नहीं थम रही चीन की कपटी चाल, गोलीबारी के बाद लद्दाख सीमा में घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे PLA के जवान…

चीन (China) की नापाक चाल को एक बार फिर भारत ने विफल कर दिया है। लगातार तीसरी बार चालबाज चीन ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश की है, जिसका भारतीय सेना (Indian Army) ने मुंहतोड़ जवाब दिया है।

Avatar Written by: September 8, 2020 4:39 pm
India-China LAC

नई दिल्ली। चीन (China) की नापाक चाल को एक बार फिर भारत ने विफल कर दिया है। लगातार तीसरी बार चालबाज चीन ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश की है, जिसका भारतीय सेना (Indian Army) ने मुंहतोड़ जवाब दिया है। दरअसल सोमवार को पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन (India & China) के सैनिकों के बीच फिर झड़प हो गई है। इसमें दोनों देशों की सेनाओं ने एक-दूसरे को डराने-धमकाने और पीछे धकेलने के लिए हवा में गोलीबारी की। यह घटना पैंगोंग त्सो (झील) के दक्षिणी तट के पास शेनपाओ पर्वत के पास हुई।जहां करीब 40-50 सैनिक दोनों ओर से आमने-सामने आए।

India China army

इस इलाके में भारतीय सेना के जवानों का कब्जा है, लेकिन चीनी सेना के 40-50 सैनिक इनके सामने आ गए। चीन की ओर से कोशिश की गई है कि भारतीय जवानों को हटाया जाए और उस रेजांग ला की ऊंचाई पर कब्जा कर लिया जाए। हालांकि, चीनी सेना इसमें सफल नहीं हो पाई है। बता दें कि सोमवार की शाम को चीन की ओर से लद्दाख सीमा में घुसपैठ की कोशिश की गई थी, जब भारतीय जवानों ने उन्हें रोका तो PLA के जवानों ने फायरिंग की। हवाई फायरिंग कर भारतीय सेना को डराने की कोशिश की गई, लेकिन भारतीय सेना के जवानों ने संयम बरता और चीनी सैनिकों को वापस भेज दिया।

pangong tso

इससे पहले भी चीन कई बार घुसपैठ की कोशिश कर चुका है लेकिन हर बार उसे नाकामी ही मिली है। हर बार अपनी नाकाम कोशिश के बाद चीन की ओर से भारतीय सेना पर ही घुसपैठ का आरोप लगाया जाता है। सोमवार की घटना के बाद भी चीनी विदेश मंत्रालय, चीनी सेना और चीनी मीडिया ने भारत पर घुसपैठ का आरोप लगाया और फायरिंग की बात कही। लेकिन भारतीय सेना ने अपने बयान में चीन के इस झूठ का पर्दाफाश कर दिया।

india and china

दरअसल, भारतीय सेना ने जब से काला टॉप, हेल्मेट टॉप और पैंगोंग 4 इलाके के कुछ हिस्से पर अपना कब्जा किया है तभी से ही चीन की हालत पतली है. क्योंकि ये इलाके युद्ध और किसी भी अन्य वक्त में रणनीतिक तौर पर काफी अहम हैं, ऐसे में चीन की कोशिश है कि इन्हें तुरंत वापस लिया जाए। जिसमें वो सफल नहीं हो पा रहा है।