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खेल

75th Independence Day: CWG 2022 में इन खिलाड़ियों ने देश की झोली में मेडल डालकर कुछ इस तरह से खास बना दिया ‘आजादी का अमृत महोत्सव’

CWG 2022: राष्ट्रमंडल खेलों से पहले देश के पीएम नरेंद्र मोदी ने खिलाड़ियों से रुबरू होकर उन्हें प्रोतसाहित करते हुए कहा था कि ‘क्यों पड़े हो चक्कर में, कोई नहीं है ट्क्कर में’। पीएम मोदी के इसी मंत्र को अपने खेल का हिस्सा बनाकर कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारतीय दल के खिलाड़ियों ने विरोधियों को खेल के मैदान में धूल चटाकर और देश का नाम मेडल लाकर हम सब को जश्न बनाने का मौका दिया।

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CWG 2022 INDIAN PLAYER

नई दिल्ली। हिंदुस्तानी इस साल बड़ी ही शान से देश की आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। इस वर्ष समूचे देश में भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने पर लोगों में हर्षोंउल्लास का माहौल देखा जा रहा है। वैसे तो इस देश को कई बार ऐसे मौके मिले हैं, जब हिंदुस्तान ने गर्व के पलों की अनुभूती की है। लेकिन, इस बार संपन्न हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करके भारतीय खिलाड़ियों ने 75वें साल की आजादी के जश्न को और ज्यादा खास बना दिया। राष्ट्रमंडल खेलों से पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने खिलाड़ियों से रूबरू होकर उन्हें प्रोतसाहित करते हुए कहा था कि ‘क्यों पड़े हो चक्कर में, कोई नहीं है ट्क्कर में’। पीएम मोदी के इसी मंत्र को अपने खेल का हिस्सा बनाकर कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारतीय दल के खिलाड़ियों ने विरोधियों को खेल के मैदान में धूल चटाकर और देश का नाम मेडल लाकर हम सब को जश्न बनाने का मौका दिया।

मीराबाई चानू ने की मेडल की शुरुआत

इसी साल इंग्लैंड के बर्मिंघम में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों में एक तरफ जहां हिंदुस्तान की शेरनी मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग में देश को पहला गोल्ड मेडल दिलाया, तो वहीं हॉकी टीम ने सिल्वर मेडल को अपने नाम कर इस सफर को विराम दिया। भारत की बेटी मीराबाई चानू के कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला मेडल जीतने के बाद बचे हुए अन्य खिलाड़ियों ने भी देश की झोली में एक के बाद एक मेडल डाले। इस बार हिंदुस्तान के कॉमनवेल्थ गेम्स की अंक तालिका में चौथे स्थान पर रहा और भारत ने इस दौरान 61 पदक हासिल किए। इनमें 22 गोल्ड मेडल, 16 सिल्वर और 23 ब्रॉन्ज मेडल शामिल थे। भारत की झोली में आए ये 61 मेडल खेल के अलग-अलग प्रारूपों में मिले। इसमें से 12 मेजल कुश्ती में, 10 वेटलिफ्टिंग में, एथलेटिक्स में 8, मुक्केबाजी में 7, टेबल टेनिस में 7, बैडमिंटन में 6, जूडो में 3, हॉकी में 2, लॉन बॉल में 2, क्क्वैश में 2, पॉवर पैरालिफ्टिंग में 1 और महिला क्रिकेट में 1 मेडल भारत को मिला। इस दौरान भारतीय खिलाड़ी कई मौके पर इतिहास रचते हुए नजर आए और ऐसे में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक सभी देशवासियों ने इनका हौंसला बढ़ाया।

