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Swaminarayan Akshardham Mandir New Jersey: BAPS स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर में कलश पूजन, वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ आयोजन

Swaminarayan Akshardham Mandir New Jersey: बीएपीएस स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर का निर्माण का विशेष धार्मिक महत्व है। न्यूजर्सी में जब कलश पूजन किया गया तब भारी तदाद में श्रद्धालु पहुंचे थे। जिसका अंदाजा फोटो देखकर लगाया जा सकता है। अक्षरधाम के निर्माण में सामूहिक रूप से योगदान देने वाले सेवकों के लिए ये मौका बेहद ही खास था।

नई दिल्ली। अमेरिका के न्यूजर्सी रॉबिंसविले में बीएपीएस स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद बीएपीएस स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर में कलश को पवित्र करने का पूजन किया गया। आध्यात्मिक माहौल में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कुल 18 कलशों की प्राण प्रतिष्ठा की गई। आयोजन में मुख्य रूप से बीएपीएस के अध्यात्मिक प्रमुख परम पावन मंहत स्वामी महाराज भी शामिल हुए। इस कलाश यात्रा में शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे थे। इसके साथ ही कलाश पूजन में शामिल होने आए लोगों ने मंदिर की विधि विधान से परिक्रमा की और पूजा अर्चना भी की। न्यूजर्सी रॉबिंसविले में साल 2011 में स्वामी जी महाराज द्वारा औपचारिक रूप से निधि कलश की स्थापना की गई थी। जो कि 12 साल की अथक मेहनत और भक्तों के कठिन प्रयासों से सफल हुई।

करीब 3.5 मिलियन घंटे के श्रमदान से ये मंदिर बनाकर तैयार हुआ है जिन स्वयंसेवकों ने मंदिर निर्माण में योगदान दिया। उनके ये मौका सबसे खास था। बीएपीएस स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर का निर्माण का विशेष धार्मिक महत्व है। न्यूजर्सी में जब कलश पूजन किया गया तब भारी तदाद में श्रद्धालु पहुंचे थे। जिसका अंदाजा फोटो देखकर लगाया जा सकता है। अक्षरधाम के निर्माण में सामूहिक रूप से योगदान देने वाले सेवकों के लिए ये मौका बेहद ही खास था।

इस मौके पर अपने संबोधन में सद्गुरु पूज्य ईश्वरचरणदास स्वामी ने बताया कि, “कलश को महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसके स्थापित होने पर शिखर पूर्ण हो जाता है। जब यह शिखर को सुशोभित करता है, तो इसकी अंतर्निहित सुंदरता निखरती है और यह हमें गहन आनंद से भर देती है।” उन्होंने स्वयंसेवकों की निस्वार्थ सेवा पर जोर देते हुए कहा, “पूरे उत्तरी अमेरिका से भक्त भक्ति और विश्वास के साथ दिन-रात स्वैच्छिक सेवा में एक साथ आए।”

परम पावन महंत स्वामी महाराज ने गहन ज्ञान के साथ बताया कि, “सभी प्रयासों की दिव्य परिणति अक्षरधाम के ऊपर कलश का प्रतीक है। आज, जब हम रक्षा के दिन रक्षाबंधन के महत्व को मानते हैं, तो याद रखें कि भगवान स्वामीनारायण स्वयं हमारी ढाल के रूप में खड़े हैं।”

हाल ही में एक यात्रा के दौरान आचार्य ईशान शिवानंद ने साझा किया, “जैसे ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं, हमें अपने जीवन में एक केंद्र बिंदु की आवश्यकता होती है। अक्षरधाम एक ऐसा केंद्र बिंदु है जो हमारी आस्था, हमारे लोगों, हमारी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है।”