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ज्योतिष

Bhishma Panchak 2022: संतान सुख की प्राप्ति के लिए करें भीष्म पंचक व्रत, जानिए पूजा-विधि और किन बातों का रखना है ख्याल

Bhishma Panchak 2022: पांच दिनों तक चलने वाले इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन में पैसों की दिक्कतें खत्म होती है साथ ही अच्छे स्वास्थ्य का भी वरदान मिलता है। चलिए आपको बताते हैं कैसे करनी है आपको व्रत में पूजा (Bhishma Panchak Vrat 2022 Puja) और किन बातों का रखना है ख्याल…

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Bhishma Panchak 2022

नई दिल्ली। कल यानी 4 नवंबर से भीष्म पंचक की शुरुआत हो रही है जो कि 8 नवंबर तक रहेगा। इसे ‘पंच भीखू’ के नाम से भी जाना जाता है। पंचांग के अनुसार, इस दौरान कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी से भीष्म पंचक व्रत शुरू होता है जो कि कार्तिक पूर्णिमा तक रहता है। ये वर्त (Bhishma Panchak Vrat 2022) काफी सावधानीपूर्वक रखा जाता है। कहते हैं ये ऐसा व्रत होता है जिसे करने से व्यक्ति के सभी पाप खत्म हो जाते हैं। इस वक्त को उन विवाहित जोड़ों को भी करना चाहिए जो कि संतान की चाहत रखते हैं। पांच दिनों तक चलने वाले इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन में पैसों की दिक्कतें खत्म होती है साथ ही अच्छे स्वास्थ्य का भी वरदान मिलता है। चलिए आपको बताते हैं कैसे करनी है आपको व्रत में पूजा (Bhishma Panchak Vrat 2022 Puja) और किन बातों का रखना है ख्याल…

Bhishma Panchak 2022.

भीष्म पंचक में इन बातो का रखें ख्याल

भीष्म पंचक काफी पवित्र माना जाता है। इस दौरान अन्न ग्रहण करने की मनाही होती है। आप इनकी बजाय फल-फूल, दूध-दही का सेवन कर सकते हैं। इस बात का भी खास ख्याल रखें कि जब आप नहाने जाएं तो अपने नहाने के पानी में थोड़ा सा गोक्षरण डाल लें। भीष्म पंचक व्रत के इन पांच दिनों तक आपको गलती से भी बड़े-बुजुर्गों का अनादर नहीं करना है।

Evening Puja Path Rules

ऐसे करें भीष्म पंचक में पूजा (Bhishma Panchak 2022)

  • देवउठनी एकादशी के दिन सूर्य के उदय होने से पहले उठकर स्नान करें
  • अब साफ कपड़ों को धारण करें।
  • अब पूजा की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं।
  • चौकी पर श्रीकृष्ण और पितामह भीष्म की तस्वीर को स्थापित कर उनका ध्यान  करें
  • अब चंदन, फूल, फल, अक्षत, अर्पित करते हुए व्रत का संकल्प लें।

Bhishma Panchak 2022..

  • आपको इस दौरान अखंड ज्योत जलानी है ऐसे में ध्यान रखें कि बत्ती लंबी हो जो कि पूरे पांच दिनों तक चलें।
  • अब अगले पांच दिनों तक आप गीता का पाठ करें।
  • पांचवे दिन यानी कार्तिक पूर्णिमा की तिथि पर हो सके तो पूरे परिवार के साथ हवन करें।
  • इसके बाद ब्राह्मण भोजन कराकर जितना संभव हो उन्हें दक्षिणा दें।
  • बाद में गरीबों को अन्न और कपड़े का दाम करें।
  • इन पांच दिनों में सबसे महत्वपूर्ण चीज जिसका आपको ख्याल रखना है वो ये है कि आपको पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का भी पालन करना चाहिए।
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