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BJP and Shiv Sena Surrounded UBT MP Arvind Sawant : वक्फ संशोधन बिल के विरोध पर घिरे उद्धव ठाकरे की पार्टी के सांसद अरविंद सावंत, बीजेपी और शिवसेना ने खूब सुनाया

BJP and Shiv Sena Surrounded UBT MP Arvind Sawant : केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री क‍िरेन रिजिजू ने कहा, पहले जब ‘श‍िवसेना’ में थे तो अंदाज अलग था, हमें भी पसंद था, अब अंदाज बदल कैसे गया। वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना के सांसद श्रीकांत शिंदे बोले, मैं यूबीटी सांसद से एक सवाल पूछना चाहता हूं, जो उन्हें अपनी अंतरात्मा से पूछना चाहिए कि आज बालासाहेब ठाकरे जीवित होते तो भी क्या वो यही बोलते?

नई दिल्ली। लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के सांसद अरविंद सावंत ने अपनी पार्टी की तरफ से विधेयक का विरोध किया। उन्होंने ना सिर्फ सरकार की मंशा पर सवाल उठाए बल्कि इसके जरिए वक्फ की जमीन हड़पने का आरोप लगाया। सावंत बोले, ‘बंटोगे तो कटोगे’ की बात करने वालों को सौगात-ए-मोदी लाना पड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा और कार्रवाई मेल नहीं खाती। वहीं, बिल का विरोध करने पर पहले केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री क‍िरेन रिजिजू और फिर शिंदे गुट की शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने अरविंद सावंत को खूब सुनाया।

सावंत की बात का जवाब देते हुए केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री क‍िरेन रिजिजू ने कहा क‍ि मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि शिवसेना सांसद के तौर पर अरविंद सावंत का लहजा क्यों बदल गया है? पहले जब ‘श‍िवसेना’ में थे तो अंदाज अलग था, हमें भी पसंद था, अब अंदाज बदल कैसे गया। क्या इसलिए कि आपने कांग्रेस से हाथ मिला लिया है? वहीं सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा, शिवसेना और मेरे नेता एकनाथ शिंदे की ओर से मैं इस विधेयक का पूर्ण समर्थन करता हूं। यह एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण दिन है, पहले अनुच्छेद 370, फिर ट्रिपल तलाक और CAA, और अब यह विधेयक गरीब मुस्लिमों के कल्याण के लिए इस सदन में लाया गया है। उन्होंने कहा कि यूबीटी के अरविंद सावंत का भाषण सुनकर मुझे बहुत दु:ख हुआ। यह बहुत चौंकाने वाला था।

शिंदे ने कहा, मैं यूबीटी सांसद और उनकी पार्टी से एक सवाल पूछना चाहता हूं, उन्हें अपनी अंतरात्मा से पूछना चाहिए कि आज बालासाहेब ठाकरे जीवित होते तो भी क्या वो यही बोलते? आज यह स्पष्ट है कि यूबीटी किसकी विचारधारा को अपना रही है और इस विधेयक का विरोध कर रही है। उनके पास अपनी गलतियों को सुधारने, अपने इतिहास को फिर से लिखने और अपनी विचारधारा को जीवित रखने का एक सुनहरा अवसर था  लेकिन यूबीटी ने पहले ही बालासाहेब की विचारधारा को कुचल दिया। अगर बालासाहेब आज यहां होते और यूबीटी का असहमति नोट पढ़ते, तो उन्हें बहुत दु:ख होता।