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Gyanvapi Mosque: पूर्व महंत का दावा, ज्ञानवापी में स्थित है एक और शिवलिंग, वहीं फोटोग्राफी ने दिया ये अहम बयान

Gyanvapi Mosque: इतना ही नहीं, इस बात को लेकर भी आशंका व्यक्त की गई है कि मुस्लिम पक्षकार साक्ष्य़ नष्ट करने हेतु इसे दूसरी जगह स्थानांतरित भी कर सकते हैं, लिहाजा सक्षम अधिकारियों से इसकी निष्पक्ष जांच की मांग करता हूं। पूर्व महंत दूसरी शिवलिंग होने के अपने दावे से कोर्ट के कमिश्नर को अवगत कराया है। उधर, अजुंमन इंताजामिया मस्जिद कमेटी इन दावों को सिरे से खारिज किया है।

नई दिल्ली। तीन दिनी सर्वे के आखिरी दिन जब ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग प्राप्त हुआ, तो सियासी गलियारों में बखेड़ा खड़ा हो गया। किस ने महज इसे फव्वारा बताया तो कोई इसे शिवलिंग बताया। अब यह फव्वारा है या शिवलिंग। यह तो फिलहाल कोर्ट ही तय करेगी, क्योंकि अभी यह मसला एक नहीं, बल्कि तीन-तीन अदलातों की चौखट पर दस्तक दे चुका है। ऐसी स्थिति में कोर्ट का क्या कुछ फैसला रहेगा। इस पर सिर्फ हिंदू या मुस्लिम पक्ष की ही नहीं, बल्कि समस्त देशवासियों की निगाहें टिकी रहेंगी। लेकिन उससे पहले विश्ननाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ कुलपति तिवारी ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में एक और शिवलिंग होने का दावा किया है। महंत का दावा है कि मस्जिद में छोटा शिवलिंग है। लिहाजा इसका सर्वेक्षण किया जाना चाहिए।

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इतना ही नहीं, इस बात को लेकर भी आशंका व्यक्त की गई है कि मुस्लिम पक्षकार साक्ष्य़ नष्ट करने हेतु इसे दूसरी जगह स्थानांतरित भी कर सकते हैं, लिहाजा सक्षम अधिकारियों से इसकी निष्पक्ष जांच की मांग करता हूं। पूर्व महंत दूसरी शिवलिंग होने के अपने दावे से कोर्ट के कमिश्नर को अवगत कराया है। उधर, अजुंमन इंताजामिया मस्जिद कमेटी इन दावों को सिरे से खारिज किया है। मस्जिद कमेटी का कहना है कि ऐसा कोई भी शिवलिंग नहीं है। ध्यान रहे कि इससे पहले मस्जिद में मिली शिवलिंग को मुस्लिम पक्षकार पहले से बही फव्वारा बता रहे हैं। जिसे लेकर दोनों ही पक्षों के बीच विवादी बयार बह रही है।

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इतना ही नहीं, कुलपति तिवारी ने मस्जिद के दक्षिणी हिस्से में स्लेफ होने का दावा भी किया है। महंत ने दावा किया है कि मस्जिद के दीवारों पर कमल के फूल और घंटियों के चित्र भी देखे जा सकते हैं। तस्वीर में उस हिस्से को भी दिखाया गया है, जहां श्रृंगार गौरी मंदिर स्थित है। तालाब के पीछे नंदी और भगवान हनुमान की मूर्ति दिखाई दे रही है, जिसे स्वयं भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से बनवाया था। इसमें स्नान करने के बाद देवी पार्वती भगवान विश्वेश्वर (शिव के दूसरे नाम) की पूजा करती थीं। दावा किया जा रहा है कि यह तस्वीरें साल 2014 में क्लिक की गई थी। बहरहाल, अभी यह पूरा मसला कोर्ट में विचाराधीन है। अब ऐसी स्थिति में देखना होगा कि कोर्ट की तरफ से इस पूरे मसले में आगे चलकर क्या कुछ निर्देश दिए जाते हैं।

उधर, काशी के ज्ञानवापी में कोर्ट कमीशन के लिए फोटोग्राफी करने वाले गणेश शर्मा ने बड़ा दावा किया। एक न्यूज चैनल से खास बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि, कमीशन द्वारा मैंने कोने-कोने की फोटोग्राफी की। उन्होंने बताया कि जब हम ज्ञानवापी परिसर में घूम रहे थे तो धार्मिक भावनाएं जैसा कोई माहौल नहीं था। वहां शिवलिंग छूना, प्रणाम करना और हर-हर महादेव के नारे लगने की मनाही थी। वहीं, इसके इतर फोटोग्राफर ने दावा किया है कि सर्वे के दौरान काला पत्थर मिला है, जिसे शिवलिंग बताया जा रहा है। यह काशी मंदिर में स्थापित शिवलिंग के जैसा है।