीएम योगी आदित्यनाथ ने इनके आय का स्रोत जानने के निर्देश दिए हैं। मदरसों ने सर्वे के दौरान बताया था कि उनको जकात के जरिए धन मिलता है। जकात का मतलब मुस्लिमों की तरफ से दिया गया दान है। मदरसों ने बताया है कि कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, मुंबई, हैदराबाद के अलावा सऊदी अरब और नेपाल में बसे मुस्लिम भी उन्हें दान देते हैं। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री धर्मपाल सिंह ने ये जानकारी दी। मदरसों की फंडिंग की जांच सरकार इसलिए करा रही है, ताकि पता चले कि किन्हीं देशविरोधी ताकतों का हाथ तो इसमें नहीं है।
मंत्री धर्मपाल सिंह ने इस बारे में विभागीय अफसरों के साथ बैठक भी की। गैर मान्यता वाले मदरसों पर की जाने वाली कार्रवाई पर भी चर्चा हुई। पता ये चला है कि नेपाल की सीमा से लगे सिद्धार्थनगर में 500, बलरामपुर में 400, लखीमपुर खीरी में 200, महराजगंज में 60 के अलावा बहराइच और श्रावस्ती में 400 से ज्यादा मदरसे बिना मान्यता के चल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इन मदरसों में से तमाम पिछले दो दशक में तैयार हुए हैं। इसी वजह से इनकी गहनता से जांच हो रही है।
बिना मान्यता वाले मदरसों की बात करें, तो यूपी के 75 जिलों में 8496 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त मिले हैं। यहां तक कि दुनियाभर में मशहूर दारुल उलूम मदरसा भी गैर मान्यता प्राप्त में शामिल है। नेपाल से लगे यूपी के इलाकों में बड़ी तादाद में फल-फूल रहे मदरसों के बारे में खुफिया एजेंसियों ने भी आशंका जताई थी। ऐसे में इन इलाकों के मदरसों पर सरकार की खास नजरें हैं। योगी सरकार ने पहले कहा था कि वो मदरसों के पाठ्यक्रम और छात्रों की तादाद के अलावा फंडिंग के बारे में जानना चाहती है। ताकि इन मदरसों और उनमें पढ़ने वालों की हालत में सुधार लाया जा सके। साथ ही छात्रों को आधुनिक शिक्षा भी इन मदरसों से मिल सके।