
नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तमाम देशों पर 2 अप्रैल 2025 से रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का फैसला किया है। भारत भी इन देशों में है। भारत से तमाम चीजें अमेरिका निर्यात की जाती हैं। ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ की जद में आने के कारण इन चीजों को बनाने वाली भारतीय कंपनियों के सामने मुश्किल खड़ी हो सकती है। हालांकि, ऐसे भी उद्योग है, जिनकी चीजों पर ट्रंप के टैरिफ का ज्यादा असर शायद न पड़े। डोनाल्ड ट्रंप की ओर से घोषित रेसिप्रोकल टैरिफ भारत पर गुरुवार 3 अप्रैल की तड़के से लागू होने जा रहा है।
पहले ये जान लेते हैं कि भारत के ऐसे कौन से उत्पाद हैं, जो अमेरिका को निर्यात होते हैं और जिन पर ट्रंप के टैरिफ का ज्यादा असर नहीं होगा। ऐसी वस्तुओं में खनिज, पेट्रोलियम उत्पाद, अयस्क और वस्त्र उद्योग हैं। भारत से अमेरिका को 3.33 अरब डॉलर का खनिज, पेट्रोलियम उत्पाद और अयस्क निर्यात होता है। इन सब पर पहले से ही अमेरिका ज्यादा टैरिफ लगाता है। वहीं, भारत से करीब 5 अरब डॉलर के सिले-सिलाए कपड़े भी अमेरिका को भेजे जाते हैं। इस सेक्टर पर भी ट्रंप के टैरिफ का असर कम से कम रहने वाला है।
जिन उत्पादों पर ट्रंप के टैरिफ का सबसे ज्यादा असर होगा, उनमें ऑटो सेक्टर है। भारत इस सेक्टर में अमेरिका में लगने वाले टैरिफ से 23 फीसदी ज्यादा टैरिफ लेता है। इसी तरह भारत अमेरिका से आयात होने वाले हीरे, सोने और ज्वेलरी पर 13 फीसदी ज्यादा टैरिफ लेता है। ऐसे में अमेरिका भी अब भारत से आयात होने वाले ऑटो पार्ट्स, हीरा, सोना और ज्वेलरी पर उतना ही टैरिफ लेगा। इसके अलावा भारत से अमेरिका को भेजे जाने वाले रसायन और दवा, प्लास्टिक, मशीन, कम्प्यूटर, लोहे और स्टील से बनी चीजों पर भी अमेरिका ज्यादा टैरिफ लेगा। क्योंकि भारत जब अमेरिका से ये सब सामान मंगाता है, तो उस पर ज्यादा टैरिफ लेता है। इससे पहले सूत्रों के हवाले से अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने खबर दी थी कि मोदी सरकार अभी ये आकलन करेगी कि ट्रंप के टैरिफ का किस क्षेत्र पर कितना असर पड़ रहा है। उसके अनुसार ही आगे की रणनीति तय होगी। जरूरत पड़ने पर भारत दूसरे देशों में अपने बाजार को विस्तार भी दे सकता है। इनमें यूरोप के देश, कनाडा और अरब देश शामिल हैं।