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Jharkhand: महाराष्ट्र के बाद अब अगला नंबर झारखंड का…!, सीएम सोरेन ने विधायकों को भेजा बुलावा, दे दिया ये बड़ा आदेश

Jharkhand: दरअसल, ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि क्योंकि इससे पूर्व कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा सरकार के बीच तनाव की खबरें प्रकाश में आ चुकी हैं। हालांकि, दोनों ही पार्टी के बीच जारी तनाव को विराम देने की दिशा में कई मर्तबा कोशिशें की जा चुकी हैं, लेकिन अब जिस तरह हेमंत सोरेन अब सरकार को डिफेंसिव मोड में लाने के लिए एक्टिव हो चुके हैं, वो यह जाहिर करने के लिए पर्याप्त है कि उनकी द्वारा की गई पूर्व की कोशिशें निष्फल ही साबित हुई हैं।

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नई दिल्ली। अगर हम आपसे पूछे कि झारखंड में किसकी सरकार है? तो आप कहेंगे कि ‘झारखंड मुक्ति मोर्चा-कांग्रेस’ के गठबंधन की सरकार है। वाह क्या खूब जवाब दिया है आपने। मन करता है कि आपके लिए जमकर तालियां ठोकी जाए। लेकिन जरा ठहरिए, क्योंकि अब ज्यादा दिनों तक झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस की सरकार टिकने वाली नहीं है। माना जा रहा है कि यह सरकार अब गिर सकती है। इसके संकेत मिलने शुरू हो चुके हैं, जिसको समय रहते भांपते ही हेमंत सोरेन ने कल यानी शनिवार को विधायकों की बैठक बुलाई है और इसके साथ ही कांग्रेस विधायकों के राज्य से बाहर जाने पर रोक लगा दी है। जिससे यह साफ जाहिर होता है कि पार्टी में बीते कुछ दिनों से जारी उथल-पुथल अब सतह पर आ चुकी है, जिस पर विराम लगाने की दिशा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अब खुद सक्रिय हो चुके हैं, लेकिन यहां बड़ा सवाल यह है कि क्या उनकी यह सक्रियता आगामी दिनों में क्या झारखंड की कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा सरकार को मुश्किलों से निजात दिला पाएगी?

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दरअसल, ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि क्योंकि इससे पूर्व कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा सरकार के बीच तनाव की खबरें प्रकाश में आ चुकी हैं। हालांकि, दोनों ही पार्टी के बीच जारी तनाव को विराम देने की दिशा में कई मर्तबा कोशिशें की जा चुकी हैं, लेकिन अब जिस तरह हेमंत सोरेन अब सरकार को डिफेंसिव मोड में लाने के लिए एक्टिव हो चुके हैं, वो यह जाहिर करने के लिए पर्याप्त है कि उनकी द्वारा की गई पूर्व की कोशिशें निष्फल ही साबित हुई हैं।

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यहां यह भी जान लीजिए कि बीते दिनों हुए राष्ट्रपति चुनाव में राजग प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने का ऐलान किया था, जिस पर कथित तौर पर कांग्रेस ने अपनी आपत्ति भी जताई थी। यही नहीं, बीते दिनों में अमित शाह भी झारखंड दौरे के दौरान कई मर्तबा सीएम हेमंत सोरेन से मुखातिब हो चुके हैं। दोनों ही हुई इस मुलाकात ने सियास गलियारों में सियासी विश्लेषकों को झारखंड की हाईवोल्टेज ड्रामा की पुनरावृत्ति का मौका दे दिया था। बहरहाल, झारखंड के पॉलिटिकल टसल ने अब लोगों के जेहन में दो मसलों के बारे में जानने की आतुरता को बढ़ाकर रख दिया है। पहला तो ये है कि कल हेमंत सोरेन की अगुवाई होने जा रही बैठक में क्या कुछ फैसला लिया जा सकता है और दूसरा कांग्रेस विधायकों के राज्य से बाहर जाने पर रोक क्यों लगाई गई है। क्या महाराष्ट्र की तर्ज पर झारखंड में भी कुछ देखने को मिल सकता है।

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