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Nityananda Misra: महाभारत से प्रेरणा लेकर आज के समाज को शिक्षित करने का एक अनोखा प्रयास है नित्यानंद मिश्र कृत ‘व्यास कथा महाभारत की नीतिकथाएं’

महाभारत के बारे में तो कहा गया है कि जो इसमें नहीं है, वह कहीं नहीं है। महाभारत का अमूल्य ज्ञान अपार है। विद्वान लोग अपने-अपने हिसाब से इस महाकाव्य की घटनाओं अथवा ज्ञान को प्रस्तुत करते रहते हैं। ऐसा ही एक उत्कृष्ट प्रयास किया है संस्कृत के सुप्रसिद्ध विद्वान एवं लेखक नित्यानंद मिश्र ने। ब्लूम्सबरी इंडिया से प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘व्यास कथा महाभारत की नीतिकथाएं’ महाभारत के व्यवहारिक, राजनैतिक ज्ञान, नैतिक मूल्यों, वैश्विक सत्यों, और दर्शन पर आधारित चुनिंदा इक्यावन नीतिकथाओं का संकलन है।

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नई दिल्ली। ‘यदि हमारी पहचान चली गई तो सब कुछ चला गया’ यह एक बहुत महत्वपूर्ण वाक्य है। किसी भी देश या समाज या व्यक्ति की पहचान या छवि निर्माण में इतिहास की भी भूमिका होती है। रामायण और महाभारत भारत के इतिहास हैं। महाभारत के बारे में तो कहा गया है कि जो इसमें नहीं है, वह कहीं नहीं है। महाभारत का अमूल्य ज्ञान अपार है। विद्वान लोग अपने-अपने हिसाब से इस महाकाव्य की घटनाओं अथवा ज्ञान को प्रस्तुत करते रहते हैं। ऐसा ही एक उत्कृष्ट प्रयास किया है संस्कृत के सुप्रसिद्ध विद्वान एवं लेखक नित्यानंद मिश्र ने। ब्लूम्सबरी इंडिया से प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘व्यास कथा महाभारत की नीतिकथाएं’ महाभारत के व्यवहारिक, राजनैतिक ज्ञान, नैतिक मूल्यों, वैश्विक सत्यों, और दर्शन पर आधारित चुनिंदा इक्यावन नीतिकथाओं का संकलन है। उदाहरण के लिए ब्राह्मण और डोड़हा साँप, कछुआ और हाथी, मेंढ़क-राजकुमारी और उसके बेटे, बिल्ला और चूहा, अनोखा नेवला आदि। इन कथाओं की विशेषता है कि इनके पात्र अन्य जीव जंतु हैं।

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ट्वीट की गति से चलने वाली दुनिया में व्यस्तता के कारण आज लोगों के पास समय का अभाव है। ये भी उतना ही सच है कि लोग पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं लेकिन कई बार संदर्भों या मूल स्रोत का पता न होने के कारण समस्या आती है। प्रामाणिकता को लेकर भी प्रश्न उठते हैं। नित्यानंद मिश्र की 400 पृष्ठों की यह पुस्तक इन सभी विषयों को सम्बोधित करती है। इसमें आवश्यकतानुसार संदर्भ दिए गए हैं और प्रत्येक कथा को चार भागों प्रस्तावना, कथा, उपसंहार और शिक्षा के रूप में प्रस्तुत किया है। यह प्रयास इस पुस्तक को थोड़ा-सा अलग बनाता है क्योंकि इससे पाठक को पता चलता है कि वह कथा क्यों पढ़ रहा है? और इससे उसे क्या सीख मिली।

सामान्य पाठक की बात करें तो उनको पंचतंत्र या हितोपदेश की कथाओं के बारे में जानकारी होती है, लेकिन महाभारत में मनुष्य पात्रों के अतिरिक्त अन्य प्राणियों से जुड़ी कथाओं के बारे में जानकारी नहीं होती। इन कथाओं का उपयोग महाभारत के पात्रों को शिक्षा देने के लिए किया गया था। पुस्तक पढ़ने के बाद यह लिखने में कोई अतिशयोक्ति नहीं कि आज के समय में इनका बहुत बड़ा महत्व है। विशेषकर बच्चों को ये कथाएं बहुत प्रभावित करेंगी। यह पुस्तक उन माता-पिता के लिए बहुत उपयोगी है जो अपने बच्चों को सुलाने के लिए या तो कार्टून दिखाते हैं या फिर परियों की कहानियां सुनाते हैं, बदले में जिनका बच्चों के ऊपर उल्टा प्रभाव पड़ता है। इस पुस्तक में कई जगह कथा-संबंधी चित्र भी दिए गए हैं जो कथाओं को और रोचक बनाते हैं।

लेखक के लिए ‘फीडबैक’ के तौर पर सामान्य पाठक के लिए पुस्तक की भाषा शैली थोड़ी सरल हो सकती थी, कुछ कथाओं में कुछ शब्द ऐसे हैं जिनके लिए यदि फुटनोट्स दिए होते तो संदेश पूर्ण रूप से स्पष्ट जाता। लेकिन यह कहना आवश्यक है कि यह पुस्तक गागर में सागर भरी हुई है जो लोगों को महाभारत के कल्याणकारी ज्ञान से अवगत कराएगी।

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