
मुंबई। कहा जाता है कि सियासत में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। सियासत में आए दिन अलग-अलग रंग भी देखने को मिलते हैं। ऐसा ही रंग क्या महाराष्ट्र में दिखेगा? क्या एक बार फिर उद्धव ठाकरे और उनसे बगावत करने वाले एकनाथ शिंदे एक होंगे? ये सवाल एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बड़े नेता संजय शिरसाट के ताजा बयान से उठ रहे हैं। संजय शिरसाट को एकनाथ शिंदे का बहुत करीबी माना जाता है। संजय शिरसाट ने कहा है कि वक्त आ गया है कि उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे को साथ लाया जाए। हालांकि, उद्धव ठाकरे की पार्टी ने संजय शिरसाट के इस बयान की आलोचना की है।
संजय शिरसाट महाराष्ट्र की औरंगाबाद पश्चिम सीट से विधायक हैं। वो लगातार 4 बार इस सीट को जीत चुके हैं। एकनाथ शिंदे की शिवसेना के संजय शिरसाट प्रवक्ता भी हैं। संजय शिरसाट ने कहा है कि अगर उनको मौका मिला, तो वो उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे को साथ लाने की कोशिश करेंगे। संजय शिरसाट का कहना है कि ऐसा करने में कुछ भी गलत नहीं है। मीडिया से संजय शिरसाट ने कहा कि इस तरह की कोशिश की गई, लेकिन ये एकतरफा नहीं हो सकता। संजय शिरसाट ने ये भी कहा कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना-यूबीटी के नेताओं और पदाधिकारियों से उनका रिश्ता पहले जैसा ही है। संजय शिरसाट के इस बयान के बाद इन चर्चाओं ने जोर पकड़ा है कि एक बार फिर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे में गलबहियां हो सकती हैं।
उद्धव ठाकरे की बात करें, तो बीते दिनों हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में उनकी शिवसेना-यूबीटी को जोर का झटका लगा था। उद्धव ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सिर्फ 20 सीट ही जीत सकी थी। उनकी सहयोगी कांग्रेस को 16 और शरद पवार वाले एनसीपी गुट को 10 सीटों पर ही सिमटना पड़ा था। जबकि, एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 57 सीट हासिल कर परचम लहराया था। शिंदे की सहयोगी बीजेपी ने 132 और अजित पवार की एनसीपी ने 41 सीट हासिल की थीं।