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What is XPoSAT Mission : नए साल पर ISRO का पहला कमाल, 1 जनवरी को दुनिया देखेगी XPoSAT की ताकत…

इस मिशन के जरिए ISRO ब्लैक होल और न्यूट्रॉन स्टार्स पर भी स्टडी करेगा । ये भारत की स्पेस जर्नी में एक मील का पत्थर साबित होने वाला है । एक और बड़ी खास बात ये है कि ये मिशन न केवल भारत का पहला डेडिकेटेड पोलारिमेट्री मिशन है, बल्कि 2021 में लॉन्च किए गए नासा के इमेजिंग एक्स-रे पोलारिमेट्री एक्सप्लोरर के बाद इस तरह का दुनिया का दूसरा मिशन है ।

1 जनवरी को हमारी अंतरिक्ष एजेंसी ISRO साल के पहले दिन ही कमाल करने वाली है । चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने से लेकर सूर्य मिशन आदित्य एल-1 लॉन्च करने तक तमाम सफल मिशन्स को अंजाम देने के बाद 1 जनवरी को ISRO PSLV-C58-XPoSat मिशन लॉन्च करने को तैयार है । XPoSat का पूरा नाम एक्स-रे पोलरिमेट्री सैटेलाइट है । ये भारत का पहला डेडिकेटेड पोलारिमेट्री मिशन है । ISRO के मुताबिक XPoSat मिशन पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल का इस्तेमाल करके सुबह 9 बजकर 10 मिनट पर लॉन्च होगा । इस मिशन के जरिए ISRO ब्लैक होल और न्यूट्रॉन स्टार्स पर भी स्टडी करेगा । ये भारत की स्पेस जर्नी में एक मील का पत्थर साबित होने वाला है । एक और बड़ी खास बात ये है कि ये मिशन न केवल भारत का पहला डेडिकेटेड पोलारिमेट्री मिशन है, बल्कि 2021 में लॉन्च किए गए नासा के इमेजिंग एक्स-रे पोलारिमेट्री एक्सप्लोरर के बाद इस तरह का दुनिया का दूसरा मिशन है । इस सैटेलाइट में दो मेन पेलोड होंगे जिनमें से एक बेंगलुरु स्थित रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट ने विकसित किया है और दूसरा इसरो के यूआर राव सैटेलाइट सेंटर ने विकसित किया है । स्पेस में XPoSat सबसे चमकीले तारों को टारगेट करके उनकी स्टडी करेगा । इसके अलावा यह न्यूट्रॉन स्टार्स, पल्सर, ब्लैक होल एक्स-रे बायनरिज, एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लि और नॉन-थर्मल सुपरनोवा के बारे में भी जानकारी इकट्ठा करेगा । इस मिशन के जरिए इसरो 5 सालों तक डेटा इकट्ठा करता रहेगा । अंतरिक्ष में एक्स-रे पोलारिमेट्री कैसे काम करता है इसका अध्ययन करके, खगोलविद नए रहस्य को सुलझा सकते हैं कि लाइट कहां से आ रही है ।