राष्ट्रीय मुस्लिम मंच सीएए कानून को लेकर ऐसे करेगी लोगों को जागरुक, तैयारी पूरी

यासिर जिलानी ने कहा, “सीएए को लेकर देशभर में भ्रम फैलाया जा रहा है। हम अपने मंच के माध्यम से भ्रम को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। इस कानून से किसी भी मुसलमान भाई की नागरिकता नहीं जाएगी।”

Written by: March 15, 2020 8:04 pm

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने दिल्ली में दर्दनाक हिंसा का दौरा थमने के बाद नए कानून पर सरकार का पक्ष रखने और इसके बारे में लोगों को समझाने के लिए अब अपने आनुसंगिक संगठन राष्ट्रीय मुस्लिम मंच को आगे किया है। आरएसएस द्वारा जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने दिल्ली सहित देशभर में सीएए के समर्थन में प्रचार अभियान को तेज कर दिया है।

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मंच के प्रवक्ता यासिर जिलानी ने कहा, “सीएए को लेकर देशभर में भ्रम फैलाया जा रहा है। हम अपने मंच के माध्यम से भ्रम को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। इस कानून से किसी भी मुसलमान भाई की नागरिकता नहीं जाएगी।” गौरतलब है कि राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने सीएए पर एक बुकलेट तैयार किया है, जो हिंदी और उर्दू दोनों में है। इस बुकलेट को सभी मस्जिदों, इमामों, मदरसों, मोहल्लों और गांवों के मुस्लिम समाज के प्रमुख लोगों को भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि मंच इस मुद्दे पर जनसंपर्क अभियान भी चला रहा है।

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मंच के स्वयंसेवक लोगों को बता रहा है कि नया कानून मुस्लिम के खिलाफ नहीं है। साथ ही, वे अलग-अलग समूहों में राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के स्कूल और कॉलेज में जाकर लोगों को नए कानून का मकसद समझाने की कोशिश कर रहे हैं। वैसे, राष्ट्रीय मुस्लिम मंच सीएए के पक्ष में शुरू से ही स्थानीय स्तर पर जन जागरण अभियान चला रही थी, लेकिन शाहीनबाग आंदोलन और दिल्ली में भीषण हिंसा होने के बाद संघ ने अपनी रणनीति बदल दी और देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के समानांतर देशव्यापी अभियान शुरू कर दिया है।

CAA Protest

राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के संयोजक इंद्रेश कुमार ने इसके लिए स्वयंसेवकों के जत्थों को अलग-अलग जिममदारी सौंप दी है। कुछ स्वयंसेवक मस्जिद, मदरसों में जाकर समझाने की कोशिश कर रहे हैं, तो कई समूह स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में जाकर छात्रों के बीच सीएए के प्रावधानों का खुलासा कर रहे हैं। वहीं एक समूह को जिम्मेदारी दी गई है कि वह पढ़े-लिखे मुस्लिम तबके के साथ संपर्क साधे।