दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस हिंसा के मामलों पर यूएपीए लगाया, गाजीपुर बॉर्डर पर धारा 133 लागू

दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस हिंसा के मामलों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) लगाया है। गणतंत्र दिवस के दिन किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान लाल किला समेत अन्य स्थानों पर हुई हिंसा के मामले में देशद्रोह और UAPA के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। इसकी जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सौंपी गई है।

आईएएनएस Written by: January 28, 2021 8:19 pm
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों की ओर से प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिसा की जांच का जिम्मा गुरुवार को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने संभाल लिया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हिंसा में शामिल रहे लोगों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के साथ ही आईपीसी की कड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई के लिए कमर कस ली है।

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यह कदम पुलिस द्वारा हिंसक झड़पों में शामिल किसानों के खिलाफ 25 से अधिक एफआईआर दर्ज किए जाने के एक दिन बाद देखने को मिला है। एफआईआर में नामजद लोगों ने मंगलवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में एकत्रित होकर दिल्ली के कई स्थानों पर जमकर हिंसा की। इस दौरान एक किसान की मौत हो गई और 394 पुलिसकर्मी घायल हो गए।  दिल्ली पुलिस द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, “स्पेशल सेल 26 जनवरी को सामने आई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के पीछे की साजिश और आपराधिक डिजाइन की जांच कर रही है। एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया है और यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत जांच की जा रही है।”

गाजीपुर बॉर्डर पर धारा 133 लागू

26 जनवरी को किसान ट्रैक्‍टर परेडनिकाले जाने के दौरान दिल्‍ली में मचे बवाल और हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस और यूपी पुलिस एवं प्रशासन ने गाजीपुर बॉर्डर पर अब बेहद सख्‍त रुख अपना रहा है। करीब 37 किसान नेताओं पर एफआईआर होने अब कई को लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद अब किसान आंदोलन को खत्‍म करने की तेज तैयारी है। शाम करीब 7.30 बजे तक यहां दिल्‍ली पुलिस के जिला उपायुक्‍त की तरफ से धारा 133 लागू कर दी गई, जिसके तहत यहां किसी भी तरह के प्रदर्शन या इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई। ताजा घटनाक्रम में यहां पुलिस प्रशासन की तरफ से बसें और वज्र वाहन भी लाए गए हैं। इससे साफ संकेत है कि थोड़ी देर में या देर रात में धरनास्‍थल पूरी तरह खाली कराया जा सकता है।

गाजीपुर बॉर्डर पर करीब 2 महीने से बैठे किसान पुलिस-प्रशासन के सख्‍त रुख के बाद वहां से वापस जाने लगे हैं। वहीं, यहां किसान आंदोलन का नेतृत्‍व कर रहे किसान नेता राकेश टिकैत से भी प्रशासन की कई दौर की वार्ता हो चुकी है। हालांकि रिपोर्ट्स आ रही थीं कि राकेश टिकैत पुलिस के सामने सरेंडर करने वाले हैं, लेकिन उन्‍होंने स्‍पष्‍ट कर दिया है कि वह सरेंडर नहीं करेंगे। फिलहाल यहां हलचल तेज है। सड़क के दोनों ओर भारी संख्‍या में पुलिसबल मौजूद हैं। आला अफसर अभी टिकैत और अन्‍य नेताओं से बात करने पहुंचे। इसके बाद गाजियाबाद के एडीएम (सिटी) शैलेंद्र सिंह ने कहा कि, राकेश टिकैत को कानून नोटस दिया गया है कि वे सड़क को खाली कर दें, क्‍योंकि सड़क को अवरोध करना कानूनन गलत है। उन्‍हें सोचने का वक्‍त दिया गया है।

लाल किले से गायब हुए बेशकीमती पुरावशेष, संस्कृति मंत्री ने खोजने के दिए निर्देश

गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर प्रदर्शनकारी किसानों के उपद्रव के दौरान जहां इस राष्ट्रीय धरोहर को भारी नुकसान पहुंचा, वहीं कई ऐतिहासिक पुरावशेष गायब भी हुए हैं। घटना के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से तैयार रिपोर्ट में इसका खुलासा होने के बाद केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने दिल्ली पुलिस को खोजने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने उम्मीद जताई है कि पुलिस जल्द अवशेषों को बरामद करेगी। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रहलाद सिंह पटेल ने अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में बताया कि, “लालकिले के बाहर लाइट के जितने भी इंस्ट्रूमेंट थे उन्हें तोड़ दिया गया है। पहली मंजिल पर इंटरपिटेशन सेंटर बन रहा था, जिसके 6-7 ब्लॉक्स को नष्ट कर दिया गया है। जिस मुख्य स्थान से झंडा फहराया जाता है, वहां पर रखे दो ऐतिहासिक कलश गायब हैं। लालकिले के मुख्य द्वार को भी तोड़ा गया है और भी कई पुराशेषों को नुकसान पहुंचाया गया है।”

