जानिए निर्भया के दोषियों के पास अभी कितने बचे हैं विकल्प

अब निर्भया के दोषी मुकेश के सभी कानूनी विकल्प खत्म हो चुके हैं। हालांकि दूसरे दोषियों के कानूनी विकल्प खत्म होने तक उसकी फांसी भी रुकी रह सकती है, क्योंकि चारो दोषियों को एक साथ फांसी दी जाएगी।

Written by: January 31, 2020 9:02 pm

नई दिल्ली। निर्भया केस में दोषियों की फांसी के लिए डेथ वारंट की तारीख 1 फरवरी थी जो एक बार फिर टल गई है। बता दें कि कानूनी दांव-पेंच के चलते निर्भया के दोषियों की अब फांसी 1 फरवरी को नहीं होगी। इतना ही नहीं कोर्ट के अगले आदेश तक इस मामले में दोषियों की फांसी पर रोक लग गई है।

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अभी कानूनी विकल्प बचे हुए हैं

इससे पहले कोर्ट ने 22 जनवरी को फांसी देने के लिए डेथ वारंट जारी किया गया था लेकिन वो टल गया, उसके बाद नया डेथ वारंट जारी किया गया, जिसका तारीख 1 फरवरी थी। अब 1 फरवरी को भी दोषियों को फांसी टाल दी गई है। उधर निर्भया के दोषी विनय, पवन और अक्षय की तरफ से वकील ए. पी. सिंह ने अपनी दलील में कहा कि निर्भया के दोषियों के पास अभी कानूनी विकल्प बचे हुए हैं। लिहाजा इनकी फांसी पर रोक लगाई जाए।

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दोषियों के पास बचे हैं ये विकल्प :

सुप्रीम कोर्ट निर्भया के चारो दोषियों की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर चुका ह। इसके अलावा दोषी विनय, मुकेश और अक्षय की क्यूरेटिव पिटीशन भी खारिज हो चुकी है। अब सिर्फ पवन के पास ही क्यूरेटिव पिटीशन फाइल करने का विकल्प बचा है। सुप्रीम कोर्ट से क्यूरेटिव पिटीशन खारिज होने के बाद अक्षय और पवन के पास राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका का विकल्प होगा।

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इससे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने निर्भया के दोषी मुकेश की दया याचिका को खारिज कर चुके हैं, जबकि विनय की दया याचिका लंबित है। मुकेश ने राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज करने के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के दोषी मुकेश की इस याचिका को भी खारिज कर दिया है।

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चारों दोषियों को एक साथ फांसी दी जाएगी

अब निर्भया के दोषी मुकेश के सभी कानूनी विकल्प खत्म हो चुके हैं। हालांकि दूसरे दोषियों के कानूनी विकल्प खत्म होने तक उसकी फांसी भी रुकी रह सकती है, क्योंकि चारो दोषियों को एक साथ फांसी दी जाएगी। जब तक निर्भया के सभी दोषियों की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज नहीं हो जाती है और राष्ट्रपति दया याचिका खारिज नहीं कर देते हैं, तब तक निर्भया के दोषियों के पास फांसी से बचने का कानूनी विकल्प बना रहेगा।