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Jyoti khandelwal Joins BJP: राजस्थान में कांग्रेस को चुनाव से पहले झटका, सचिन पायलट की करीबी ज्योति खंडेलवाल BJP में शामिल

Jyoti khandelwal Joins BJP: आगामी राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है। दरअसल, सचिन पायलट की करीबी व दिग्गज नेता ज्योति खंडेलवाल ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। साल 2019 में कांग्रेस ने उन्हें जयपुर की लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था।

नई दिल्ली। आगामी राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है। दरअसल, सचिन पायलट की करीबी व दिग्गज नेता ज्योति खंडेलवाल ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। साल 2019 में कांग्रेस ने उन्हें जयपुर की लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। बता दें कि राजस्थान में 25 नवंबर को चुनाव होने हैं और नतीजों की घोषणा आागमी 3 दिसंबर को होगी। वहीं, ज्योति खंडेलवाल के बीजेपी में शामिल होने से कांग्रेस में खलबली मच गई है। कांग्रेस का कोई भी नेता अभी इस पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

बीजेपी का बयान

उधर, ज्योति खंडेलवाल के पाला बदल लेने पर राजस्थान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्र प्रकाश जोशी का भी बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि आज चंद्रशेखर बैद, नंदलाल पूनिया, ज्योति खंडेलवाल समेत कई बड़े नेताओं ने बीजेपी का दामन थामा है। खंडेलवाल जयपुर से महापौर भी रह चुकी हैं। इतना ही नहीं, 2019 के चुनावी मैदान में उन्हें कांग्रेस ने टिकट भी थमाया था, लेकिन वो चुनाव जीतने में नाकाम रही। बीजेपी नेता ने आगे कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने के लिए कई लोक-लुभावने वादे किेए थे, लेकिन इतने वर्ष बीत जाने के बावजूद भी लोगों से किए गए वादे पूरे नहीं हो पाए। कांग्रेस ने 2018 में चुनाव के दौरान सत्ता में आने के लिए महिलाओं की सुरक्षा की गांरटी दी थी। किसानों की कर्जमाफी का ऐलान किया था। सभी को मुफ्त शिक्षा देने का वादा किया था। लेकिन अफसोस आज इतने वर्ष बीत जाने के बावजूद भी मौजूदा सरकार इन वादों में से एक भी वादा पूरा नहीं कर पाई है। मैं अब पूछना चाहता हूं कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है?

राजस्थान का पॉलिटिकल टेंपरेचर हाई

बता दें कि राजस्थान में इन दिनों ईडी की कार्रवाई की वजह से पॉलिटिकल टेंपरेचर हाई है। दरअसल, बीते दिनों ईडी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को फेमा मामने में समन जारी किया था, जिसका सीएम गहलोत ने विरोध किया था। उन्होंने बयान जारी कर ईडी के इस समन को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया था।

उधर, वैभव ने भी बाद में बयान जारी कर कहा कि आज से 12 साल पहले भी ई़डी ने मुझे बुलावा भेजा था, लेकिन उस वक्त भी ये लोग मेरा कुछ नहीं कर पाए। वहीं, बीते दिनों राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष व पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के आवास पर भी पेपर लीक मामले में छापेमारी हुई थी। य़ह छापेमारी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत हुई थी, जिसका कांग्रेस ने विरोध किया था। बहरहाल, राजस्थान का राजनीतिक तापमान चरम पर है। अब ऐसे में पार्टी की ओर से आगामी दिनों में क्या कुछ कदम उठाए जाते हैं। इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।