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PFI Banned: अबुबकर से ओएमए सलाम तक, प्रतिबंधित PFI की गतिविधियों के पीछे है उसके इन टॉप नेताओं का दिमाग

साल 2006 में स्थापना से लेकर अब तक हिंसा और देशविरोधी गतिविधियों में जुटे रहे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया PFI और उसके सहयोगी संगठनों पर आखिरकार केंद्र सरकार ने 5 साल का बैन लगा दिया है। इस बैन से पहले पीएफआई के नेताओं, उनके इरादों और भारत के टुकड़े करने की साजिश का भंडाफोड़ करने की खातिर लगातार छापेमारी की गई।

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नई दिल्ली। साल 2006 में स्थापना से लेकर अब तक हिंसा और देशविरोधी गतिविधियों में जुटे रहे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया PFI और उसके सहयोगी संगठनों पर आखिरकार केंद्र सरकार ने 5 साल का बैन लगा दिया है। इस बैन से पहले पीएफआई के नेताओं, उनके इरादों और भारत के टुकड़े करने की साजिश का भंडाफोड़ करने की खातिर लगातार छापेमारी की गई। 22 और 27 सितंबर को राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA, प्रवर्तन निदेशालय ED और राज्यों की एजेंसियों ने मिलकर पीएफआई के नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। पीएफआई के बड़े नेता गिरफ्तार हो चुके हैं और इनके बारे में जांच एजेंसियों को सबूत भी मिले हैं। इन सबूतों में हवाला से रकम इकट्ठा करने से लेकर गजवा-ए-हिंद यानी 2047 तक भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाने की साजिश और पीएम नरेंद्र मोदी समेत नामचीन नेताओं और प्रतिष्ठित लोगों को निशाना बनाने की कहानी है।

pfi

पीएफआई में यूं तो नेताओं की कमी नहीं है, लेकिन इनमें टॉप पर कुछ नेता ही हैं। इनमें सबसे अहम नेता ई. अबुबकर है। वो पहले नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (एनडीएफ) के साथ था। केरल के कोझीकोड के एक गांव में टीचर रह चुके अबुबकर को पीएफआई के सदस्य सबसे ज्यादा मानते हैं। वो आईडियल स्टूडेंट्स लीग, जमात-ए-इस्लामी और स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के साथ भी जुड़ा रहा है। अबुबकर के अलावा पीएफआई का दूसरा अहम नेता पी. कोया है। कोया सरकारी कॉलेज में अंग्रेजी का पूर्व टीचर रहा है। उसे पीएफआई का बौद्धिक चेहरा माना जाता है। कोया के जिम्मे इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जेक्टिव स्टडीज नाम का एनजीओ है। उसे राजनैतिक कैदियों की रिहाई के लिए बनाई गई कमेटी में भी पीएफआई ने रखा है।

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पीएफआई के अन्य बड़े नेताओं में मौजूदा अध्यक्ष ओएमए सलाम भी है। उसके अलावा याह्या थांगल, पीके उस्मान, ईएम अब्दुलरहमान, वीपी नसरुद्दीन उर्फ नसरुद्दीन इलामरम भी हैं। इन सभी को एनआईए और ईडी के छापों के दौरान गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, पीएफआई के नेताओं की लिस्ट यहीं खत्म नहीं होती। इस इस्लामी संगठन ने एसडीपीआई, इमाम काउंसिल और अन्य सहयोगी संगठन भी बना रखे हैं। जिनके अलग-अलग नेता और चेहरे हैं। ये सभी भारत विरोधी कार्यों की वजह से प्रतिबंध के दायरे में लाए गए हैं। आने वाले दिनों में पीएफआई और इन सहयोगी संगठनों के और नेता-कार्यकर्ता भी गिरफ्तारी की जद में आ सकते हैं।

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