
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मणिपुर में हालात सुधारने के लिए लगातार अहम फैसले लेना जारी रखा है। ताजा मामले में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मणिपुर में प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि हर हाल में 8 मार्च से राज्य में सभी जगह लोगों के आने-जाने में बाधाएं दूर की जाएं। अमित शाह ने कहा कि जो भी लोग मणिपुर में लोगों की आवाजाही को रोकने की कोशिश करें, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। जबरन उगाही रोकने, मणिपुर और म्यांमार के बीच जल्दी बाड़बंदी करने और नशे के कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाने का भी अमित शाह ने निर्देेश दिया है। अमित शाह ने ये निर्देश मणिपुर में सुरक्षा के हालात की समीक्षा के लिए बैठक के दौरान दिए। इस बैठक में मणिपुर के गवर्नर अजय कुमार भल्ला और अन्य अफसरों ने हिस्सा लिया। अब तक मणिपुर में अलग-अलग गुट लोगों के जाने-आने में बाधा बनते रहे हैं। इसी को खत्म कराने के लिए केंद्र सरकार ने ये अहम आदेश जारी किया है।
Union Home Amit Shah today chaired a high-level review meeting on the security situation in Manipur in New Delhi. In the meeting, the Home Minister directed that from March 8, 2025, free movement of the public should be ensured on all routes in Manipur, and strict action should… https://t.co/6jrugGhk6s pic.twitter.com/VKmgMbakw6
— ANI (@ANI) March 1, 2025
केंद्र सरकार ने इससे पहले 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। राष्ट्रपति शासन लगाने के बाद गवर्नर अजय कुमार भल्ला ने मणिपुर के सभी समुदायों को 7 दिन का वक्त दिया था कि वे अपने पास रखे सभी अवैध हथियार जमा कराएं। मणिपुर के गवर्नर अजय भल्ला ने अपने आदेश में साफ कहा था कि अगर इस समयसीमा में हथियार जमा न कराए गए, तो संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी। इसके बाद तमाम लोगों ने अपने पास रखे हथियार जमा कराए हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक मणिपुर में हथियार जमा कराने की समयसीमा भी 6 मार्च तक बढ़ा दी गई है।
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष चल रहा है। इस संघर्ष में 250 के करीब लोगों की जान भी जा चुकी है। मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य की तत्कालीन बीरेन सिंह सरकार से कहा था कि वो मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के बारे में विचार करे। इसके बाद ही मणिपुर में हिंसा भड़क उठी थी। मणिपुर में हिंसा को रोकने के लिए खुद अमित शाह वहां गए थे और मैतेई और कुकी नेताओं से मिले थे। वहां बड़ी तादाद में सुरक्षाबलों को भी तैनात किया गया था। इसके बावजूद मणिपुर में हिंसा की घटनाएं लगातार हो रही थीं। जिसके बाद केंद्र सरकार ने हालात सुधारने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया।