नई दिल्ली। कर्नाटक में सरकार बनाने की जद्दोजहद खत्म होने के बाद अब कांग्रेस आलाकमान का ध्यान राजस्थान पर फोकस हुआ है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच लंबे अर्से से जारी जंग को खत्म कराने के लिए दोनों को दिल्ली बुलाया है। अशोक गहलोत और सचिन पायलट के अलावा बैठक में कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी भी रहेंगे। राजस्थान के लिए कांग्रेस के तीनों सह प्रभारी भी बैठक में होंगे। इस बैठक के बाद तय हो सकता है कि सचिन पायलट और अशोक गहलोत की जंग खत्म होती है या कांग्रेस आलाकमान कोई सख्त कदम उठाता है।
सचिन पायलट ने बीते एक महीने से अशोक गहलोत के खिलाफ अपनी आवाज और बुलंद कर दी है। उन्होंने वसुंधरा राजे सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचार के आरोपियों पर कार्रवाई न करने के मामले में अपनी सरकार के खिलाफ एक दिन का अनशन किया। इसके बाद पेपर लीक मामले में कार्रवाई न होने के खिलाफ उन्होंने अजमेर से जयपुर तक 5 दिन का मार्च निकाला। इस मार्च के बाद सचिन पायलट ने अशोक गहलोत सरकार को अल्टीमेटम भी दिया था कि अगर मई के अंत तक इस मामले में एक्शन न लिया गया, तो वो पूरे राजस्थान में आंदोलन करेंगे।
माना जा रहा है कि सचिन पायलट के इन्हीं तेवरों को देखकर अब कांग्रेस आलाकमान राजस्थान के मसले पर अंतिम फैसला करने जा रहा है। राजस्थान में इसी साल विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में गहलोत और पायलट की जंग कांग्रेस को भारी पड़ सकती है। सूत्रों के अनुसार अगर सचिन पायलट न माने, तो उनके खिलाफ कांग्रेस सख्त कार्रवाई भी कर सकती है। सचिन पायलट साल 2020 से गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। वहीं, गहलोत भी कई बार पायलट को बड़ा कोरोना, गद्दार और नाकारा कह चुके हैं।