MEERABAI CHANOO

इन खेलों में पहली बार भारत ने हासिल किया मेडल

वैसे तो 61 मेडल लाने वाले सभी खिलाड़ियों ने देश के लोगों को खुश किया, लेकिन कुछ खेलों में तो भारतीय सूरमाओं ने ऐसा कमाल किया कि उसके बाद हर जुबान पर उनका नाम लिया जाने लगा। इस बार का कॉमनवेल्थ गेम्स भारत के लिहाज से इसलिए भी खास बना, क्योंकि एक तरफ कुछ खेल ऐसे थे, जिन्हें पहली बार शामिल किया गया था और कुछ ऐसे कि जहां भारत ने इससे पहले कोई मेडल हासिल नहीं किया था, लेकिन इस बार पहली बार मेडल जीतकर देश को गोरवान्वित किया। इसी कड़ी में सबसे पहले हम महिला क्रिकेट की बात कर लेते हैं। जी हां, इस साल पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला क्रिकेट को शामिल किया गया था और इसी मौके में भारत ने इतिहास रच दिया। भारत की इन महिला विरांगनाओं ने हरमनप्रीत कौर की कमान में क्रिकेट मैच में सिल्वर मेडल दिलाया। इससे पहले हिंदुस्तानी महिलाओं की चौकड़ी ने लॉन बॉल में गोल्ड मेडल हासिल कर पूरी दुनिया को भारतीय नारी शक्ति का एहसास करवाया। महिला क्रिकेट और लॉन बॉल में भारत की इस महिला फौज ने अपना भरपूर दम दिखाकर देश की अंक तालिका में पदक बढ़ाने का काम किया। ये पदक भारत की झोली में किसी हीरे से ज्यादा चमकदार थे।


ट्रीपल जंप में पहली बार जीता गोल्ड

आज तक भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में ट्रिपल जंप में कभी भी मेडल हासिल नहीं किया था। लेकिन इस बार भारत के लाल एल्धोस पॉल ने खेल के इस प्रारूप में गोल्ड मेडल हासिल कर अपना लोहा मनवाया। ट्रिपल जंप में एक तरफ जहां पॉल ने गोल्ड जीता तो वहीं, दूसरी तरफ अब्दुल्ला अबूबकर ने दूसरे नंबर पर अपना स्थान बनाकर  देश को सिल्वर मेडल दिलाया था। ये उपलब्धि कोई आम नहींं, बल्कि एक खास उपल्ब्धि थी।

अंचता शरत कमल बने देश के रियल हीरो

इस बार भारत के लिए राष्ट्रमंडल खेल को भारत के लिए यादगार बनाने में भारत के दिग्गज टेबल टेनिस खिलाड़ी अंचता शरत कमल ने कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने अपने दमदार खेल से एक बार फिर से इस बात को साबित कर दिया कि उम्र मजह एक आंकड़ा है। अगर कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो उम्र किसा इंसान के लिए बहाना नहीं हो सकती। ठीक इसी लाइन को चरितार्थ करते हुए अंचता शरत कमल ने 40 साल की उम्र में वो कारनामा कर दिखाया जिसका देश को बीते 16 सालों से इंतजार था। शरत कमल ने राष्ट्रमंडल खेलों में टेबल टेनिस के पुरुष एकल मैच में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। ये गोल्ड इसलिए भी खास हो गया क्योंकि एक डेढ़ दशक पहले भी इसी खेल में अंचता ने ही देश को गोल्ड मेडल दिलवाया था। 2006 में मेलबर्न में खेले गए कॉमनवेल्थ गेम्स में तब अंचता ने फाइनल मुकाबले के दौरान ऑस्ट्रेलिया के विलियम हेनजेल को मात देकर सोने का तमगा जीता था। इसके 16 बाद एक बार फिर से इसी खिलाड़ी ने देश को गोल्ड दिलवाया।

इसके अलावा युवा वेटलिफ्टर जेरेमी लालरिनुंगा, बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक, रवि कुमार दहिया, निकहत जरीन, पीवी सिंधु, अमित पंघल और 20 साल के नौजवान बैडमिंटन स्टार लक्ष्य सेन जैसे खिलाड़ियों ने देश के खाते में मेडल डालकर इस साल देश होने जा रहे आजादी के अमृत महोत्सव समारोह में चार चांद लगा दिए।

 

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