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ज्योतिष

Vrat & Festival: गंगा दशहरा से निर्जला एकादशी, जानिए जून महीने में कौन-कौन से पड़ रहे व्रत और त्योहार?

Vrat & Festival: ज्येष्ठ मास की ये तिथि बुधवार के दिन पड़ रही है। इस महीने हिंदू धर्म के कई त्योहार मनाए जाएंगे। आइये जानते हैं कौन से हैं ये त्योहार और धार्मिक दृष्टि से इनका क्या महत्व है

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नई दिल्ली। मई का महीना खत्म होने वाला है और जून के महीने की शुरुआत होने वाली है। साथ ही जून के महीने में ही ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि लग रही है, जिसमें दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। ज्येष्ठ मास की ये तिथि बुधवार के दिन पड़ रही है। इस महीने हिंदू धर्म के कई त्योहार मनाए जाएंगे। आइये जानते हैं कौन से हैं ये त्योहार और धार्मिक दृष्टि से इनका क्या महत्व है

रंभा तृतीया व्रत (2 जून, गुरुवार)

ये व्रत ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाएगा। ये शुभ तिथि इस बार 2 जून यानी गुरुवार को पड़ रही है। इसमें सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और संतान की सफलता और प्रगति के लिए इस व्रत को रखती हैं। कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की कामना के लिए रंभा तृतीया का व्रत रखती है। सबसे पहले इस व्रत को अप्सरा रंभा ने सौभाग्य प्राप्ति के लिए किया था। इसलिए इस दिन अप्सरा रंभा की पूजा की जाती है।

श्री गंगा दशहरा (9 जून, गुरुवार)

हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को श्री गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये शुभ तिथि 9 जून यानी गुरुवार को पड़ रही है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर मनुष्यों का उद्धार करने के लिए अवतरित हुई थीं। इसलिए इस तिथि को बहुत सौभाग्यशाली माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से सभी पापों से छुटकारा मिलता है।

निर्जला एकादशी (11 जून, शनिवार)

इसी माह निर्जला एकादशी पड़ रही है। हर साल ज्येष्ठ मास की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस व्रत में पानी पीने की भी मनाही होती है। यही कारण है कि इसे निर्जला एकादशी कहते हैं। भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत को मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि जो लोग साल में साल में पड़ने वाली 24 एकादशी का व्रत नहीं कर पा रहे हैं, तो वो निर्जला एकादशी का व्रत करके सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

संत कबीर जयंती (14 जून, गुरुवार)

हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को संत कबीर जयंती का त्योहार मनाया जाता है। इस बार ये शुभ तिथि 14 जून को पड़ रही है। सन् 1440 में वाराणसी में संत कबीर ने उस दौर में समाज में फैले पाखंड के विरूद्ध आवाज उठाई थी  और लोगों में भक्ति भाव का संचार किया था। इसी वजह से उन्हें प्रथम विद्रोही संत के नाम से भी जाना जाता है।

वट सावित्री व्रत (14 जून, गुरुवार)

ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि को पड़ने वाला वट सावित्री का व्रत भी जून के महीने में पड़ रहा है। हालांकि, कई जगहों पर ये व्रत अमावस्या तिथि पर भी रखा जाता है। इसमें सुहागिन महिलाएं अपने पूरे 16 श्रृंगार के साथ वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करती हैं।

योगिनी एकादशी (24 जून, शुक्रवार)

योगिनी एकादशी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि मनाया जाता है। इस व्रत को करने से मनुष्य को सभी प्रकार के पापों से छुटकारा मिलता है। इस व्रत को पृथ्वी लोक पर भोग और परलोक में मुक्ति दायी माना गया है।

मासिक शिवरात्रि (27 जून, सोमवार)

हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस व्रत को महाशिवरात्रि के बराबर ही फलदायी माना गया है। हर माह पड़ने की वजह से इसे मासिक शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत के बाद भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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