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Rajiv Gandhi: राजीव गांधी की हत्या के सभी आरोपी होंगे रिहा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

लिहाजा इन सभी को रिहा करने का आदेश दिया जाता है। बता दें कि राजीव गांधी हत्याकांड में शामिल नलिनी, रविचंद्रन, मुरुगन, संथन, जयकुमार, और रॉबर्ट पॉयस को रिहा करने का आदेश दे दिया गया।

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Rajiv Gandhi

नई दिल्ली। राजीव गांधी हत्या मामले में संलिप्त 6 दोषियों को रिहा करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दे दिया है। इससे पूर्व मई में पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया गया था। जस्टिस एल नागेश्वर  ने अच्छे व्यवहार की वजह से पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया था। आर्टिकल 142 का इस्तेमाल करते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया गया था। पेरारिवलन भी राजीव गांधी हत्या मामले में शामिल था। वहीं, अब 6 दोषियों को रिहा करने के संदर्भ में कोर्ट ने कहा है कि इन सभी दोषियों पर अन्य मामला विचाराधीन नहीं है। लिहाजा इन सभी को रिहा करने का आदेश दिया जाता है। बता दें कि राजीव गांधी हत्याकांड में शामिल नलिनी, रविचंद्रन, मुरुगन, संथन, जयकुमार, और रॉबर्ट पॉयस को रिहा करने का आदेश दे दिया गया है। हालांकि, अभी तक कांग्रेस की तरफ से कोर्ट के उपरोक्त आदेश पर किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

supreme court

31 साल पहले हुई थी राजीव गांधी की हत्या 

1991 में तमिलनाडु में एक चुनावी रैली में राजीव गांधी की एक आत्मघाती हमले में हत्या कर दी गई थी। एक महिला ने उन्हें माला पहनाया। जिसके बाद जोरदार धमाका हुआ और राजीव गांधी को अपनी जान गंवानी पड़ी। बाद में पूरे मामले की जांच हुई, तो कुल 41 लोग आरोपी बनाए गए। जिसमें से 12 लोगों की मौत हो चुकी थी और तीन फरार हो चुके थे। हालांकि, 26 लोग पकड़े गए थे। बता दें कि यह हादसा इतना भयावह था कि इसमें राजीव गांधी सहित 18 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। फरार आरोपियों के खिलाफ टाडा कानून के तहत कार्रवाई की गई थी। जिसमें प्रभाकरण, पोट्टू ओम्मान और अकीला  शामिल थे। पूरे मामले को लेकर 26 सालों तक कानूनी कार्रवाई चली। जिसके बाद कोर्ट का फैसला आया, जिसमें 26 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी।

 पहले भी हो चुके हैं कई रिहा 

ध्यान रहे कि यह कोई पहली मर्तबा नहीं है कि जब राजीव गांधी हत्याकांड मामले में शामिल किसी दोषी को रिहा करने का फैसला किया गया है, बल्कि इससे पहले भी कई दोषी रिहा किए जा चुके हैं। अब तक मामले में शामिल 26 में से 19 दोषियों को रिहा करने का फैसला किया जा चुका है और बाकी के बचे सात दोषियों की फांसी की सजा यथावत रखने का फैसला किया था।

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