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Maharashtra: क्या उद्धव सरकार के गिरने पर BJP के साथ जाएगी NCP? शरद पवार ने दिया ये रिएक्शन

Maharashtra Political crisis: शरद पवार ने सरकार गिरने पर कहा कि इसका कोई न कोई विकल्प जरूर निकल जाएगा। वहीं इस दौरान शरद पवार से सवाल किया कि क्या एनसीपी, भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाएगी। जिस पर पवार ने कहा कि हम भाजपा के साथ जाने की जगह विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे। 

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नई दिल्ली। महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है। शिवसेना के वरिष्ठ नेता और मंत्री एकनाथ शिंदे कई विधायकों को लेकर गुजरात के सूरत में पहुंच हुए है। बताया जा रहा है कि उनके साथ 25 से ज्यादा विधायक एक होटल में डेरा जमाए हुए हैं। ऐसे माना जा रहा है कि ये सभी विधायक महाविकास अघाड़ी सरकार से नाराज है। वहीं महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल आने के बाद भाजपा एक्टिव हो गई है। एक तरफ जहां राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस राजधानी दिल्ली पहुंच रहे है। जहां भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे। वहीं दूसरी ओर महाअघाड़ी सरकार की संकट के बादल मंडरा रहे है। एकनाथ शिंदे के बागी होने से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की टेंशन बढ़ गई है क्योंकि एकनाथ के बागी होने से अब उद्धव ठाकरे की कुर्सी पर संकट के बादल छा गए है। इसी बीच एकनाथ शिंदे के बागी होने पर एनसीपी चीफ शरद पवार ने प्रेस कॉन्फेंस की है।

शरद पवार ने महाराष्ट्र में जारी सियासी हलचल पर कहा कि, यह तीसरी बार है जब राज्य सरकार को गिराने की षंड्यंत्र की जा रही है। इस दौरान एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) से बात होने को लेकर शरद पवार से प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनकी किसी के साथ बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि, एकनाथ शिंदे की नाराजगी का मसला शिवसेना का आंतरिक है। शरद पवार ने सरकार गिरने पर कहा कि इसका कोई न कोई विकल्प जरूर निकल जाएगा। वहीं इस दौरान शरद पवार से सवाल किया कि क्या एनसीपी, भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाएगी। पहले तो वो मीडिया के सवाल पर मुस्कराए और फिर पवार ने कहा कि हम भाजपा के साथ जाने की जगह विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे।

वर्तमान में महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक उथल-पुथल ने 2019 की याद दिला दी है, जब विधानसभा चुनाव के उपरांत अजीत पवार को अपने पाले में करके बीजेपी ने अपनी सरकार बना ली थी, लेकिन इसके बाद शरद पवार ने अजीत पवार को अपने खेमे में शामिल कर लिया था , जिसके बाद शिवसेना, कांग्रेस और रांकपा की महाविकास अघाड़ी सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हो पाया था। वहीं, महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एकनाथ शिंदे ने भी कुछ ऐसी ही स्थिति पैदा कर दी है।

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