कोरोना का डर बता पति ने बनाई दूरी तो पत्नी पहुंची कोर्ट, देना पड़ा ‘मर्दानगी’ का सर्टिफिकेट

Social Distancing: पत्नी(Husband) के आरोप के बाद पति ने अपनी बात रखते हुए काउंसलिंग के दौरान कहा कि, जब हमारी शादी हुई थी तो उसके बाद ही पत्नी के परिवार वाले पॉजिटिव हो गए।

Written by: December 5, 2020 9:19 pm
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भोपाल। कोरोना का डर लोगों में कुछ इस कदर समा गया है कि, एक पति को इसके चलते अपनी मर्दानगी का सबूत तक देना पड़ गया। दरअसल भोपाल में पति को कोरोना फोबिया कुछ ऐसा हुआ उसने अपनी पत्नी से दूरी बना ली। इस रिश्ते में सोशल डिस्टेंसिंग इतना नुकसानदायक हुआ कि पति को अपनी मर्दानगी का सबूत तक देना पड़ गया। बता दें कि पति ने जब कोरोना के डर से पत्नी से डिस्टेंसिंग बनानी शुरू की तो इससे परेशान होकर नई-नवेली पत्नी रूठकर मायके चली गई। उसने 5 महीने बाद उसने प्राधिकरण में भरण-पोषण के लिए आवेदन दिया। बाद में पता चला कि पति ने कोरोना के डर से दाम्पत्य दायित्वों को नहीं निभाया। इतना ही नहीं पत्नी ने पति पर आरोप लगा दिया कि उसका पति दाम्पत्य संबंध निभाने लायक ही नहीं है। इस आरोप के बाद पत्नी को मनाने के लिए पति को मेडिकल टेस्ट करवाकर अपने पुरुषत्व का प्रमाण देना पड़ा।

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इस प्रमाण के बाद मामला समझौता होने तक पहुंचा और बीते शुक्रवार को महिला पति के साथ ससुराल चली गई। गौरतलब है कि दोनों की शादी 29 जून को हुई थी। महिला ने प्राधिकरण में 2 दिसंबर को आवेदन दिया था। उसने आरोप लगाए थे कि ससुराल वाले उसे परेशान करते हैं। उसकी शादी को 5 महीने ही हुए हैं।

पत्नी ने ससुराल वालों पर आरोप लगाते हुए कहा था कि, उसके ससुराल वाले उसे परेशान करते हैं, पति भी फोन पर अच्छी बातें करते हैं लेकिन पास नहीं आते थे। इसको लेकर दोनों के बीच विवाद होना शुरू हो गया। दुल्हन ने अपनी शिकायत में कहा कि, जिससे उसने जीवनभर का रिश्ता जोड़ा, वही दूरी बना रहा था। उसने यह बात अपने परिजन को बताई। मायके वालों ने पति से बात करना चाही, लेकिन उसने सही तरीके से उत्तर नहीं दिया।

देना पड़ा ‘मर्दानगी’ का सर्टिफिकेट

जब मामला काफी आगे बढ़ गया तो मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राधिकरण ने पति को मेडिकल कराने की सलाह ही। पति ने प्राधिकरण के सामने मेडिकल रिपोर्ट रखी, जिसमें वह फिट था। मेडिकल रिपोर्ट को देखने के बाद पाया गया कि महिला द्वारा लगाया गया पति पर आरोप पूरी तरह से झूठा था। महिला और उसके परिजन की काउंसलिंग की गई। उसके बाद महिला अपने पति के साथ ससुराल जाने को तैयार हो गई।

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पत्नी के ससुराल जाने पर राजी होने के बाद काउंसलर ने पत्नी को हिदायत दी कि वह आगे से किसी प्रकार के झूठे आरोप नहीं लगाए। वहीं दोनों को कोरोना टेस्ट कराके समस्या के निदान की सलाह दी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव संदीप शर्मा ने बताया कि महिला ने पति पर झूठे आरोप लगाए थे कि वह दांम्पत्य संबंध निभाने योग्य नहीं है।

वहीं पत्नी के आरोप के बाद पति ने अपनी बात रखते हुए काउंसलिंग के दौरान कहा कि, जब हमारी शादी हुई थी तो उसके बाद ही पत्नी के परिवार वाले पॉजिटिव हो गए। मुझे लगता था कि हार्ड इम्युनिटी की वजह से उसे या पत्नी में कोरोना के लक्षण नहीं दिखाई दिए। मेरा मानना था कि जब मेरे आसपास वाले लोग संक्रमित हो सकते हैं, तो हो सकता है कि उसे और पत्नी को भी कोरोना हो। इसकी वजह से वह संबंधों को निभाने से झिझकता था।

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