Connect with us

लाइफस्टाइल

वट सावित्री व्रत 2020 : जानें इस दिन क्यों सभी सुहागन 16 श्रृंगार और बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं?

हर साल ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या के दिन वट सावित्री का व्रत किया जाता है। ये व्रत पति की लम्बी उम्र के लिए किया जाता है। इस बार ये व्रत 22 मई, शुक्रवार को पड़ रहा हैं। हम आज आपको इस व्रत का महत्त्व और इसके पीछे की कहानी बताएंगे। साथ ही ये भी बताएंगे कि इस दिन सभी सुहागन 16 श्रृंगार और बरगद के पेड़ की पूजा क्यों करती हैं।

Published

नई दिल्ली। हर साल ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या के दिन वट सावित्री का व्रत किया जाता है। ये व्रत पति की लम्बी उम्र के लिए किया जाता है। इस बार ये व्रत 22 मई, शुक्रवार को पड़ रहा हैं। हम आज आपको इस व्रत का महत्त्व और इसके पीछे की कहानी बताएंगे। साथ ही ये भी बताएंगे कि इस दिन सभी सुहागन 16 श्रृंगार और बरगद के पेड़ की पूजा क्यों करती हैं।

vat savitri

 

वट सावित्री व्रत की कहानी

पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन ही सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और श्रद्धा से यमराज द्वारा अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। ऐसी मान्यता चली आ रही है कि जो स्त्री सावित्री के समान यह व्रत करती है उसके पति पर भी आनेवाले सभी संकट इस पूजन से दूर होते हैं। इसके अलावा शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि इस दिन शनिदेव का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन वट और पीपल की पूजा कर शनिदेव को प्रसन्न किया जाता है।

वट सावित्री व्रत के दिन सभी सुहागन महिलाएं पूरे 16 श्रृंगार करके बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। ऐसा पति की लंबी आयु की कामना के लिए किया जाता है। इस व्रत के परिणामस्वरूप सुखद और संपन्न दांपत्य जीवन का वरदान प्राप्त होता है। ऐसे वट सावित्री का व्रत समस्त परिवार की सुख-संपन्नता के लिए भी किया जाता है। दरअसल सावित्री ने यमराज से न केवल अपने पति के प्राण वापस पाए थे, बल्कि उन्होंने समस्त परिवार के कल्याण का वर भी प्राप्त किया था।

महत्त्व और पूजा विधि

इस दिन महिलाएं सुबह उठकर नित्यकर्म से निवृत होने के बाद स्नान आदि कर शुद्ध हो जाएं। फिर नए वस्त्र पहनकर सोलह श्रृंगार करें। इसके बाद पूजन की सारी सामग्री को एक टोकरी, प्लेट या डलिया में सही से रख लें। फिर वट (बरगद) वृक्ष के नीचे सफाई करने के बाद वहां सभी सामग्री रखने के बाद स्थान ग्रहण करें। इसके बाद सबसे पहले सत्यवान और सावित्री की मूर्ति को वहां स्थापित करें। फिर अन्य सामग्री जैसे धूप, दीप, रोली, भिगोएं चने, सिंदूर आदि से पूजन करें।

vat savitri 2

इसके बाद लाल कपड़ा अर्पित करें और फल समर्पित करें। फिर बांस के पंखे से सावित्री-सत्यवान को हवा करें और बरगद के एक पत्ते को अपने बालों में लगाएं। इसके बाद धागे को पेड़ में लपेटते हुए जितना संभव हो सके 5,11, 21, 51 या 108 बार बरगद के पेड़ की परिक्रमा करें। अंत में सावित्री-सत्यवान की कथा पंडितजी से सुनने के बाद उन्हें यथासंभव दक्षिणा दें या कथा खुद भी पढ़ सकती हैं। इसके बाद घर आकर उसी पंखें से अपने पति को हवा करें और उनका आशीर्वाद लें। फिर प्रसाद में चढ़े फल आदि ग्रहण करने के बाद शाम के वक्त मीठा भोजन करें।

Advertisement
Advertisement
Advertisement