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केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ऐतिहासिक अवशेष बेशकीमती होते हैं, जिनकी भरपाई नहीं की जा सकती। लाल किले में तोड़फोड़ से हुए आर्थिक नुकसान का आंकलन किया रहा है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी गई है, जिसके आधार पर पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी और गायब हुए पुरातात्विक अवशेषों को बरामद करेगी।

दिल्ली पुलिस की एफआईआर में 30 वाहनों का जिक्र, मालिकों की तलाश जारी

दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर रैली के लिए निर्धारित मार्ग का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने प्राथमिकी में ट्रैक्टर सहित ऐसे 30 वाहनों को सूचीबद्ध किया है, जिन्होंने निर्धारित मार्ग का उल्लंघन किया। पुलिस अब इन वाहनों के मालिकों का पता लगाने में जुट गई है।

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पुलिस के अनुसार, वाहनों ने जो मार्ग निर्धारित किया था, उसका उल्लंघन किया और इन वाहनों पर सवार लोगों ने हिसा फैलाई। इसके साथ ही उन्होंने 26 जनवरी को आधिकारिक ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमले भी किए। पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों से पिस्तौल, गोला बारूद और यहां तक कि गैस गन्स भी छीन लीं।

दिल्ली पुलिस की विशेष यूनिट्स क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल ने गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रीय राजधानी में हुई हिंसा के सिलसिले में हिंसक प्रदर्शनकारियों और एफआईआर में नामजद लोगों के खिलाफ सबूत इकट्ठा करना शुरू कर दिया है।

दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के संबंध में एफआईआर में नामजद किसान नेताओं के खिलाफ एक लुकआउट सर्कुलर जारी किया है। पुलिस ने कहा कि उनके पासपोर्ट को सरेंडर करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे देश से बाहर न जाएं।

दिल्ली हिंसा का मुख्य आरोपी दीप सिद्धू लापता

पंजाबी अभिनेता से सामाजिक कार्यकर्ता बने दीप सिद्धू, जिनका नाम गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में हुई हिंसा में सामने आया है, कथित तौर पर लापता हो गए हैं। उन्हें 26 जनवरी को किसानों की भीड़ के बीच आखिरी बार देखा गया था, जो ट्रैक्टर मार्च के नियोजित मार्ग का उल्लंघन करते हुए लालकिले तक जा पहुंची थी। सिद्धू पर आरोप है कि उन्होंने ही प्रदर्शनकारियों को लालकिले की प्राचीर से धार्मिक झंडा फहराने के लिए उकसाया था। सिख धर्म के प्रतीक निशान साहिब को स्थापित करने के लिए लोगों को उकसाने के आरोपों के बाद से उनका कोई पता नहीं लग पाया है।

actor deep sidhu

सिद्धू को अभिनेता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद सनी देओल का करीबी भी बताया जा रहा है। उन्होंने लालकिले से एक फेसबुक लाइव के दौरान कहा था, “हमने केवल विरोध प्रदर्शन करने के लिए अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करते हुए लालकिले पर निशान साहिब झंडा फहराया है।”

उन्होंने यह भी कहा कि लालकिले से राष्ट्रीय ध्वज नहीं हटाया गया है। एक अन्य वीडियो में सिद्धू को लालकिले से बाइक पर भागते देखा गया है। दिल्ली हिंसा में मुख्य आरोपी सिद्धू के साथ गैंगस्टर से सामाजिक कार्यकर्ता बने लक्खा सिधाना को भी मुख्य आरोपी बनाया गया है।

सिधाना एक अपराधी से राजनेता बने हैं और 2012 के विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले वह कई मामलों में बरी हो गए थे। उन्होंने पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, जिसका नेतृत्व मनप्रीत सिंह बादल ने किया था, जो वर्तमान में पंजाब में कांग्रेस सरकार में वित्तमंत्री हैं।

हालांकि सिद्धू ने किसान यूनियन के नेताओं पर लोगों से सलाह लिए बिना फैसले लेने और खुद का बचाव करने का आरोप लगाते हुए अपने हालिया वीडियो में कहा, “मैं देख रहा हूं कि मेरे खिलाफ गलत प्रचार और नफरत फैलाई जा रही है।”

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