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Gujarat Elections Result : एंटी इनकमबेंसी से जूझती भाजपा ने बीते 5 साल में कैसे बदल डाली गुजरात में अपनी किस्मत? यहां देखें

Gujarat Elections Result : गुजरात में प्रधानमंत्री मोदी का जादू पिछले 15 से 20 सालों से लगातार चल रहा है और यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी हर बार गुजरात में अपनी सरकार बनाने में सफल हो पाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात चुनावों के केंद्र में रहे हैं।

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अहमदाबाद। गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 में भारतीय जनता पार्टी ने जीत का परचम लहरा दिया है। भाजपा अपने गढ़ को बड़ी ऐतिहासिक जीत के साथ बचाने में कामयाब रही है। इससे बड़ी बात यह कि पांच साल के अंदर बीजेपी ने राज्य का राजनीतिक परिदृश्य बदल दिया है। 2017 के चुनावों में 99 सीटों पर सिमटी बीजेपी इस बार दो तिहाई सीटों के साथ 151 सीटों पर जीत दर्ज करती दिख रही है, जो राज्य के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी जीत है। ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी anti-incumbency के बाद भी भारतीय जनता पार्टी कैसे अपने गढ़ को बचाने में कामयाब रही है। आखिर बीजेपी ने पिछले पांच सालों में ऐसे कौन से कदम उठाए, जिससे राज्य की राजनीतिक सूरत बदल गई और बीजेपी अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करती नजर आ रही है। आइए जानते हैं ऐसे पांच बड़े कारण जिसने बीजेपी के खिलाफ एंटीइनकमबेंसी फैक्टर होने के बावजूद बंपर बहुमत दिलाने में बड़ी भूमिका अदा की है।

वाइब्रेंट गुजरात प्रोजेक्ट ने कर डाला कमाल

गुजरात में प्रधानमंत्री मोदी का जादू पिछले 15 से 20 सालों से लगातार चल रहा है और यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी हर बार गुजरात में अपनी सरकार बनाने में सफल हो पाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात चुनावों के केंद्र में रहे हैं। वह न सिर्फ गुजराती अस्मिता के प्रतीक चिह्न बने हुए हैं, बल्कि बीजेपी के लिए अभी भी सबसे बड़े जिताऊ फैक्टर बने हुए हैं। इस चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य में कुल 27 चुनावी रैलियां की हैं। उन्होंने दो दिन लगातार अहमदाबाद में 16 विधानसभा सीटों को कवर करते हुए 40 किलोमीटर का लंबा रोड शो किया है।

PM MODI
इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी का गुजरात को लेकर जो विजन था वह उसे साकार करने में लगातार प्रयासरत हैं और कामयाब होते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। गुजरात को वाइब्रेंट बनाने की कोशिशों में पीएम मोदी ने अपने गृह राज्य में खूब निवेश करवाया। वो पिछले पांच सालों में अक्सर किसी न किसी योजना के उद्घाटन या शिलान्यास के मौके पर गुजरात जाते रहे हैं। गुजरात में पिछले पांच सालों के दौरान बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश हुआ है। आधारभूत संरचनाओं के विकास में गुजरात ने कई मील के पत्थर गाड़े हैं। उन्हीं में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ भी शामिल है।

कैबिनेट के बदलाव से क्या हुआ हासिल?

बीजेपी के खिलाफ गुजरात में पिछले 203 सालों के अंदर anti-incumbency देखी गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए पिछले साल सितंबर 2021 में मोदी-शाह की जोड़ी ने मुख्यमंत्री विजय रुपाणी समेत उनके मंत्रिमंडल के सभी मंत्रियों को कैबिनेट से हटा दिया और उनकी जगह नया सीएम और नए मंत्रियों ने शपथ ली। बीजेपी ने ये फेरबदल कर गुजरात में दरकती सियासी जमीन को न सिर्फ रोकने में सफलता पाई बल्कि देशभर में यह संदेश देने में कारगर रही कि बीजेपी विकास और जनसरोकार से समझौता नहीं कर सकती है। इस कवायद की वजह से पिछले एक साल में जनमानस में बीजेपी के प्रति रुख में बदलाव आया है।

भाजपा ने काटा कई दिग्गजों का टिकट

इस बार के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कई बड़े दिग्गज नेताओं का टिकट काटा है। पार्टी ने 40 फीसदी विधायकों के टिकट काट दिए थे। इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और पूर्व उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल समेत कई मंत्रियों और दिग्गजों का भी टिकट काट दिया गया । बीजेपी ने इसके जरिए न सिर्फ एंटी इनकमबेंसी फैक्टर को दबाने की कोशिश की बल्कि नए लोगों और युवाओं को टिकट देकर पार्टी ने आमजन के बीच पैठ बनाने की भरपूर कोशिश की, जो सीटों में बदलती नजर आ रही है।

पाटीदार नेताओं के साथ आने से हुआ फायदा

आपको बता दें कि 2017 के चुनाव में कांग्रेस के साथ रहे हार्दिक पटेल अब भाजपा के पाले में आ चुके हैं। 1990 के बाद परंपरागत रूप से पाटीदार बीजेपी के साथ ही रहे हैं लेकिन 2015 में आरक्षण की मांग पर पाटीदार समुदाय ने बीजेपी के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया था। पाटीदारों का एक बड़ा तबका तब 2017 में कांग्रेस के पक्ष में चला गया था, इससे बीजेपी को खासा नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार बीजेपी ने पाटीदार आंदोलन के बड़े नेता हार्दिक पटेल को न सिर्फ अपने पाले में किया बल्कि उसे वीरमगाम विधानसभा सीट से चुनावी रणक्षेत्र में उतार दिया।

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